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हृदय स्वास्थ्य का मूलमंत्र – संतुलित आहार, नियमित योग, सकारात्मक विचार – योग गुरु महेश अग्रवाल

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) महानिदेशालय, नई दिल्ली के निर्देशन में के.रि.पु.बल परिवार कल्याण संगठन, ग्रुप केंद्र, भोपाल (म.प्र.) द्वारा हृदय स्वास्थ्य अभियान के अंतर्गत स्वस्थ हृदय हेतु आहार जागरूकता, हृदय परीक्षण, सीपीआर प्रशिक्षण एवं हृदय स्वास्थ्य संबंधी योग सत्र का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर श्री अविनाश शरण, उप महानिरीक्षक (डीआईजी), ग्रुप सेंटर, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, भोपाल (मध्य प्रदेश) ने कहा कि योगविद्या भारतवर्ष की प्राचीनतम संस्कृति और जीवन-पद्धति है, जिसके आधार पर हमारे पूर्वज सुखी, समृद्ध और निरोग जीवन व्यतीत करते थे। मनुष्य का संपूर्ण व्यक्तित्व उसके आहार, व्यवहार और विचार पर आधारित होता है।

डॉ. आर. के. अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्वस्थ हृदय के लिए संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं समय पर उपचार के महत्व पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने सीपीआर प्रशिक्षण की उपयोगिता बताते हुए कहा कि आपात स्थिति में सही ज्ञान किसी के जीवन को बचा सकता है। साथ ही हृदय स्वास्थ्य हेतु योग, प्राणायाम और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने पर विशेष बल दिया। श्री महेंद्र कुमार, उप कमांडेंट एवं श्री विजय प्रकाश, सहायक कमांडेंट सहित अन्य अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे।

योग गुरु महेश अग्रवाल ने प्रशिक्षण देते हुए बताया कि आहार, व्यवहार और विचार – जीवन निर्माण की त्रिवेणी हैं। जैसा हमारा आहार होगा, वैसा ही हमारा तन और मन बनेगा। सात्त्विक, सरल और प्राकृतिक भोजन शरीर को स्वस्थ तथा मन को शांत बनाता है। हमारा व्यवहार समाज में हमारी पहचान बनाता है। मृदुभाषी, विनम्र और करुणामय व्यवहार से संबंधों में मधुरता आती है, जबकि अहंकार, क्रोध और कटुता जीवन में तनाव और दूरी उत्पन्न करते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण हमारे विचार हैं। विचार ही कर्म बनते हैं और कर्म ही हमारा भाग्य निर्माण करते हैं। सकारात्मक, पवित्र और रचनात्मक विचार जीवन को उन्नति की ओर ले जाते हैं। योग और अध्यात्म हमें सिखाते हैं कि आहार शुद्ध हो, व्यवहार मधुर हो और विचार उच्च हों। जब ये तीनों संतुलित होते हैं, तब जीवन में सुख, शांति और समृद्धि स्वतः आती है। स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और प्रसन्न आत्मा का रहस्य इन्हीं तीनों की पवित्र एकता में निहित है।

योग गुरु महेश अग्रवाल ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि शुभ चिंतन, नियमित उपवास, पर्याप्त एवं गहरी नींद, प्राकृतिक चिकित्सा तथा नियमित योगाभ्यास के साथ यदि व्यक्ति प्रेम, करुणा और त्याग की भावना अपनाता है, तो वह आजीवन स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकता है। उन्होंने बताया कि पूजा-पाठ एवं धर्म-कर्म से जहाँ मानसिक शांति प्राप्त होती है, वहीं नियमित योगाभ्यास से शारीरिक स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मबल में वृद्धि होती है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में पवित्रता, सात्त्विकता और अनुशासन को स्थान दे, तभी जीवन वास्तविक अर्थों में योगमय बन सकता है। उन्होंने दवाइयों पर अनावश्यक निर्भरता के स्थान पर प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि प्राकृतिक उपचार, उपवास, अपक्व आहार और योग के माध्यम से अनेक शारीरिक एवं मानसिक रोगों से मुक्ति संभव है। उन्होंने सभी को योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की शरण में आने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान योग गुरु महेश अग्रवाल ने योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान के व्यावहारिक अभ्यास भी करवाए। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग क्षणिक सुख के पीछे दौड़ते हैं, जबकि स्थायी आनंद, संतोष और आंतरिक शांति का मार्ग चेतना के विकास एवं ध्यान साधना में निहित है। मन की सजगता और सकारात्मक आंतरिक परिवर्तन से ही जीवन में वास्तविक प्रसन्नता और संतुलन प्राप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित साधकों ने नियमित योगाभ्यास अपनाने एवं प्राकृतिक जीवनशैली को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

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