खबरमध्य प्रदेशसंपादकीय

भूले हुए शिल्पकार: बी.एन. राव – जिन्होंने भारत का संविधान लिखा

बी.एन. राव कौन थे? जानिए संविधान के पहले ड्राफ्ट के लेखक की कहानी"

जब भी भारत के संविधान की बात होती है तो सबसे पहले डॉ. बी.आर. अंबेडकर का नाम आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संविधान का पहला कच्चा ड्राफ्ट लिखने वाले सर बेनेगल नरसिंह राव थे? इन्हें “संविधान का वास्तुकार” कहा जाता है।

शुरुआती जीवन और शिक्षा
बी.एन. राव का जन्म 1887 में कर्नाटक में हुआ। वे बेहद मेधावी छात्र थे।
डिग्री: उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी और फिर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की।
1910 में उन्होंने इंडियन सिविल सर्विसेज – ICS ज्वाइन की और एक सफल प्रशासक और न्यायाधीश बने। बाद में वे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश भी रहे।

संविधान सभा में भूमिका
1946 में संविधान सभा ने उन्हें मुख्य संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया। उनका काम था दुनिया भर के संविधानों का अध्ययन करके भारत के लिए एक ड्राफ्ट तैयार करना।

अक्टूबर 1947 में उन्होंने 243 अनुच्छेद और 13 अनुसूचियों वाला पहला ड्राफ्ट सौंपा। इसी ड्राफ्ट को आधार बनाकर आगे काम हुआ।

उनका सबसे बड़ा योगदान
मौलिक अधिकार और DPSP: इन दोनों का कॉन्सेप्ट राव ने ही सबसे पहले ड्राफ्ट में रखा। आयरलैंड के संविधान से प्रेरित होकर नीति निर्देशक तत्व जोड़े।
संघीय ढांचा: केंद्र को मजबूत बनाने के लिए 1935 के भारत सरकार अधिनियम से कई प्रावधान लिए।
-आपातकालीन प्रावधान: Art 352, 356, 360 का आधार भी उनके ड्राफ्ट में था।

राव बनाम अंबेडकर: फर्क क्या था?
अगर राव ने “कंकाल” बनाया तो अंबेडकर ने उसमें “जान” डाली। राव का ड्राफ्ट कानूनी और टेक्निकल था। अंबेडकर की ड्राफ्टिंग कमेटी ने उसमें सामाजिक न्याय, समानता और भारतीय मूल्यों को जोड़ा। प्रस्तावना को 25 शब्दों से बढ़ाकर 81 शब्द किया।

इसलिए इतिहासकार कहते हैं – *”Rau drafted it, Ambedkar made it Indian”*

विरासत
1950 में बी.एन. राव को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। 1953 में उनका निधन हो गया। आज भी उनके योगदान को उतनी पहचान नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए।

निष्कर्ष
सर बी.एन. राव वो नींव हैं जिस पर भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी इमारत खड़ी है। संविधान को समझने के लिए राव को जानना जरूरी है।

*Keywords*: B.N. Rau, Benegal Narsing Rau, Constitution of India, संविधान के वास्तुकार, भारतीय संविधान, Drafting Committee

डॉ. अंबेडकर ने संविधान सौंपते हुए बी.एन. राव की भूमिका को खुले तौर पर स्वीकार किया था

क्या कहा था अंबेडकर ने?

25 नवंबर 1949 को जब डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा में अपना अंतिम भाषण दिया और संविधान सौंपा, तब उन्होंने कहा:

संविधान सभा के मुख्य सलाहकार श्री बी.एन. राव का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने ही संविधान का पहला ड्राफ्ट तैयार किया था। उन्होंने दुनिया के सभी संविधानों का गहन अध्ययन किया और हमारे सामने एक तैयार मसौदा रखा।

यदि राव जी ने वह मेहनत न की होती तो ड्राफ्टिंग कमेटी का काम और भी मुश्किल हो जाता।

3 मुख्य बातें जो अंबेडकर ने राव के बारे में कहीं

1. पहला ड्राफ्ट के लेखक
अंबेडकर ने माना कि संविधान की नींव राव ने रखी। 243 अनुच्छेद वाला अक्टूबर 1947 का ड्राफ्ट राव का ही था।

2. शोध और तैयारी”
उन्होंने कहा कि राव ने 60+ देशों के संविधान पढ़े और नोट्स बनाए। उसी आधार पर ड्राफ्टिंग कमेटी आगे बढ़ी।

3. क्रेडिट देना
अंबेडकर ने जानबूझकर सभा में कहा कि लोग सिर्फ ड्राफ्टिंग कमेटी को याद रखेंगे, लेकिन असली मेहनत राव की थी।

