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बस एक कोड में छुपा है काजू का असली दाम, जानिए वो राज जो हर दुकानदार छुपाता हैं



जब भी हम काजू खरीदते हैं, तो ज्यादातर लोग पैकेट पर लिखा ब्रांड, चमकदार पैकिंग या दुकानदार की बातों पर भरोसा कर के कैसी भी क्वालिटी का काजू ले लेते हैं. हमें लगता है कि महंगा मतलब अच्छा क्वालिटी है और सस्ता मतलब खराब क्वालिटी है. लेकिन सच्चाई यह है कि काजू का असली दाम किसी ब्रांड से नहीं, बल्कि उस छोटे से कोड से तय होता है जो अक्सर पैकेट पर एक कोने में छोटा-सा लिखा हुआ होता है. अगर यह कोड आपके नजर और समझ में आ जाये, तो कोई भी आपको बड़े दाम के नाम पर छोटे काजू नहीं चिपका सकता है.
काजू की दुनिया में “W” का मतलब होता White Whole है जिसका मतलब पूरा और सफेद काजू होता है. इसके बाद जो नंबर लिखा होता है, वही काजू की असली पहचान होता है. यह नंबर बताता है कि लगभग 454 ग्राम यानी एक पाउंड में कितने काजू होते हैं. नंबर जितना छोटा होता है काजू उतना ही बड़ा और भारी माना जाता है. इसलिए छोटे नंबर वाले काजू ज्यादा महंगे होते हैं और बड़े नंबर वाले थोड़े सस्ते होते हैं.
अगर आप रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए काजू लेते हैं, तो W320 आम तौर अच्छा होता है. ये आकार में थोड़े छोटे होते हैं और एक मुट्ठी में ज्यादा दाने आ जाते हैं. वहीं W240 को लोग संतुलित मानते हैं. ये न तो बहुत छोटे होते हैं और न ही बहुत बड़े होते हैं. घर में खाने से लेकर गिफ्ट देने तक, यह सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला साइज है. वहीं W180 प्रीमियम कैटेगरी मानी जाती है. इसके दाने बड़े, मोटे और देखने में भी भारी लगते हैं, इसलिए इनका दाम भी सबसे ज्यादा होता है
कई बार पैकेट पर “B” लिखा होता है या दाने आधे टूटे दिखते हैं. ये Broken Cashew होते हैं यानी टूटे हुए काजू होते हैं. स्वाद में इनमें कोई कमी नहीं होती है, बस इनकी शेप पूरी नहीं होती है. हलवा, काजू कतली या ग्रेवी के लिए ये बिल्कुल सही रहते हैं और जेब पर भी हल्के पड़ते हैं.
अगली बार जब भी आप काजू खरीदने जायें, तो सिर्फ दाम या ब्रांड या चमकदार पैकिंग पर नहीं, उस छोटे से कोड पर भी नजर डालें. यही कोड तय करता है कि आप सच में किस क्वालिटी के काजू घर ले जा रहे हैं. समझदारी से खरीदा गया काजू स्वाद भी बढ़ाएगा और ठगे जाने से भी बचाएगा.