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योग दिवस के अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान का हुआ आयोजन, स्वस्थ शरीर और शांत मन के लिए योग को सर्वोत्तम माध्यम बताया

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के योग विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में 18 जून से 20 जून तक तीन दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला आयोजित किया गया। आयोजन के तीसरे दिन “योग द्वारा शरीर एवं मन का सामंजस्य” (Yoga for Harmony of Body and Mind) विषय पर व्याख्यान रखा गया। जिसमें मुख्य मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेन्द्र शर्मा ने स्वस्थ शरीर और शांत मन के लिए योग को सर्वोत्तम माध्यम बताया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से 50 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।

तीसरे दिन कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के चिकित्सा संकाय के अधिष्ठाता डॉ. सी.पी. मिश्रा ने मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेन्द्र शर्मा एवं ऑनलाइन जुड़े सभी प्रतिभागियों का स्वागत कर किया। डॉ.मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक तनाव, अनियमित जीवनशैली एवं बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग ही ऐसा माध्यम है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से योग को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

वहीं मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेन्द्र शर्मा, राघव निसर्गोपचार क्लिनिक ने अपने व्याख्यान में कहा कि स्वस्थ शरीर और शांत मन, जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हैं तथा इन दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का सर्वोत्तम माध्यम योग है। उन्होंने बताया कि योग केवल शरीर को लचीला बनाने का अभ्यास नहीं, बल्कि मन, मस्तिष्क और भावनाओं को संतुलित करने वाली एक वैज्ञानिक एवं समग्र जीवन पद्धति है।

उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से तनाव एवं चिंता में कमी आती है, एकाग्रता बढ़ती है, भावनात्मक संतुलन विकसित होता है, नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा व्यक्ति का संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बनता है। उन्होंने यह भी बताया कि बढ़ती आयु में योग शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन जीने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग एवं प्राणायाम के अभ्यास का संकल्प लेने का आग्रह किया।

व्याख्यान के दौरान प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, योगाभ्यास एवं स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. शर्मा ने वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। कार्यक्रम के अंत में निखिल मोदी ने वैदिक शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन कराया। तत्पश्चात योग विभागाध्यक्ष डॉ. रत्नेश पाण्डेय ने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजन में सहयोग करने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बता दें कि कार्यक्रम के पहले दिन 18 जून को “स्वस्थ वृद्धावस्था में योग का महत्व” विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता योग विषय में डी.लिट्. (D.Litt.) उपाधि प्राप्त योग विशेषज्ञ डॉ. कप्तान सिंह, एसआरएसयू विश्वविद्यालय, रायपुर थे। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि “योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सुखद जीवन जीने की कला है।

वहीं दूसरे दिन 19 जून को एकेएस विश्वविद्यालय सतना से डॉ. दिलीप तिवारी व्याख्यान के मुख्य वक्ता थे। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि योग केवल परंपरा या आस्था का विषय नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जीवनशैली है, जो शरीर, मन और मस्तिष्क के समन्वित विकास का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि विश्वभर में हुए अनेक वैज्ञानिक शोध यह सिद्ध करते हैं कि नियमित योगाभ्यास से तनाव, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा एवं अन्य जीवनशैली जनित रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण में उल्लेखनीय लाभ मिलता है।

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