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घरेलू हिंसा को ‘समझौते’ के नाम पर दबाना खतरनाक, सुप्रीम कोर्ट ने परिवार को चेताया

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा और ससुराल में पत्नी की हत्या के एक मामले में समाज और परिवारों की उस प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है, जिसमें विवाहित लड़कियों की पीड़ा को ‘समझौते’ के नाम पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि घरेलू हिंसा की शिकायतों को ‘समझौते’ के नाम पर दबाना खतरनाक सामाजिक विफलता है। पेश मामले में कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की बार-बार की गई घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न की शिकायतों को या तो हल्के में लिया गया या दबा दिया गया। उसे पति के पास वापस भेजने का दबाव बनाया गया। आखिर में ससुराल में उसकी हत्या कर दी गई। अपीलकर्ता पति ने इसे आत्महत्या का मामला बताने की नाकाम कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की हत्या और घरेलू क्रूरता के मामले में पति की सजा को बरकरार रखते हुए उम्मीद जताई कि इस पीड़िता की कहानी कई लोगों के लिए – ‘आंखें खोलने वाली’ साबित होगी।

शादी के दो महीनो में ही ससुरालवालो ने दहेज के लिए सताना शुरू किया

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि विवाहित पीड़िता ने परिवार से बार-बार पति की हिंसा की शिकायत की थी, लेकिन नाते रिश्तेदारों और गांव के बुजुर्गों ने उसकी बातो को अनसुना किया और सुलह की उम्मीद में उसे वापस ससुराल भेज दिया।

गांव के लोगो ने समझौता कराया, फिर भी हिंसा नही थमी, ससुराल में मरी मिली

पीड़िता ने बार-बार पति की हिंसा की शिकायत की थी, लेकिन परिजनों ने अनसुना किया। सुलह की उम्मीद में वापस ससुराल भेज दिया, जहां उसकी हत्या कर दी गई। उम्मीद है, यह कहानी आंखें खोलने वाली साबित होगी। सुप्रीम कोर्ट ने परिवारवालों और गांव के लोगों की बार-बार की गई चूक की निंदा की और कहा कि हर बार जब उसने मुद्दा उठाया, तो केवल समझौता कराने और उसे वापस ससुराल भेजने के प्रयास किए गए।

पीड़िता के अपने लोगों ने भोलेपन में मान लिया कि किसी तरह स्थिति बेहतर हो जाएगी। झूठी आशावादिता ने उन्हें घेर लिया। उनकी उम्मीदें तब टूट गई, जब पीड़िता का ससुराल में दुखद अंत हुआ।

ट्विशा मामले में ‘आरोपियों को बचाने’ की कहानी से SC दुखी

  • सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मॉडल-ऐक्ट्रेस ट्विशा शर्मा के केस का खुद नोटिस लेते हुए सोमवार को सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि हम इस बात से दुखी है कि ऐसी कहानियां गढ़ी जा रही है, मानो न्यायपालिका आरोपियों को बचा रही हो।
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में केंद्रीय जाच एजेंसी CBI ‘निष्पक्ष, स्वतंत्र और निष्कलंक’ जांच करेगी, जिससे कि किसी भी तरह के संस्थागत पक्षपात की आशंका न रहे।
  • सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा के परिवार और ससुराल पक्ष दोनों से बयानबाजी से बचने को कहा। मीडिया से भी अपील की कि वह दोनों पक्षों के बयान प्रकाशित करने में संयम बरते।

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