बालाघाट एक बार फिर सुर्खियों में बीजेपी अध्यक्ष कावरे पर ही कार्रवाई क्यों
लामबंद हो रहा मरार समाज
भोपाल, बालाघाट। कभी नक्सलियों के कारण तो कभी नक्सलमुक्त होने की वजह से बालाघाट जिला सुखर््िायों में रहा है। इस बार फिर ये जिला पूर्व मंत्री, बालाघाट जिले के भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और मरार समाज के युवा नेता रामकिशोर कावरे के कारण चर्चा में है। रामकिशोर कावरे और उनके परिजनों से जुड़े कारोबार पर एक के बाद एक हुई कार्रवाई से मरार समाज में रोष पनप रहा है। कावरे के स्वजातीय लोगों का सीधा आरोप है कि उनके बढ़ते राजनीतिक रसूख के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। मरार समाज के लोगों का कहना है कि क्या पंवार समाज के नेता किसी दूसरे समाज के व्यक्ति को आगे नहीं बढ़ते देते और जो बढ़ता है उसे किसी ना किसी तरह निपटा दिया जाता है।
बालाघाट जिले की सीमाएं छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से लगती हैं। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा इस जिले का दोनों ही दलों में और प्रदेश से लेकर केन्द्र तक की सत्ता में राजनीतक प्रभुत्व रहा है। इस जिले में पंवार समाज एक प्रमुख और प्रभावशाली समुदाय है। इस समाज की खासियत है कि चुनाव में ये स्वजातीय प्रत्याशी को जिताने के लिए एकजुट हो जाते हैं फिर वो चाहे किसी भी दल से हो। और यही वजह है कि राजनीतिक पार्टियां भी इस समाज को अधिक महत्व देतीं हैं। पंवार समाज को ज्यादा तवज्जो दिए जाने से किसी को कोई गुरेज नहीं है लेकिन इसकी आड़ में दूसरे समाज के नेताओं को निपटाने की राजनीति लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए ठीक नहीं कही जा सकती। जहां तक मरार समाज का सवाल है तो इसी समाज के लिखीराम कावरे कांग्रेस के साथ ही प्रदेश भर के मरार-माली समाज के लिए बड़ा नाम थे। नक्सलियों ने उनके गृह ग्राम हिर्री, किरनापुर में उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी, तब वे दिग्विजय सरकार में वन एवं परिवहन मंत्री थी। उनके हत्या को लंबे समय तक राजनीतिक षडयंत्र के रूप में देखा गया। तब ये भी कहा गया था कि प्रदेश में मरार-माली समाज का बड़ा सम्मेलन करना उनकी मौत का कारण बन गया। लिखीराम कावरे को भावी सीएम के तौर पर देखा जा रहा था।
मरार समाज के ही रामकिशोर कावरे जिस तेजी से राजनीति में आगे बढ़ रहे थे उससे भी प्रतिस्पर्धी समाज के नेताओं को भा नहीं रहा था। कहा जा रहा है कि कावरे और उनके भाई के कारोबार को भी सोची समझी राजनीति के तहत निशाना बनाया गया। कावरे के भाई की कंपनी एवं प्रतिष्ठानों पर टैक्स चोरी को लेकर जीएसटी की कार्यवाही और फिर उनकी राइस मिल पर एनजीटी की कार्यवाही को षड्यंत्र से जोड़कर देखा जा रहा है। कावरे के समर्थक उदाहरण देते हुए कहते हैं कि बालाघाट विधायक अनुभा मुंजरे पर भी फॉरेस्ट विभाग के डीएफओ ने रिश्वत लेने का आरोप लगाया था, ये भी राजनीतिक षड्यंत्र था। जब इस मामले की बारिकी से जाँच हुई तो ये आरोप झूठा साबित पाया गया। इसी तरह वारासिवनी के पूर्व कांग्रेसी और वर्तमान भाजपा नेता प्रदीप जैसवाल (गुड्डा