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गाइडलाइन निर्धारण में ‘रियल मार्केट फैक्टर्स’ शामिल हों — मनोज मीक बढ़े हुए रेट नहीं, बढ़ा हुआ वॉल्यूम चाहिए — क्रेडाई भोपाल

अगले वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए कलेक्टर गाइडलाइन रेट निर्धारण की प्रक्रिया के बीच क्रेडाई भोपाल के प्रतिनिधियों मनोज मीक, अजय शर्मा तथा शिवनव प्रधान ने महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक से भेंट कर, प्रस्तावित बदलावों से जुड़े व्यावहारिक पक्षों और बाज़ार पर पड़ने वाले प्रभावों को तथ्यात्मक रूप से रखा। महापंजीयक महोदय ने प्रस्तुत बिंदुओं पर विवेकपूर्ण समाधान का आश्वासन दिया है।

क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने स्पष्ट किया कि गाइडलाइन “मार्गदर्शक सिद्धांत” है, इसे हर स्थिति में ‘एबसोल्यूट’ बनाकर लागू करने से वैध लेन-देन और अफोर्डेबिलिटी प्रभावित होती है। संगठन ने सुझाव दिया कि गाइडलाइन में एक रेंज-आधारित ढांचा अपनाया जाए, ताकि प्रॉपर्टी के वास्तविक गुण, लैंड-यूज़, फ्रंटेज, रोड-विड्थ, लोकेशन प्रीमियम, एमेनिटीज, स्पेसिफिकेशन और टाइटल-क्वालिटी के अनुसार मूल्यांकन संभव हो और अनावश्यक विवाद व स्क्रूटनी घटे।

ग्रीन बेल्ट, नदी-नालों, जलाशयों के किनारे उपयोग-प्रतिबंध के अनुरूप दर जहाँ निर्माण व उपयोग पर नियामकीय प्रतिबंध होते हैं, वहाँ भूमि की उपयोगिता स्वतः कम होती है। इसलिए ऐसे क्षेत्रों में विशेष रियायत या श्रेणीकरण का सुझाव दिया गया है, ताकि मूल्यांकन “उपयोग” के सिद्धांत पर न्यायसंगत बने।

कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में फ्लोर-वाइज रेट हैं लेकिन व्यापार का प्रमुख संचालन ग्राउंड फ़्लोर पर होता है; ऊपर के फ्लोर्स पर प्रायः कार्यालय, अन्य सेवाएं ही संचालित होते हैं। इसलिए गाइडलाइन में फ्लोर के अनुसार अतिरिक्त युक्तिसंगत छूट दी जानी चाहिए।

क्रेडाई ने यह भी प्रस्ताव रखा कि अत्यधिक गाइडलाइन के कारण जो वास्तविक क्रय-विक्रय केवल एग्रीमेंट तक सीमित रह गए और विधिवत पंजीयन नहीं हो सका, उनके लिए सीमित अवधि की एमनेस्टी स्कीम लाई जाए। इससे लंबित पंजीयन वैध होंगे, शासन के राजस्व में वृद्धि होगी और आम नागरिकों व व्यवसायियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम होगा।

शहरी कृषि भूमि के मामले में क्षेत्रफल-आधारित उपबंधों के कारण गाइडलाइन मूल्य कई बार बाजार मूल्य से कई गुना बढ़ जाता है और वैध लेन-देन असंभव हो जाता है। इस महत्वपूर्ण सुझाव के तहत कृषि भूमि पर प्रचलित “स्लैब आधारित उपबंधों” के कारण होने वाली कृत्रिम बढ़ोतरी का युक्तिकरण करने, और मूल्यांकन को प्राकृतिक व वास्तविक कृषि दरों के अनुरूप रखने की मांग की गई। क्रेडाई ने यह भी रेखांकित किया कि मध्यप्रदेश में स्टाम्प ड्यूटी के अलावा लगने वाले नगरीय निकाय कर, जनपद कर और उपकर मिलकर कुल रजिस्ट्री-लागत को बहुत बढ़ा देते हैं; इसलिए इन अतिरिक्त भारों का युक्तिकरण आवश्यक है।

21 साल से मास्टर प्लान के अभाव एवं दशकों से बार-बार सर्किल रेट एवं स्टाम्प-लागत बढ़ने से राजधानी के बाजार में गंभीर अस्थिरता आई है। इसलिए यथार्थवादी कटौती के साथ अगले 3 वर्षों तक वृद्धि न हो ताकि निवेश, व्यापार और राजस्व का निष्पक्ष आकलन हो सके और उद्योग को स्थिरता मिले।

क्रेडाई के अध्यक्ष मनोज मीक ने अपेक्षा व्यक्त की कि विभाग पारदर्शी, वैज्ञानिक और बाजार-स्थिरता बढ़ाने वाली पद्धति अपनाकर निर्णय लेगा, ताकि राजधानी में वैध पंजीयन बढ़ें, निवेश-विश्वास मजबूत हो और राजस्व का टिकाऊ आधार “बढ़े हुए रेट नहीं बल्कि बढ़ा हुआ वॉल्यूम” बने।

— सचिवालय, क्रेडाई भोपाल

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