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अपना सबसे सुरक्षित विमान छोड़ा, खाने वाले कंटेनर में छिपे, फिर US पहुंचे ट्रंप; किस बात का था डर?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब तक कई बार ईरान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दे चुके हैं। खासकर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई और कई और सैन्य-राजनीतिक नेताओं और अफसरों पर हमलों के बाद अमेरिका अपनी खुफिया क्षमताओं को लेकर काफी बड़े दावे करता रहा है। हालांकि, ईरान की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई एक धमकी के बाद हालिया समय में ऐसा घटनाक्रम हुआ, जो अमेरिकी सुरक्षा दायरे की मजबूती के दावों की पोल खोलता है।  दरअसल, बीते महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तुर्किये में हुए नाटो सम्मेलन के बाद जिस तरह से छिपाकर निकाला गया, वह न सिर्फ दुनिया के सबसे सुरक्षित विमान, उसके बेडे़ और अमेरिका की सैन्य क्षमताओं के लिए बड़ा सवाल है, बल्कि उसकी खुफिया व्यवस्थाओं के लिए भी प्रश्नचिह्न के तौर पर उभरा है।

आइये जानते हैं कि बीते महीने के नाटो सम्मेलन के जिस घटनाक्रम की बात हो रही है, वह क्या है? ईरान की किस धमकी पर अमेरिकी खुफिया विभाग ने राष्ट्रपति की यात्रा का तरीका बदल दिया? सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले एयरफोर्स वन विमान और इसके बेड़े को ट्रंप को वापस ले जाने के लिए इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया? इससे पहले कब-कब और क्यों अमेरिकी राष्ट्रपतियों को सफर के तरीकों और जरियों को बदला गया है? 

पहले जानें- तुर्किये में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ हुए किस घटनाक्रम की चर्चा?

तुर्किये में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े एक बेहद गुप्त और असाधारण सुरक्षा ऑपरेशन की चर्चा हो रही है, जिसे पिछले महीने अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अंजाम दिया गया था।

1. ट्रंप की हत्या का गंभीर खतरा मंडराया
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच खुफिया अधिकारियों की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप की जान को ईरान से गंभीर खतरा होने की बात कही गई थी। सुरक्षा चिंता के चलते ट्रंप सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कतर की तरफ से उपहार में दिए गए एयर फोर्स वन विमान में पहुंचे थे, लेकिन उनकी सुरक्षित रवानगी के लिए एक गुप्त चकमा देने वाली योजना बनाई गई।

2. बयान कुछ, योजना कुछ और…
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे पहले अमेरिकी अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने खुलासा किया। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वे तुर्किये से निकलने के लिए कतर की तरफ से उपहार में दिए गए नए विमान के बजाय पुराने एयर फोर्स वन विमान का इस्तेमाल करेंगे। हालांकि, पर्दे के पीछे खुफिया एजेंसियों ने उन्हें पुराने विमान से भेजने की योजना भी नहीं बनाई थी।

3. कैमरों के सामने पुराने विमान में चढ़े, कैटरिंग ट्रॉली में छिपाकर निकाले गए 

  • जब ट्रंप की तुर्किये से रवानगी का समय आया तो वे टीवी कैमरों के सामने अंकारा एयरपोर्ट पर अपनी विशेष लिमोजीन कार में बैठकर पहुंचे। इसके बाद वे रेड कार्पेट पर होते हुए पुराने एयर फोर्स वन विमान पर चढ़ते भी दिखे। उन्होंने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया। हालांकि, इसके बाद की पूरी योजना खुफिया टीमों की थी।
  • कैमरे की नजरों के सामने विमान में सवार होने के ठीक बाद ट्रंप और उनके कुछ चुनिंदा सलाहकारों को विमान के दूसरी तरफ, यानी जहां से मीडियाकर्मी सवार नहीं हो रहे थे, से लगे एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक के कंटेनर में छिपाया गया और इस कंटेनर को चुपके से नीचे उतार कर इसे पास खड़े एक छोटे सैन्य विमान सी-32ए में स्थानांतरित कर दिया गया।

4. पत्रकारों ही नहीं, व्हाइट हाउस कर्मी भी रहे ट्रंप की गौरमौजूदगी से अनजान
पुराने एयर फोर्स वन विमान में सवार पत्रकारों और व्हाइट हाउस के अन्य कर्मचारियों को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि राष्ट्रपति उनके साथ विमान में यात्रा नहीं कर रहे हैं। दरअसल, राष्ट्रपति के लिए केबिन बिल्कुल अलग होता है, जहां आने-जाने पर पाबंदियां होती हैं। यह विमान उन्हें लेकर ब्रिटेन के लिए उड़ा। इससे वह विमान ट्रंप के वास्तविक ठिकाने को छिपाने के लिए एक छलावा साबित हुआ, जबकि ट्रंप दूसरे छोटे विमान में सवार रहे।

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