लेकिन एक बात भी साफ की
अंबेडकर ने साथ में ये भी कहा कि राव का ड्राफ्ट “कच्चा” था। फाइनल संविधान में 2000+ संशोधन हुए, प्रस्तावना बदली, मौलिक अधिकार मजबूत हुए। वो काम ड्राफ्टिंग कमेटी और पूरी सभा ने किया।

इसीलिए आज कहा जाता है: *राव ने लिखा, अंबेडकर ने तराशा।

बी.एन. राव का ड्राफ्ट बनाया फाइनल संविधान का हिसाब कुछ ऐसा है:

1. हू-ब-हू कितना रखा गया?
लगभग *60% से 70% हिस्सा* राव के अक्टूबर 1947 वाले ड्राफ्ट से सीधे लिया गया।

राव ने जो 243 अनुच्छेद + 13 अनुसूचियां दी थीं, उनमें से अधिकांश की भाषा, ढांचा और क्रम वही रहा।

जो हू-ब-हू रहे:
1. संघीय ढांचा – केंद्र-राज्य के अधिकार
2. संसदीय व्यवस्था – PM, मंत्रिमंडल, राष्ट्रपति
3. न्यायपालिका का ढांचा – सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट
4. आपातकालीन प्रावधान – Art 352, 356, 360
5. अधिकांश प्रशासनिक अनुच्छेद – चुनाव आयोग, CAG, UPSC

अंबेडकर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने कितने में संशोधन/बदलाव किए
लगभग *30% से 40% में बड़े बदलाव* हुए। ड्राफ्टिंग कमेटी ने 7635 संशोधन प्रस्ताव देखे, जिनमें से 2473 पास हुए।

 

संविधान निर्माण का निष्कर्ष
ढांचा = 70 प्रतिशत राव का
आत्मा और डिटेल = 30 प्रतिशत ड्राफ्टिंग कमेटी + संविधान सभा की

जम्मू-कश्मीर को “विशेष राज्य” का दर्जा क्यों और कैसे मिला?

इसे संविधान में अनुच्छेद 370 के तहत रखा गया था।

1. क्यों मिला? – 3 मुख्य वजह

1. ऐतिहासिक विलय की शर्त
26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने “Instrument of Accession” पर साइन किया। इसमें सिर्फ 3 विषय केंद्र को दिए: रक्षा, विदेश, संचार। बाकी सब J&K के पास रहे।

2. युद्ध और UN का मामला
1947 में पाकिस्तान ने हमला किया। भारत ने सेना भेजी लेकिन मामला UN में चला गया। भारत ने वादा किया कि J&K का अंतिम फैसला “जनमत संग्रह” से होगा। इसलिए अस्थायी व्यवस्था चाहिए थी।

3. अलग पहचान और संविधान
शेख अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस चाहते थे कि J&K का अपना संविधान, अपना झंडा और अपनी नागरिकता रहे। केंद्र ने सहमति दी ताकि कश्मीर भारत के साथ बना रहे।

2. कैसे मिला? – अनुच्छेद 370

17 अक्टूबर 1949 को इसे संविधान में जोड़ा गया। इसके तहत:
– J&K के लिए अलग संविधान बना
– संसद सिर्फ रक्षा, विदेश, संचार पर कानून बना सकती थी। बाकी के लिए राज्य सरकार की सहमति जरूरी
– J&K के लोगों के लिए अलग नागरिकता और संपत्ति के अधिकार थे

3. ड्राफ्ट किसने तैयार किया?

*गोपालस्वामी अयंगर* – ये थे ड्राफ्टर।

कहानी:
संविधान सभा में J&K का मामला संभालने की जिम्मेदारी सरदार पटेल के पास थी। लेकिन पटेल ने ये काम अपने डिप्टी एन. गोपालस्वामी अयंगर को दिया।

अयंगर खुद J&K के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके थे। इसलिए उन्हें कश्मीर की स्थिति पता थी।

उन्होंने ही शेख अब्दुल्ला के साथ बातचीत करके *Art 370 का ड्राफ्ट तैयार किया और 17 अक्टूबर 1949 को संविधान सभा में पेश किया।

बी.एन. राव के मूल ड्राफ्ट में Art 370 नहीं था। ये बाद में अयंगर ने “अस्थायी प्रावधान” के रूप में जोड़ा।

4. अब क्या स्थिति है?
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने *राष्ट्रपति आदेश 2019 के जरिए Art 370 के अधिकांश प्रावधान निष्क्रिय कर दिए।
अब J&K का अलग संविधान और अलग झंडा नहीं है। J&K और लद्दाख 2 केंद्र शासित प्रदेश बन गए।

 

सुशील कुमार मिश्रा

संपादक, मारुतिवाणी वेबसाइट और साप्ताहिक समाचार पत्र

नोट – उपरोक्त जानकारी विकीपीडिया, एआई और चैटजीपीटी से तैयार की गई है।

 

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button