लोकसभा में लापता महिलाओं और बच्चों को लेकर सांसद श्रीमती भारती पारधी ने उठाया सवाल तारांकित प्रश्न का महिला एवं बाल विकास मंत्री ने दिया विस्तृत उत्तर
लोकसभा में आज 13 फरवरी को लापता महिलाओं और बच्चों के संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर चर्चा हुई। बालाघाट–सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती भारती पारधी द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न क्रमांक 203 के उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
एनसीआरबी करता है आंकड़ों का संकलन
मंत्री ने बताया कि देश में लापता एवं बरामद महिलाओं और बच्चों के आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा संकलित किए जाते हैं। यह आंकड़े उसकी वार्षिक रिपोर्ट ‘क्राइम इन इंडिया’ में प्रकाशित किए जाते हैं, जो वर्ष 2023 तक उपलब्ध है।
किशोर न्याय अधिनियम के तहत संरचनात्मक व्यवस्था
मंत्री ने कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर बाल कल्याण समितियां (CWC), किशोर न्याय बोर्ड (JJB), जिला बाल संरक्षण इकाइयां और विशेष किशोर पुलिस इकाइयां गठित की गई हैं। इनका उद्देश्य लापता बच्चों के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
मिशन वात्सल्य और एकीकृत डिजिटल पोर्टल
सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजना मिशन वात्सल्य के तहत संस्थागत एवं गैर-संस्थागत देखरेख की सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। मंत्रालय ने एकीकृत ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ विकसित किया है, जिसमें ट्रैक चाइल्ड पोर्टल और ‘खोया-पाया’ एप्लीकेशन को एकीकृत किया गया है।
यह पोर्टल गृह मंत्रालय के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग एंड नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) से भी जुड़ा है, जिससे लापता बच्चों की एफआईआर का मिलान कर त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है। आम नागरिक भी ‘खोया-पाया’ मॉड्यूल के माध्यम से सूचना दे सकते हैं।
हेल्पलाइन और पुनर्वास सुविधाएं
मंत्री ने बताया कि कठिन परिस्थितियों में बच्चों के लिए 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन तथा महिलाओं के लिए महिला हेल्पलाइन (181) 24×7 संचालित की जा रही है, जिन्हें आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली 112 से जोड़ा गया है।
मिशन शक्ति के अंतर्गत ‘शक्ति सदन’ नामक एकीकृत राहत एवं पुनर्वास केंद्र संचालित हैं, जो मानव तस्करी पीड़ितों एवं संकटग्रस्त महिलाओं को आश्रय, देखरेख एवं पुनर्वास सेवाएं प्रदान करते हैं।
प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
मंत्री ने बताया कि सावित्री बाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान द्वारा एएचटीयू, एसजेपीयू, रेलवे पुलिस बल, जिला बाल संरक्षण इकाइयों और बाल कल्याण समितियों के पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
मानव तस्करी के विरुद्ध सख्त प्रावधान
नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, 2023 में मानव तस्करी और शोषण के विरुद्ध कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। साथ ही, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रभाव वाले मामलों की जांच का दायित्व सौंपा गया है।
सरकार ने बताया कि देशभर में 827 मानव तस्करी रोधी इकाइयां (AHTU) कार्यरत हैं तथा पुलिस थानों में 14,653 महिला सहायता डेस्क स्थापित की गई हैं।
केंद्र और राज्य की साझा जिम्मेदारी
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं, अतः मानव तस्करी और लापता मामलों से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की है। हालांकि, केंद्र सरकार समय-समय पर एडवाइजरी, वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करती है।
सरकार ने दोहराया कि वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बढ़ाकर तथा जन-जागरूकता अभियान मजबूत कर मानव तस्करी और लापता महिलाओं-बच्चों की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।
