अध्यात्ममध्य प्रदेश

गायत्री जयंती पर 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, 40 दिवसीय साधना एवं वृक्ष गंगा अभियान का शुभारंभ

भोपाल, 24 जून 2026।अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में गायत्री शक्तिपीठ भोपाल पर गायत्री जयंती एवं परम पूज्य वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के महाप्राण दिवस के अवसर पर 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, विभिन्न संस्कारों, साधना संकल्प एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश जोन समन्वयक एवं गायत्री शक्तिपीठ भोपाल के व्यवस्थापक श्री राजेश पटेल ने कहा कि परम पूज्य गुरुदेव ने गायत्री माता को केवल देवमाता एवं वेदमाता ही नहीं, बल्कि विश्वमाता के रूप में प्रतिष्ठित किया। उन्होंने बताया कि गायत्री माता वेदों की जननी, देवताओं की माता तथा समस्त मानवता की विश्वमाता हैं। वे ज्ञान, शक्ति और प्रेम का प्रतीक हैं तथा समस्त विश्व के कल्याण की प्रेरणा प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि बीसवीं सदी के मध्य तक गायत्री साधना एक सीमित वर्ग तक ही सीमित थी, किन्तु वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपने प्रचण्ड तप, प्रखर प्रज्ञा एवं लोकमंगल की भावना से गायत्री महामंत्र को जन-जन तक पहुंचाया। प्रतिबंध रहित गायत्री मंत्र एवं बंधनमुक्त यज्ञ परंपरा का विस्तार कर उन्होंने इसे सार्वभौमिक आध्यात्मिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। आज विश्व के अनेक देशों में गायत्री उपासना का विस्तार हुआ है और गायत्री माता का विश्वमाता स्वरूप प्रत्यक्ष दिखाई देता है।

श्री पटेल ने बताया कि वर्ष 1990 में गायत्री जयंती के दिन ही परम पूज्य गुरुदेव ने अपना स्थूल शरीर त्यागकर अपनी आराध्य सत्ता गायत्री महाशक्ति में लीन होकर महाप्राण दिवस का संदेश दिया था। इसलिए गायत्री जयंती के दिन उनका महाप्राण दिवस भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि गंगा दशहरा एवं गायत्री जयंती का यह पावन संयोग विशेष महत्व रखता है। गंगा जहां भौतिक तापों का शमन करती है, वहीं गायत्री आध्यात्मिक कायाकल्प का मार्ग प्रशस्त करती है।

उन्होंने बताया कि परम पूज्य गुरुदेव को तपोनिष्ठ ऋषि के रूप में जाना जाता है। उनके तपबल से ही गायत्री परिवार का विशाल अभियान संचालित हो रहा है। इसी तप परंपरा में सहभागी बनने के लिए प्रदेश के लगभग 15 हजार साधक आज से सवा लाख गायत्री मंत्र जप अनुष्ठान का संकल्प लेकर साधना अभियान में जुट रहे हैं।

गायत्री परिवार भोपाल के जिला समन्वयक श्री रमेश कुमार नागर ने बताया कि जिले में नारी सशक्तिकरण, युवा उत्कर्ष, शिक्षक गरिमा अभियान तथा विभिन्न साधनात्मक प्रकल्प प्रमुखता से संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने परिजनों से शताब्दी वर्ष अनुयाज क्रम के अंतर्गत चल रहे कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

वरिष्ठ परिजन श्री विनोद पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि गायत्री उपासना केवल जप तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वाध्याय और ज्ञानार्जन उसका अनिवार्य अंग है। बुद्धि की देवी गायत्री की कृपा प्राप्त करने हेतु युग साहित्य का अध्ययन और प्रसार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युग साहित्य को घर-घर पहुंचाने का संकल्प ही परम पूज्य गुरुदेव के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

पर्व के अवसर पर प्रातःकाल परम पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीया माताजी के तात्विक प्रतीकों ‘सजल श्रद्धा’ एवं ‘प्रखर प्रज्ञा’ का पूजन, अभिषेक एवं पर्व संकल्प सम्पन्न हुआ, जिसमें साधकों ने नियमित समयदान एवं युग निर्माण कार्यों में सक्रिय योगदान का संकल्प लिया।

इसके पश्चात 24 कुण्डीय यज्ञशाला के देवमंच पर देवमाता, वेदमाता, विश्वमाता, गंगामाता एवं वृक्ष देवता का पूजन किया गया। यज्ञ के दौरान पुंसवन, अन्नप्राशन, मुंडन, मंत्रदीक्षा एवं यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न कराए गए।

यज्ञ संचालन में श्रीमती मधु श्रीवास्तव के नेतृत्व में श्रीमती राजश्री चौरिया, श्रीमती दीप्ती भारद्वाज, श्रीमती मोनिका श्रीवास्तव एवं सुश्री ऋचा डांगे सहित ब्रह्मवादिनी बहनों की टोली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में संगीत सहयोग अभिनव डांगे एवं कृष्णा डांगे द्वारा प्रदान किया गया।

यज्ञोपरांत गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य द्वार पर श्री राजेश पटेल एवं मध्य प्रदेश मीडिया संघ के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में पाँच सीता अशोक के पौधों का रोपण कर श्रावणी पूर्णिमा तक चलने वाले “वृक्ष गंगा अभियान” का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर 40 दिवसीय साधना अभियान का भी शुभारंभ हुआ तथा उपस्थित परिजनों ने पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत निर्माण हेतु अधिकाधिक वृक्षारोपण का संकल्प लिया।

पर्व की पूर्व संध्या पर मंगलवार को नगर के विभिन्न चेतना केन्द्रों पर दीपयज्ञ आयोजित किए गए तथा कोलार चेतना केन्द्र पर भजन संध्या का विशेष आयोजन सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का समापन विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण एवं मानव कल्याण की मंगलकामना के साथ हुआ।

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