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स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का शुभारंभ

नवोन्मेष 2026 के अंतर्गत देश-विदेश के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने साझा किए एआई के नवीन आयाम

भोपाल। मध्य भारत के पहले कौशल विश्वविद्यालय स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी, भोपाल में गुरुवार को इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का शुभारंभ हुआ। यह दो दिवसीय सम्मेलन नवोन्मेष 2026 के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधार्थी, एकेडमिशियन और उद्यमी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के विविध आयामों पर विचार साझा कर रहे हैं।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में आईसेक्ट समूह के चेयरमैन एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे तथा आरएनटीयू के कुलगुरु डॉ. आर.पी. दुबे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु के प्रोफेसर डॉ. सुरेश सुंदरम तथा ए-स्टार्स इंस्टीट्यूट फॉर इंफोकॉम रिसर्च, सिंगापुर की प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. सविथा रामास्वामी ने अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. विजय सिंह और कुलसचिव डॉ. सितेश कुमार सिन्हा भी उपस्थित रहे।

अपने व्याख्यान में डॉ. सविथा रामास्वामी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के वर्तमान और भविष्य के उपयोगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई एल्गोरिदम डेटा को उत्पन्न करने के साथ-साथ उसी डेटा का विश्लेषण कर सार्थक परिणाम भी प्रदान करते हैं। उन्होंने एआई को एक प्रभावी डिसीजन सपोर्ट टूल बताते हुए कहा कि यह मानव निर्णय-प्रक्रिया को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा। डॉ. रामास्वामी ने कहा कि हेल्थकेयर क्षेत्र में एआई डायग्नोस्टिक एक्यूरेसी को बेहतर बना रहा है और ड्रग डिस्कवरी, पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तथा क्लिनिकल डिसीजन मेकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, क्वालिटी इंस्पेक्शन और ऑटोनोमस रोबोटिक्स के माध्यम से एआई उत्पादकता और दक्षता को बढ़ाने में सहायक बन रहा है। उन्होंने परिवहन, ऊर्जा तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भी एआई की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने एआई के विकास क्रम की जानकारी देते हुए बताया कि तकनीक रूल-बेस्ड एआई से आगे बढ़कर मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, फाउंडेशन मॉडल, जनरेटिव एआई और अब एजेंटिक एआई के दौर में प्रवेश कर चुकी है। उनके अनुसार एआई की यह प्रगति विभिन्न क्षेत्रों में वैल्यू क्रिएशन का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

वहीं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु के प्रोफेसर डॉ. सुरेश सुंदरम ने अपने व्याख्यान में “आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस इन ऑटोनोमस व्हीकल्स” विषय पर चर्चा करते हुए इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों और संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वायत्त वाहनों के विकास में सेफ मोशन प्लानिंग और प्रेडिक्टिव मोशन प्लानिंग अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं, जिनके माध्यम से वाहन सड़क की परिस्थितियों का पूर्वानुमान लगाकर सुरक्षित निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती अनिश्चितता (Uncertainty) है, क्योंकि वास्तविक सड़क परिवेश में कई अप्रत्याशित परिस्थितियाँ उत्पन्न होती रहती हैं। ऐसे में रीइन्फोर्समेंट लर्निंग आधारित प्लानिंग तकनीकें स्वायत्त वाहनों को लगातार सीखने और बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाती हैं। डॉ. सुंदरम ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑन-रोड एनवायरनमेंट अत्यंत जटिल होता है और ऐसी स्थिति में कोई एक सेंसर सभी परिस्थितियों के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। इसलिए विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार मल्टी-सेंसर सिस्टम का उपयोग आवश्यक होता है, जहाँ अलग-अलग सेंसर विभिन्न प्रकार की सूचनाएँ प्रदान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में फाउंडेशन मॉडल्स और मल्टी-मोडैलिटी आधारित एआई सिस्टम स्वायत्त वाहनों को अधिक सक्षम और विश्वसनीय बनाएंगे, जिससे विभिन्न सेंसरों और डेटा स्रोतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

इस अवसर पर आईसेक्ट समूह के चेयरमैन एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल भविष्य की तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह वर्तमान का सशक्त उपकरण बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले एआई को मुख्यतः प्रिडिक्टिव मॉडल के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज यह विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक समाधान प्रदान कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने एआई के क्षेत्र में व्यवस्थित पहल करते हुए एआई मिशन की स्थापना का निर्णय लिया है, जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय की फैकल्टी को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पहले कंप्यूटर साक्षरता मिशन की शुरुआत की गई थी, उसी प्रकार अब एआई साक्षरता मिशन को आगे बढ़ाया जाएगा। श्री चौबे ने कहा कि पिछले छह महीनों में विश्वविद्यालय ने एआई आधारित कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल लर्निंग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। साथ ही ‘एआई रथ’ के माध्यम से जिला स्तर पर विद्यार्थियों और युवाओं को एआई से संबंधित प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि अगले तीन वर्षों में एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई को मानव का सहयोगी बनाकर उपयोग करना चाहिए। तकनीक का उद्देश्य मनुष्य की क्षमता को बढ़ाना है, न कि उस पर नियंत्रण स्थापित करना। इसलिए एआई के जिम्मेदार और संतुलित उपयोग पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

कार्यक्रम में गूगल की रीजनल मैनेजर सुश्री पद्मावती ने शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आईसेक्ट समूह द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक शिक्षा के पारंपरिक ढांचे को बदलते हुए एक अधिक समावेशी, इंटरएक्टिव और भविष्य उन्मुख शिक्षा इकोसिस्टम का निर्माण कर रही है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल तकनीक और एआई के माध्यम से शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। सुश्री पद्मावती ने स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी और गूगल के बीच संभावित सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की साझेदारियाँ विद्यार्थियों को नवीनतम तकनीकों से जोड़ने और उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

इससे पूर्व स्वागत वक्तव्य में स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. विजय सिंह ने देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, शिक्षाविदों और उद्यमियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। अंत में आभार वक्तव्य एसजीएसयू के कुलसचिव डॉ. सितेश कुमार सिन्हा ने दिया।

इसके बाद प्लीनरी सेशंस का आयोजन किया गया जिसमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस एंड टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर डॉ. दीपक मिश्र, आईसर भोपाल में प्रोफेसर प्रो. पी.बी. सुजित, गीक्स ऑफ गुरुकुल के सीईओ श्री चिंतन वत्स झा, एनआईटी रायपुर में एसो. प्रोफेसर डॉ. तारक करमाकर ने एआई के विभिन्न पहलुओं पर प्रेजेंटेशन दिए। इसके बाद तकनीकी सत्रो में कोर एआई टेक्नोलॉजी, एआई इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, एआई इन सोसाइटी एंड गवर्नेंस, क्रॉस कटिंग इश्यूज तथा एआई इन डिफेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर रिसर्च पेपर प्रेजेंट किए। कॉन्फ्रेंस में भारत सहित सिंगापुर, जर्मनी, मलेशिया, यूएई, कोसोवो, वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक, शोधार्थी, एकेडमिक विशेषज्ञ और उद्यमी भाग लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया।

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