

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास (संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन) द्वारा वेदांत दर्शन और आध्यात्मिक विरासत को जन-जन तक पहुँचाने के लिए वर्ष 2020 से नियमित अद्वैत जागरण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में, 50वें अद्वैत जागरण शिविर का शुभारंभ 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड के तपोवन कुटी, उत्तरकाशी में हुआ।
यह शिविर न्यास के न्यासी स्वामी हरिब्रह्मेन्द्रानंद तीर्थ के पावन सान्निध्य में आयोजित हो रहा है। इस शिविर में 10 से अधिक राज्यों के युवा, आदि शंकराचार्य द्वारा रचित प्रकरण ग्रंथ ‘तत्त्वबोध’ का अध्ययन गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से करेंगे।
गंगा तट पर लिया एकात्मता का संकल्प
12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस एवं शिविर के उद्घाटन अवसर पर हिमालय के दिव्य क्षेत्र उत्तरकाशी में विभिन्न राज्यों से आए युवाओं ने सामूहिक रूप से भगीरथी गंगा के तट पर योग किया और एकात्मता का संकल्प लिया।
उल्लेखनीय है कि आदि शंकर ने योग एवं वेदांत को समन्वित भाव से अपने भाष्यों और प्रकरण ग्रन्थों में प्रस्तुत किया है। हमारे ऋषियों ने योग को परिभाषित करते हुए कहा है— ‘युज्यते एतद् इति योगः’ अर्थात्, जो जोड़ता है, वही योग है। इसलिए योग का यह प्रसार उस विचार का विस्तार है, जो पूरे संसार को एक परिवार के रूप में समाहित करता है। योग के विस्तार का अर्थ ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना का विस्तार है। ‘एकात्म धाम’ भी एकात्मता के इसी संदेश को जन-जन तक प्रसारित करने के लिए संकल्पित है। आचार्य शंकर के अनुसार, योग का अंतिम लक्ष्य अद्वैत वेदांत के माध्यम से स्वयं और ब्रह्म की एकता का अनुभव करना है।
केरल में भी हुई 51 वें शिविर की शुरुआत
चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन, वेलियानाड़ केरल में भी देश -विदेश के 50 युवाओं की उपस्थिति में 51 वें अद्वैत जागरण शिविर का शुभारंभ स्वामी शारदानंद सरस्वती के सान्निध्य में हुआ, इस अवसर पर युवाओं ने शिविर की शुरुआत योग एवं ध्यान के साथ की।
वर्ष 2026 में आयोजित होंगे कुल 22 शिविर
देश-विदेश के 18 से 32 वर्ष के युवाओं एवं 32 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए ‘अद्वैत वेदांत’ के गहन अध्ययन और अनुभव हेतु वर्ष 2026 में न्यास द्वारा देश के विभिन्न आश्रमों एवं संस्थानों में प्रतिष्ठित आचार्यों के मार्गदर्शन में 22 अद्वैत जागरण शिविरों (Advaita Awakening Retreat) का आयोजन किया जा रहा है।
केरल से लेकर उत्तराखण्ड तक हो रहे शिविर
वर्ष 2026 में ये शिविर अद्वैत आश्रम-मायावती (उत्तराखण्ड), चिन्मय गार्डन-कोयम्बटूर (तमिलनाडु), शारदा तपोवन-टिहरी (उत्तराखण्ड), चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन-वेलियानाड (केरल), आदि शंकर ब्रह्म विद्यापीठ-उत्तरकाशी (उत्तराखण्ड), आर्ष विद्या मंदिर-राजकोट (गुजरात), दयानन्द आश्रम-ऋषिकेश एवं चिन्मय तपोवन-सिद्धबारी (हिमाचल प्रदेश) में संपन्न हो रहे हैं।
प्रकरण ग्रंथों का कराया जाता है गहन अध्ययन
इस 10 दिवसीय शिविर में आचार्य शंकर के प्रकरण ग्रंथ जैसे— तत्त्वबोध, आत्मबोध, भज गोविन्दम्, विवेक चूड़ामणि और मनीषा पंचकम् आदि के अध्ययन के साथ-साथ प्रतिदिन योगाभ्यास, ध्यान, स्तोत्र पारायण और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए जाते हैं। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को किसी एक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व के स्थल का भ्रमण भी कराया जाता है। सात्त्विक दिनचर्या का पालन करते हुए देश-विदेश के प्रतिभागी यहाँ दशनामी संन्यास परंपरा के ‘गुरुकुल’ का साक्षात् अनुभव कर रहे हैं।
आगामी शिविरों में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागी न्यास की वेबसाइट www.oneness.mp.gov.in पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के पश्चात साक्षात्कार (इंटरव्यू) के माध्यम से योग्य प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा।



