आउटसोर्स कर्मचारियों के हित का संरक्षण कर 10 वर्ष से अधिक कार्य करने वालों को नियमित किया जाए
निगम मंडलों के वरिष्ठ कर्मचारी नेता अनिल बाजपेई एवं अरुण वर्मा
ने दैनिक वेतन भोगी एवं आउट सोर्स संविदा कर्मचारियों को हाई कोर्ट के आदेश् के तहत नियमित नही करने का कड़ा बिरोध करते हुए बताया कि हाई कोर्ट जबलपुर ने आउट सोर्स संविदा कर्मचारियों को
जिनकी सेवा 10 वर्ष से अधिक हो गई है उन्हे नियमित किया जाए किन्तु
शासकीय अर्द्ध शासकीय निगम मंडलों मे हाई कोर्ट के आदेश का पालन नही किया जा रहा है जो न्यायालय के आदेश कि अवहेलना है
वर्तमान परिस्थितियों में आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी उपाय न्यायिक संरक्षण प्राप्त करना प्रतीत होता है। कर्मचारियों की आशंका है कि न्यूनतम वेतन, श्रम संहिताओं तथा अन्य वैधानिक प्रावधानों के लागू होने के पश्चात विभागों द्वारा आउटसोर्स व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं प्रभावित की जा सकती हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के संबंध में नियम एवं नीतियां बनाए जाने के प्रस्ताव विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन बताए जाते रहे हैं, किंतु अब तक इस विषय में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों के हितों की रक्षा हेतु यह आवश्यक है कि जब तक आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नियम, सेवा शर्तें एवं सुरक्षा संबंधी प्रावधान अधिसूचित नहीं हो जाते, तब तक किसी भी कर्मचारी की सेवा समाप्त करने, छंटनी करने अथवा कार्य से पृथक करने की कार्यवाही न की जाए।
अतः निगम मंडलो के वरिष्ठ कर्मचारी नेता अरुण वर्मा एवं अनिल बाजपेई ने निगम मंडलो के अध्यक्ष एवं प्रबंध संचलकों से अनुरोध किया है कि जिन आउट सोर्स संविदा कर्मचारियों कि सेवाएं 10 वर्ष से अधिक हो गई है उन्हे हाई कोर्ट के आदेश के तहत नियमित किया जाए अन्यथा धरना प्रदर्शन करेंगे


