
दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन पर शनिवार सुबह योग एक्सप्रेस का ठहराव महज दो मिनट का था, लेकिन यही दो मिनट दिल्ली मेट्रो के गार्ड पंकज धामा की जिंदगी पर भारी पड़ गए। 34 मिनट की देरी से पहुंची ट्रेन में उतरने के दौरान शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक मारपीट में बदल गया। आरोपियों ने पंकज को लात-घूंसों से पीटा, फिर उसी ट्रेन में सवार होकर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल पंकज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं हो सकी और उन्हें ई-रिक्शा से जीटीबी अस्पताल ले जाया गयाअपने गांव लौटने के लिए शाहदरा रेलवे स्टेशन पहुंचे थे पंकज
35 वर्षीय पंकज धामा आईपी एक्सटेंशन मेट्रो स्टेशन पर ड्यूटी पूरी करने के बाद वह अपने गांव लौटने के लिए शाहदरा रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। शनिवार सुबह ट्रेन संख्या 19031 योग एक्सप्रेस निर्धारित समय से 34 मिनट देरी से शाहदरा स्टेशन पहुंची। सप्ताहांत होने के कारण स्टेशन पर यात्रियों की अच्छी-खासी भीड़ थी। हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाले यात्रियों की संख्या भी अधिक बताई जा रही है।आठ लोगों को हिरासत में लिया गया
रेलवे पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार ट्रेन के कोच के दरवाजे पर यात्रियों के चढ़ने-उतरने के दौरान विवाद शुरू हुआ। सामान्य तौर पर पहले उतरने वाले यात्रियों को रास्ता दिया जाता है, लेकिन इसी दौरान कहासुनी बढ़ गई और कुछ ही क्षणों में मामला हाथापाई तक पहुंच गया। रेलवे सूत्रों के अनुसार योग एक्सप्रेस सुबह 5:53 बजे शाहदरा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर पहुंची थी और 5:55 बजे रवाना हो गई। जबकि इस ट्रेन को सुबह 5:19 बजे पहुंचना था और 5:21 पर प्रस्थान करना था। जांच में सामने आया है कि झगड़े में शामिल युवक उसी ट्रेन में सवार होकर निकल गए। बाद में रेलवे पुलिस और जीआरपी के समन्वय से मुजफ्फरनगर स्टेशन पर आठ युवकों को ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया गया। डीसीपी रेलवे के अनुसार पकड़े गए सभी आरोपी छात्र हैंनहीं पहुंची एंबुलेंस, ई-रिक्शा से ले जाया गया अस्पताल…
घटना ने रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के समय प्लेटफॉर्म पर आरपीएफ का जवान मौजूद था। लेकिन वह बचाव नहीं कर सका। वहीं दूसरी ओर अरबों रुपये के बजट वाला रेवले सुबह के समय एक एंबुलेंस तक नहीं पहुंचा सका। आरपीएफ के अनुसार एंबुलेंस को सूचना दी गई थी, लेकिन घायल पंकज को अंततः ई-रिक्शा से जीटीबी अस्पताल ले जाया गया। राजधानी के एक व्यस्त रेलवे स्टेशन पर गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। स्टेशन पर रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही रहती है और सुबह का समय सबसे व्यस्त समयों में गिना जाता है। इसके बावजूद आपात स्थिति में घायल को निजी साधन के भरोसे अस्पताल पहुंचाना पड़ा।