

शोक समाचार: साहित्य और संस्कृति के एक युग का अंत, कामरेड माधौसिंह जी को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
स्मारिका का विमोचन; देश के प्रख्यात कवियों व शायरों से थे आत्मीय संबंध
विदिशा। नगर के प्रतिष्ठित उद्योगपति, प्रख्यात संस्कृति कर्मी और साहित्यिक-सामाजिक अभिरुचियों के धनी कामरेड माधौसिंह जी के निधन से संपूर्ण साहित्य और संस्कृति जगत में शोक की लहर है। उनके निधन पर शोक व्यक्त करने और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए नगर के प्रबुद्धजन, साहित्यकार और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उनके निवास स्थान पर एकत्रित हुए।
लायंस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी लायन अरुण कुमार सोनी ने बताया कि श्रद्धांजलि सभा में नगर की दिग्गज हस्तियों ने स्व. माधौसिंह जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया।
स्मृतियों में जीवित रहेंगे माधौसिंह जी: वक्ताओं के विचार
शायर निसार मालवी: “स्व. माधो सिंह जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि मोहब्बत, भाईचारे, साहित्य-सेवा और इंसानियत की जीवंत मिसाल थे। साहित्यकारों के प्रति उनका सम्मान सदैव हमारे दिलों में रहेगा।”
डॉ. शीलचंद पालीवाल (हिन्दी प्राध्यापक): उन्होंने देश के प्रख्यात कवि गोपालदास ‘नीरज’ और मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र के साथ माधौसिंह जी के आत्मीय रिश्तों का ज़िक्र करते हुए, कवि सम्मेलनों में उनकी गहरी रुचि को रेखांकित किया।
श्री ब्रज श्रीवास्तव (समकालीन कवि): उन्होंने विभिन्न लेखक संघों से माधौसिंह जी के जुड़ाव का उल्लेख किया और उनके साथ की गई भोपाल यात्राओं के संस्मरण साझा किए।
श्री गोविंद देवलिया (इतिहासकार): उन्होंने पाठक न्यास और विदिशा की विरासत के संरक्षण में माधौसिंह जी के अमूल्य सहयोग तथा उनकी पुरातात्त्विक जानकारियों को याद किया।
डॉ. कमल चतुर्वेदी एवं श्री अस्मुरारी नंदन मिश्र: “कामरेड माधौसिंह जी जैसे लोग वैचारिक रूप से हम सब में हमेशा जीवित रहेंगे। उनकी यह उपस्थिति अक्षुण्ण और अमर है।”
श्री गोवर्घन सिंह चौहान एवं सोहेल अहमद बबलू (अपना घर): “हमेशा गुप्त रूप से (सबसे छुपाकर) दूसरों की मदद करना और निस्वार्थ समाजसेवा करना मैंने उन्हीं से सीखा है।”
श्री दिनेश बाजपेयी (प्रतिभा विकास संस्थान): वे हमेशा संस्थान की रचनात्मक गतिविधियों की आत्मीयता से जानकारी लेते रहते थे।
श्री सुदिन श्रीवास्तव व आचार्य शिवकुमार तिवारी: उन्होंने माधौसिंह जी को सांगीतिक कार्यक्रमों का बड़ा सहयोगी, एक गंभीर श्रोता और विविध विषयों का प्रकांड ज्ञानी बताया।
काव्यमय श्रद्धांजलि और शोक पत्र का वाचन
श्रद्धांजलि सभा में शायर शाहिद अली शाहिद, नज़ीर नूरी, हबीब नादां, चांद खां चांद, सत्येंद्र सत्यज, हरगोविंद मैथिल, प्रियम, सुमित सिंह, लक्ष्मण नेपाली, महमूद कामिल, महेंद्र वर्मा और अरुण सोनी ने अपनी कविताओं व गजलों के माध्यम से उन्हें काव्यात्मक विदाई दी। इस अवसर पर पाठक न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष श्री गोविंद देवलिया, सचिव श्री सुनील जैन, श्री चक्रवर्ती जैन, डॉ. नीरज शक्ति निगम, अरविंद श्रीवास्तव, प्रकाश पाठक और राजकुमार गुप्ता ने शोक संतप्त परिवार को न्यास की ओर से शोक पत्र सौंपा। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री गोविंद देवलिया ने किया।
विदाई गीत और दोहों से गंभीर हुआ माहौल
सभा में माधौसिंह जी के परम मित्र डॉ. जगमोहन शर्मा द्वारा रचित भावपूर्ण दोहों का प्रस्तुतीकरण श्री उमेश शर्मा ने किया, जिसने माहौल को बेहद भावुक और गंभीर बना दिया। कार्यक्रम का समापन श्री प्रदीप जैन पारस और आशुतोष ठाकुर द्वारा गाए गए विदाई गीत के साथ हुआ।
जीवंत दस्तावेज ‘स्मारिका’ का प्रकाशन:
इस दुखद घड़ी में स्व. माधौसिंह जी की मधुर स्मृतियों को संजोए हुए एक विशेष ‘स्मारिका’ का प्रकाशन भी किया गया, जिसे उपस्थित जनों ने उनकी यादों का एक जीवंत दस्तावेज माना।
नगर की विभिन्न संस्थाओं की गरिमामयी उपस्थिति
श्रद्धांजलि सभा में पत्रकार प्रदीप पवार, जैन शिक्षण संस्था के अध्यक्ष सेठ संजय जैन, रोटरी क्लब से राजीव पीतलिया, सुजीत देवलिया, सर्वोदय मंडल से प्रो. द्विवेदी, नरेंद्र सिंह, जनप्रतिनिधि छत्रपाल शर्मा, उद्योगपति संजय अग्रवाल, दुष्यन्त जैन, विनोद जैन सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
अंत में स्व. माधौसिंह जी के परिवार जन कमोद सिंह, तथा पौत्र देवांग, युवराज और वेदांग ने संकट की इस घड़ी में संबल देने के लिए सभी उपस्थित जनों के प्रति कृतज्ञता भाव प्रकट किए।