जैसवाल) को भी निपटाओ राजनीति का शिकार बनाया गया। बालाघाट नगर पालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर पर भ्रष्टाचार की शिकायत करा कर उनको भी निपटाओ राजनीती का शिकार बनाया जा रहा है। इन सबके पीछे किस वरिष्ठ भाजपा नेता का हाथ ये सभी जानते हैं। कावरे समर्थकों का कहना है कि आखिर उनके समाज के लोगों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है जबकि दूसरे समाज के कई लोगों के खिलाफ शिकायतें लंबित पड़ी है। चाहे युवा नेता डाली दमाहे मर्डर केस हो या फिर अवैध खनन या मारपीट के केस हों, गैरमरार आरोपियों को बक्शा जा रहा है आखिर क्यों। मालूम हो कि रामकिशोर कावरे के भाई कुमार कावरे की फर्मों पर एंटी इवेजन ब्यूरो ने छापे की कार्रवाई कर डेढ़ करोड़ की राशि संरेडर करवाई थी। जांच के दौरान हर्ष कंस्ट्रक्शन और वैनगंगा कंस्ट्रक्शन फर्मों ने मिलकर डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक की राशि जीएसटी विभाग के समक्ष सरेंडर की है। एंटी इवेजन ब्यूरो टीम द्वारा कराई गई सरेंडर राशि में हर्ष कंस्ट्रक्शन ने करीब 70 लाख रुपए, जबकि वैनगंगा कंस्ट्रक्शन ने 80 लाख रुपए से अधिक की राशि जमा कराई है। हर्ष कंस्ट्रक्शन फर्म पूर्व मंत्री बीजेपी जिला अध्यक्ष रामकिशोर कावरे के भाई कुमार कावरे की बताई जा रही है। वहीं वैनगंगा कंस्ट्रक्शन एक पार्टनरशिप फर्म है। इधर, भरवेली क्षेत्र के टेकाड़ी में संचालित हर्ष राईस इंडस्ट्री में एनजीटी के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से के.पी. सोनी और कलेक्टर प्रतिनिधि के रूप में एसडीएम गोपाल सोनी ने जांच की। एनजीटी ने ये जांच उस शिकायत पर की गई जिसमें हर्ष राईस इंडस्ट्रीज के निर्माण में अवैध उत्खनन, पेड़ों को नुकसान, नाले का प्रवाह को अवरोध करने और राईस इंडस्ट्रीज से निकले वाले भूसे से जल प्रदूषण की बात कही गई थी। याचिकाकर्ता और राईस मिल ऑनर्स की मौजूदगी में शिकायत की जांच कर पंचनामा बनाया गया। हर्ष राईस इंडस्ट्रीज, पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे के भाई की है। इसी तरह कलेक्टर मृणाल मीणा ने मे. हर्ष कंस्ट्रक्शन बालाघाट को ब्लैक लिस्टेड करने का प्रस्ताव भेजा है। कुल मिलाकर कभी जीएसटी तो कभी एनजीटी तो कभी जिला प्रशासन के निशाने पर कावरे और उनसे जुड़ी फर्में आ रहीं हैं। ऐसा नहीं है कि कावरे का कारोबार नया नया हो। भारतीय जनता युवा मोर्चा और फिर जनपद अध्यक्ष से लेकर विधायक-मंत्री और प्रदेश-केन्द्र में सत्तासीन पार्टी के जिला अध्यक्ष तक का सफर तय करने वाले कावरे ने कम समय में ही बड़ा मुकाम हासिल कर लिया। बालाघाट सीट से उनके चुनाव लड़ने की इच्छा ने उन्हें बालाघाट के वरिष्ठ नेता की आंख की किरकिरी बना दिया है। एक के बाद एक हो रही इन कार्रवाईयों से राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। छापे से ज्यादा चर्चा भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष रामकिशोर कावरे और उनके रसूख की हो रहीं हैं। बताया जा रहा है कि रामकिशोर कावरे को रास्ते से हटाने के लिए यहां के एक कददावर भाजपा नेता और पूर्व मंत्री ने बिसात बिछा दी थी।



