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गुरुग्राम में सड़क हादसों का खौफनाक सच, पैदल यात्रियों और पीछे से टक्कर में सबसे ज्यादा मौतें

2023 और 2024 में जिले में सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों के प्रमुख कारण पैदल चलने वालों और मोटर चालकों के बीच पीछे से टक्कर या “पीछे से टक्कर”, साइड-इम्पैक्ट और आमने-सामने की टक्कर थीं।

गुरुग्राम में 2023 और 2024 के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौतों के पीछे पीछे से टक्कर (रियर-एंड), साइड-इम्पैक्ट और आमने-सामने की भिड़ंत (हेड-ऑन) सबसे बड़ी वजह रहीं। इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) के आंकड़ों के मुताबिक, इन्हीं तरह की टक्करों में जिले की कुल सड़क मौतों का करीब 93 प्रतिशत हिस्सा दर्ज हुआ।

कुल कितनी मौतें और किस तरह की टक्कर में हुईं?
दो साल की अवधि में सड़क हादसों में 615 यात्रियों और पैदल चलने वालों की जान गई। इनमें से 573 मौतें तेज प्रभाव वाली टक्करों- एक ही दिशा, विपरीत दिशा और कोणीय टक्कर में हुईं।

eDAR के अनुसार, पैदल यात्रियों से जुड़ी दुर्घटनाएं सबसे घातक रहीं, जिनमें 231 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद रियर-एंड टक्कर (170), साइड-इम्पैक्ट (111) और हेड-ऑन टक्कर (61) का स्थान रहा। 

अन्य कारणों से कितनी जानें गईं?
इन प्रमुख श्रेणियों के अलावा, कुछ मौतें अन्य कारणों से भी हुईं-

  • गलत तरीके से खड़े वाहनों से टक्कर: 14
  • किसी स्थिर वस्तु से टक्कर: 11
  • तेज रफ्तार में पलटना या फिसलना: 8
  • सड़क से बाहर निकलना (रन-ऑफ): 5
  • साइडस्वाइप टक्कर: 4

कुल मिलाकर, “टक्कर के तरीके” से जुड़ी दुर्घटनाएं दो वर्षों में जिले की 917 कुल मौतों का 67 प्रतिशत रहीं।

घातक दुर्घटनाओं की संख्या कितनी रही?
2023-24 के दौरान 551 घातक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई। इनमें-

  • पैदल यात्रियों से जुड़ी दुर्घटनाएं: 210
  • रियर-एंड टक्कर: 155
  • साइड-इम्पैक्ट: 98
  • हेड-ऑन टक्कर: 54

इन चार श्रेणियों ने मिलकर 94 प्रतिशत घातक हादसों में योगदान दिया। शेष हादसे पार्क किए गए वाहनों, वस्तुओं से टक्कर, वाहन पलटना/फिसलना, रन-ऑफ और साइडस्वाइप से जुड़े थे।

गुरुग्राम में सबसे ज्यादा हादसे किन सड़कों पर हुए?
जिला प्रशासन ने कई दुर्घटना-प्रवण मार्गों की पहचान की है। इनमें-

  • गुरुग्राम-दिल्ली एक्सप्रेसवे (NH-48): 45 स्थानों पर 156 घातक हादसे
  • गुरुग्राम-अलवर हाईवे (NH-248A): 10 स्थानों पर 24
  • दिल्ली वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे: 7 स्थानों पर 16
  • द्वारका एक्सप्रेसवे (NH-24BB): 4 स्थानों पर 11
  • गोल्फ कोर्स रोड और एक्सटेंशन रोड: 3 स्थानों पर 8
  • अन्य राज्य राजमार्ग: 8 स्थानों पर 16 घातक हादसे

हालिया वर्षों में ट्रेंड क्या दिखाता है?
ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 1,112 हादसों में 478 मौतें हुईं। इसके मुकाबले 2024 में 1,024 हादसों में 472 और 2023 में 1,190 हादसों में 439 मौतें दर्ज की गई थीं।

प्रशासन के मुताबिक हादसों की मुख्य वजहें क्या हैं?
प्रशासन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन टक्करों का घनत्व मुख्य रूप से तेज रफ्तार, गलत ओवरटेकिंग, पैदल यात्रियों के लिए अपर्याप्त सुविधाएं, ट्रैफिक स्ट्रीम का सही अलगाव न होना और ड्राइवर का सीमित रिएक्शन टाइम जैसी वजहों से जुड़ा है।

हादसे रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
रिपोर्ट में कहा गया है कि टार्गेटेड इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस की जरूरत है। प्रशासन ने चिन्हित स्थानों पर दुर्घटना-रोकथाम उपाय लागू करने का फैसला किया है। जोनल ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के क्षेत्रीय अधिकारियों को खराब सड़क सतह और सड़क किनारे अतिक्रमण जैसी समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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