संसद में एक ही सत्र में बिल पास कराने का चलन बढ़ा: 18वीं लोकसभा में 53% विधेयक पारित, बहस पर क्यों उठे सवाल?
संसद में जिस सत्र में बिल पेश किया जाता है, उसी सत्र में उसे पास कराने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, 18वीं लोकसभा में अब तक पेश किए गए 64 में से 34 यानी 53 फीसदी बिल दोनों सदनों से उसी सत्र में पारित हो चुके हैं।यह रुझान 16वीं लोकसभा से काफी अलग है। 16वीं लोकसभा के दौरान 189 बिल पेश हुए थे, जिनमें से सिर्फ 33 फीसदी यानी 63 बिल ही उसी सत्र में पास हुए थे। 17वीं लोकसभा में यह आंकड़ा दोगुना होकर लगभग 62 फीसदी यानी 190 में से 117 बिल पर पहुंच गया था।
पीआरएस का कहना है कि बिल पेश होने और पास होने के बीच कम समय मिलने से सांसदों को अध्ययन और हितधारकों से चर्चा का समय नहीं मिलता। मानसून सत्र में नौ बिल बिना किसी अन्य सांसद के बोले ही पास हो गए। वहीं सात बिलों को पास होने में पांच मिनट या उससे भी कम समय लगा।
हंगामे के कारण इस मानसून सत्र में लोकसभा में सिर्फ 15 फीसदी और राज्यसभा में 33 फीसदी ही काम हो पाया। लोकसभा में प्रश्नकाल पूरे सत्र में महज नौ मिनट चला और 380 में से केवल दो मौखिक सवालों के जवाब दिए जा सके। संसद में बिना विस्तृत बहस के महज पांच मिनट में बिल पास होने का यह नया ट्रेंड देश के कानूनों और आम जनता पर क्या असर डालेगा, यह समझना बेहद जरूरी है।



