आदिवासी साहित्य महोत्सव से समाज की भाषाओं और बोलियों को जानने का मौका मिला
मैं शिक्षा, खेल और पर्यावरण के लिए काम रही हूं - रमा टेकाम

भोपाल में रविवार को पहले आदिवासी साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गया। बालाघाट से कार्यक्रम में शामिल होने आईं टीचर ,समाजसेवी, कवयित्री और कोच रमा टेकाम ने कहा कि यह भारत का पहला आदिवासी साहित्य महोत्सव है, यहां पर सभी राज्यों से आए साहित्यकारों का समागम है। हमारे समाज में बहुत सी भाषाएं और बोलियां हैं, महोत्सव में सभी को जानने और समझने का मौका मिला। रमा टेकाम ने आगे कहा कि मैं एक शासकीय शिक्षक हूं ,कक्षा नवी से 12वीं तक के बच्चों को पढ़ाती हूं। इस बार हमारे स्कूल के कक्षा दसवीं का परीक्षा परिणाम सत्र प्रतिशत रहा, शिक्षा में बेहतर योगदान देने पर मुझे अत्यधिक खुशी होती है।इसके अलावा मैं स्टूडेंट लाइफ से नेशनल खिलाड़ी रही हूं। खो- खो और अन्य खेलों में मेरी रुचि रही है। अब मैं बालाघाट में सॉफ्टबॉल गेम को बढ़ावा दे रही हूं जिसमें बच्चे नेशनल स्तर पर खेल चुके हैं । उन्होंने कहा कि हम आदिवासी प्रकृति प्रेमी हैं और पेड़ पौधे हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं ।मैं अपने जन्मदिन पर पौधारोपण करती हूं इसके अलावा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 10 वर्षों से पौधारोपण को बढ़ावा दे रही हूं।


