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कोलकाता में उन्नत हृदय रोग उपचार की बढ़ती उत्कृष्टता ने आंध्र प्रदेश के मरीज को जटिल एंजियोप्लास्टी के लिए मणिपाल हॉस्पिटल, ईएम बाईपास तक पहुंचाया

कोलकाता, 26 मई 2026: उन्नत हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में कोलकाता की लगातार बढ़ती प्रतिष्ठा का एक और सशक्त उदाहरण सामने आया है। आंध्र प्रदेश के 66 वर्षीय एक मरीज ने लगभग 1,500 किलोमीटर की दूरी तय कर मणिपाल हॉस्पिटल, ईएम बाईपास में एक अत्यंत जटिल एंजियोप्लास्टी करवाई। यह प्रक्रिया मणिपाल हॉस्पिटल, ईएम बाईपास के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख (प्रोफेसर) डॉ. रबीन्द्र नाथ चक्रवर्ती के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस उपचार में हाल ही में वैश्विक स्तर पर लॉन्च किए गए नई पीढ़ी के कोरोनरी स्टेंट का उपयोग किया गया, जिसने न केवल मरीज के हृदय स्वास्थ्य को बहाल किया बल्कि यह भी दर्शाया कि देशभर के मरीज अब तकनीक-आधारित और भरोसेमंद इलाज के लिए कोलकाता को प्राथमिकता दे रहे हैं।
विशाखापट्टनम निवासी बिमल राव (नाम परिवर्तित) पिछले 27 वर्षों से डॉ. रबीन्द्र नाथ चक्रवर्ती से जुड़े हुए हैं। यह लंबा संबंध इस बात का प्रमाण है कि देश के विभिन्न हिस्सों के मरीज अब कोलकाता की उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना भरोसा कर रहे हैं। उनकी हृदय संबंधी चिकित्सा यात्रा वर्ष 1999 में शुरू हुई, जब 41 वर्ष की आयु में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में रहने के दौरान उन्हें हल्का हार्ट अटैक आया। जांच में धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज पाए जाने के बाद उन्हें जीवनरक्षक एंजियोप्लास्टी के लिए हैदराबाद रेफर किया गया। वर्ष 2005 में हृदय संबंधी जटिलताएं दोबारा सामने आने पर उनकी दूसरी एंजियोप्लास्टी की गई। इसके बाद दो दशकों से अधिक समय तक वह नियमित फॉलो-अप और उपचार के जरिए स्थिर रहे तथा परामर्श के लिए लगातार कोलकाता आते रहे। हाल ही में लगभग तीन महीनों से सीने में असहजता महसूस होने पर उन्होंने एक बार फिर उसी विशेषज्ञ से इलाज कराने का निर्णय लिया, जिन पर वह पिछले लगभग तीन दशकों से भरोसा करते आ रहे हैं।
दोबारा किए गए एंजियोग्राम में पता चला कि पहले लगाए गए मेडिकेटेड स्टेंट के भीतर ही दोबारा ब्लॉकेज विकसित हो गया है, जिसके लिए अत्यंत जटिल और विशेष एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता थी। मणिपाल हॉस्पिटल, ईएम बाईपास, कोलकाता की कार्डियोलॉजी टीम ने कटिंग बैलून और अत्याधुनिक इंटरवेंशनल डिवाइसेज़ जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करते हुए सफलतापूर्वक रक्त प्रवाह को सामान्य किया। इसके बाद मरीज को हाल ही में लॉन्च किया गया एबॉट स्काईपॉइंट स्टेंट लगाया गया, जो नई पीढ़ी के कोरोनरी स्टेंट्स में से एक है और अपनी बेहतर लचीलापन, जटिल धमनियों में सहज नेविगेशन और लंबे समय तक बेहतर परिणामों के लिए जाना जाता है।
इस मामले पर बात करते हुए (प्रोफेसर) डॉ. रबीन्द्र नाथ चक्रवर्ती ने कहा, “यह एक अत्यंत जटिल एंजियोप्लास्टी थी क्योंकि पहले लगाए गए मेडिकेटेड स्टेंट के भीतर ही दोबारा ब्लॉकेज बन गया था। इस तरह की प्रक्रियाओं में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञता, सटीक उपकरणों और आधुनिक तकनीकों की आवश्यकता होती है। हमने दुनिया के नवीनतम पीढ़ी के स्टेंट्स में से एक का उपयोग किया, जो जटिल कोरोनरी संरचना में भी बेहतर लचीलापन और लंबे समय तक उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदान करता है। यह मामला इस बात को भी दर्शाता है कि पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के मरीजों का भी कोलकाता की स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बढ़ रहा है। आज मरीज उन्नत हृदय रोग उपचार के लिए केवल चेन्नई या हैदराबाद जैसे महानगरों का ही रुख नहीं कर रहे हैं, बल्कि अनुभवी विशेषज्ञों, आधुनिक तकनीकों और मानवीय देखभाल के कारण कोलकाता को भी चुन रहे हैं। मरीज की हमारे साथ 27 वर्षों की यात्रा इसी विश्वास का प्रमाण है।”
अपना अनुभव साझा करते हुए बिमल राव ने कहा, “आंध्र प्रदेश में कई अस्पताल और डॉक्टर हैं, लेकिन मैं कभी भी डॉ. चक्रवर्ती का इलाज छोड़ना नहीं चाहता था। पिछले 27 वर्षों से वह हमारे लिए सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक, शुभचिंतक और परिवार के सदस्य जैसे रहे हैं। मणिपाल हॉस्पिटल में मुझे जो उपचार और देखभाल मिली, उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं।”
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि विश्वस्तरीय उपचार, अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञों और तुलनात्मक रूप से किफायती लागत के कारण कोलकाता तेजी से देश के प्रमुख हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है, जहां इलाज के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से मरीज पहुंच रहे हैं।

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