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लिवर में इंफेक्शन होने पर शरीर में दिखते हैं ये लक्षण, न करें नजरअंदाज

लिवर में इंफेक्शन होना एक गंभीर समस्या है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. इसके लक्षणों की सही जानकारी होना जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज हो सके.

लिवर हमारे शरीर का एक बेहद जरूरी अंग है, जो खून को साफ करने, भोजन को एनर्जी में बदलने, पित्त बनाने और शरीर से टॉक्सिक तत्व बाहर निकालने का काम करता है. यह पाचन तंत्र और मेटाबॉलिज्म को सही बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाता है. जब वायरस, बैक्टीरिया या परजीवी लिवर पर हमला करते हैं, तो इंफेक्शन की स्थिति बन सकती है. हेपेटाइटिस वायरस, दूषित भोजन या पानी, अत्यधिक शराब का सेवन, कुछ दवाइयों का असर और कमजोर इम्यूनिटी इसके कारण हो सकते हैं.

जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है, जिन्हें पहले से लिवर की बीमारी है या जो असुरक्षित खून या सुई के संपर्क में आए हैं, उन्हें लिवर इंफेक्शन का ज्यादा खतरा हो सकता है. गलत खानपान और अस्वस्थ लाइफस्टाइल भी जोखिम बढ़ाते हैं. इसलिए लिवर की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

लिवर में इंफेक्शन के क्या लक्षण हैं?

लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर एचओडी डॉ. एल.एच. घोटेकर बताते हैं कि लिवर में इंफेक्शन होने पर शरीर में कई तरह के संकेत दिखाई दे सकते हैं. आम लक्षणों में तेज या हल्का बुखार, लगातार थकान, कमजोरी और भूख में कमी शामिल हैं. कुछ लोगों को पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है. त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, जिसे पीलिया कहा जाता है, भी एक प्रमुख संकेत है.

पेशाब का रंग गहरा होना और मल का रंग हल्का होना भी लिवर संबंधी समस्या की ओर इशारा कर सकता है. मतली, उल्टी और शरीर में खुजली जैसी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं. अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या अचानक बढ़ जाएं, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है. ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है.

कैसे करें बचाव?

लिवर इंफेक्शन से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. दूषित पानी और भोजन से बचें तथा हमेशा ताजा और स्वच्छ खाना खाएं. शराब का सेवन सीमित या बंद करें. हेपेटाइटिस ए और बी का टीकाकरण करवाना भी फायदेमंद है. किसी की इस्तेमाल की हुई सुई या रेजर का उपयोग न करें. संतुलित डाइट और नियमित व्यायाम से इम्यूनिटी मजबूत रखें.

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर तेज बुखार, लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, आंखों या त्वचा का पीला होना, या गहरे रंग का पेशाब जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. लंबे समय तक थकान या कमजोरी बनी रहने पर भी जांच कराना जरूरी है. समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.

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