मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती जी स्मृति दिवस पर उमड़ा सैलाब: बीके कौशल्या दीदी के द्वारा जगदंबा दीदी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए हुई ज्ञान ध्यान की चर्चा





विदिशा/प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय आश्रम में ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती जी का संपूर्ण दिवस (स्मृति दिवस) बेहद श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। केंद्र संचालिका बीके कौशल्या दीदी के पावन सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक उपस्थित हुए।
दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके पश्चात मातेश्वरी जी के चित्र पर गुलाब की विशेष माला अर्पित कर भावभीनी पुष्पांजलि दी गई। आश्रम की नन्हीं कन्याओं ने मुख्य अतिथि लायन अरुण कुमार सोनी को तिलक लगाकर और गुलदस्ते भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। इससे पूर्व, नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष दीदी ज्योति शाह ने कार्यक्रम की शुरुआत में ही पहुंचकर मातेश्वरी जी को पुष्पांजलि अर्पित की और अपनी शुभकामनाएं दीं।
’मम्मा’ के दिव्य स्वरूप और आध्यात्मिक जीवन पर प्रकाश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, लायंस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी लायन अरुण कुमार सोनी ने अपने संबोधन में मातेश्वरी जी (मम्मा) के जीवन के प्रेरक प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा:
”मां जगदंबा की अध्यात्म के प्रति गहरी अंतर्मुखी दृष्टि के कारण ही उन्हें ‘ओम राधे’ का नाम मिला था। उनकी प्रखर विद्वता के चलते वे ‘सरस्वती’ कहलाईं। मम्मा के व्यक्तित्व में ऐसी दिव्य दृष्टि और मातृत्व था कि मात्र 14-15 वर्ष की अल्पायु में ही उनसे उम्र में काफी बड़े और सीनियर लोग भी उन्हें ‘मां’ कहकर पुकारते थे। यहाँ तक कि उनकी लौकिक माता भी उन्हें ‘माता’ कहकर ही संबोधित करती थीं।”
उन्होंने मानव जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए आध्यात्मिक प्रभाव को बेहद जरूरी बताया।
गहराई से समझे मम्मा के महान कार्य
केंद्र संचालिका बीके कौशल्या दीदी ने बहुत ही विस्तार और गहराई के साथ मातेश्वरी जी के जीवन, उनके महान कार्यों और आध्यात्मिक उपलब्धियों के बारे में उपस्थित जनसमूह को समझाया। उन्होंने बताया कि मम्मा का जीवन हर कदम पर पवित्रता, धैर्य और त्याग की मिसाल था, जिससे प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन को भी श्रेष्ठ बना सकते हैं।
ब्रह्मभोज और प्रसादी के साथ समापन
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में अनीता दीदी सहित अन्य दीदियों और भाई जी लोगों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन और उपस्थित सभी जनों का आभार व्यक्त भाई जी डॉ. जीवन लाल मालवीय द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को पवित्र ‘ब्रह्मभोज’ और प्रसादी का वितरण किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के भारी संख्या में महिला एवं पुरुष भाई-बहन उपस्थित रहे।

