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मणिपाल हॉस्पिटल्स ने मल्टीडिसिप्लिनरी लिवर एवं जीआई इंस्टीट्यूट का शुभारंभ किया, पूर्वी भारत में पाचन स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा

कोलकाता, 11 अप्रैल 2026: पूर्वी भारत में विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाई देने की दिशा में मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास, जो मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप की एक इकाई है, ने अपने इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड डाइजेस्टिव डिसऑर्डर्स एंड लिवर केयर सेंटर की शुरुआत की है। उन्नत गैस्ट्रो एवं लिवर केयर के लिए एक समग्र केंद्र के रूप में डिज़ाइन किया गया यह संस्थान अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स, विशेषज्ञों द्वारा संचालित बहु-विषयक देखभाल और लिवर ट्रांसप्लांट सेवाओं सहित जटिल उपचारों को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। निर्बाध और रोगी-केंद्रित देखभाल पर केंद्रित यह केंद्र क्षेत्र में लिवर और पाचन संबंधी रोगों के उपचार और प्रबंधन के मानकों को नया आयाम देने का लक्ष्य रखता है।
लॉन्च कार्यक्रम में वरिष्ठ नेतृत्व एवं चिकित्सा विशेषज्ञों की उपस्थिति रही, जिनमें डॉ. सुमंता डे, सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी – रोबोटिक, एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक, बैरियाट्रिक एवं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी, मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास; डॉ. जयन्त रेड्डी, लीड कंसल्ट सर्जन एवं हेड – एचपीबी सर्जरी, मल्टी-ऑर्गन एब्डॉमिनल ट्रांसप्लांट एवं हेपेटोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु; डॉ. संजय बसु, सीनियर कंसल्टेंट – गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर; डॉ. शुभायु बनर्जी, कंसल्टेंट – जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक जीआई एवं ऑन्कोलॉजी सर्जरी, मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर एवं धाकुरिया; डॉ. प्रदीप्त कुमार सेठी, डायरेक्टर – गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास एवं मुकुंदपुर क्लस्टर; डॉ. अयनाभ देबगुप्ता, रीजनल डायरेक्टर, मणिपाल हॉस्पिटल्स ईस्ट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। सभी ने जटिल लिवर एवं पाचन रोगों से निपटने में विशेषीकृत और एकीकृत देखभाल के महत्व पर बल दिया।
इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड डाइजेस्टिव डिसऑर्डर्स एंड लिवर केयर सेंटर को एक समग्र, रोगी-केंद्रित सुविधा के रूप में विकसित किया गया है, जो प्रारंभिक निदान और निवारक स्क्रीनिंग से लेकर उन्नत चिकित्सा प्रबंधन, लिवर ट्रांसप्लांट सेवाओं और जटिल सर्जिकल हस्तक्षेपों तक संपूर्ण सेवाएं प्रदान करता है। यह केंद्र फैटी लिवर डिज़ीज़, हेपेटाइटिस, सिरोसिस, लिवर कैंसर, पैंक्रियाटिक विकार, इन्फ्लेमेटरी बाउल डिज़ीज़ और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर सहित अनेक बीमारियों के उपचार हेतु अत्याधुनिक तकनीक और क्लिनिकल विशेषज्ञता का समन्वय करता है।
उन्नत एंडोस्कोपी सुइट्स, मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक सर्जिकल क्षमताओं तथा समर्पित लिवर केयर यूनिट्स से लैस यह केंद्र एक मजबूत लिवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम भी संचालित करता है, जो एंड-स्टेज लिवर डिज़ीज़, एक्यूट लिवर फेल्योर और कुछ लिवर कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए जीवनरक्षक उपचार प्रदान करता है। समय पर हस्तक्षेप से जीवित रहने की संभावना और जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। क्लिनिकल उत्कृष्टता के साथ-साथ यह केंद्र जीवनशैली प्रबंधन, पोषण परामर्श और दीर्घकालिक निगरानी पर भी ज़ोर देता है ताकि समग्र रिकवरी सुनिश्चित की जा सके।
डॉ. जयन्त रेड्डी ने कहा,
“पूर्वी भारत में लिवर ट्रांसप्लांट अभी भी जागरूकता और समय पर रेफरल की कमी के कारण पर्याप्त रूप से उपयोग नहीं हो रहा है। उदाहरण के लिए, कोलकाता जैसे शहर में पिछले वर्ष लगभग 25 लिवर ट्रांसप्लांट हुए, जबकि वास्तविक आवश्यकता कम से कम दोगुनी है। यह अंतर दर्शाता है कि लिवर ट्रांसप्लांट को एक व्यवहार्य, जीवनरक्षक विकल्प के रूप में लेकर अधिक जागरूकता की आवश्यकता है। आम धारणा के विपरीत, लिवर ट्रांसप्लांट के लिए मुख्य आवश्यकता केवल संगत रक्त समूह होती है, जिससे यह प्रक्रिया लोगों की सोच से कहीं अधिक सुलभ है।”
डॉ. प्रदीप्त कुमार सेठी ने कहा,
“पूर्वी भारत में 50% से अधिक क्रॉनिक लिवर डिज़ीज़ के मामले अल्कोहल से जुड़े हैं, जबकि लगभग 20% भारतीय फैटी लिवर डिज़ीज़ से प्रभावित हैं, जो प्रति वर्ष 2 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता है। इस तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य बोझ के बावजूद, प्रमुख चुनौती समय पर निदान और समग्र उन्नत देखभाल की सीमित उपलब्धता रही है।”
डॉ. संजय बसु ने कहा,
“कई गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और लिवर रोग उन्नत अवस्था तक बिना पहचान के रह जाते हैं। हमारे केंद्र में एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS), एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलांजियोपैंक्रियाटोग्राफी (ERCP), एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी तथा लिवर स्कैन एवं बायोप्सी जैसे व्यापक डायग्नोस्टिक परीक्षण उपलब्ध हैं, जो प्रारंभिक पहचान और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करते हैं।”
डॉ. शुभायु बनर्जी ने कहा,
“यह केंद्र उन्नत सर्जिकल समाधान प्रदान करता है, जिसमें लैप्रोस्कोपिक और मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं जैसे कोलेसिस्टेक्टॉमी, अपेंडेक्टॉमी, हर्निया रिपेयर और बैरियाट्रिक सर्जरी शामिल हैं, साथ ही जटिल रिसेक्शन, रेक्टल कैंसर और पेल्विक प्रक्रियाओं के लिए अत्याधुनिक रोबोटिक जीआई सर्जरी भी उपलब्ध है।”
डॉ. अयनाभ देबगुप्ता ने कहा,
“पूर्वी भारत में लिवर रोग एक प्रमुख स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभर रहा है, जहां अध्ययनों के अनुसार लगभग प्रत्येक 5 में से 1 वयस्क फैटी लिवर डिज़ीज़ से प्रभावित हो सकता है। इसके बावजूद, लिवर ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत सेवाओं तक क्षेत्र में पहुंच सीमित रही है।”
इस पहल के माध्यम से, मणिपाल हॉस्पिटल्स का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, प्रारंभिक हस्तक्षेप को सक्षम बनाना और लिवर एवं पाचन रोगों के लिए विश्वस्तरीय उपचार प्रदान कर क्षेत्र में रोगी परिणामों एवं जीवन गुणवत्ता में सुधार करना है।

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