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भूखों को रोटी दें, सूखे चेहरों पर नूरानी दें कारे मेघा पानी दें

स्टेट बैंक साहित्य एवं कला परिषद की "पावस गोष्ठी" संपन्न

भोपाल। स्टेट बैंक साहित्य एवं कला परिषद की “पावस गोष्ठी” का आयोजन गुलमोहर, सागर परिसर, में श्री मनोज गुप्ता के आवास पर हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष गोकुल सोनी ने की, मुख्य अतिथि आयकर विभाग के अतिरिक्त कमिश्नर श्री संजय अग्रवाल एवं संस्था संरक्षक चर्चित साहित्यकार श्री सुरेश पटवा भी मंचासीन रहे। कार्यक्रम का सफल एवं सरस संचालन संस्था सचिव श्री जयंत भारद्वाज ने किया।
कार्यक्रम का आरम्भ श्रीमती संगीता भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। श्री सुंदरलाल प्रजापति ने पढ़ा, “दिलों में आजकल मैं प्यार की शम्मा जलाता हूं।
इसलिए दोस्तों में ढेर सारा प्यार पाता हूं।।”
श्री लक्ष्मीकांत जावणे ने पढ़ा, “तमाशे आदमी के हैं,कहर ए आज पानी का।
सड़क से समंदर तक, सफर ए आज पानी का।” श्री प्रदीप श्रीवास्तव ने पढ़ा, “आओ बारिश में हम खुद को भिगोते हैं। इन फुहारों के धागों में, खुशियों को पिरोते हैं।।” श्रीमती संगीता भरद्वाज ने पढ़ा, “धरती के आंचल पर बादल यूंँ ठहरे हैं। अंबर के नैनों में राज बड़े गहरे हैं।।” श्री मनोज गुप्ता ने कविता युग्म “मैं कौन हूं” एवं “तुम कौन हो” पढ़ा।गोकुल सोनी ने पढ़ा, “उमग उमग हम खुशी मनाएं, घर घर मंगल गीत सुनाएं। भूखों को रोटी दे सूखे चेहरों पर नूरानी दे। अखिल विश्व के पालनहारे, कारे मेघा पानी दे।।” श्री सुरेश पटवा ने पढ़ा, “ज़िंदगी तुम जो गुलाब
मेरी कब्र पर रख गए थे। वह मुरझा गया है,
काँटे मुस्कुरा रहे हैं।” श्री उमाशंकर खरया ने पढ़ा, “लेखा जोखा कर्मों का करने हम इस दुनियां में आए हैं। मेहमान हैं हम इस धरती पर, हम वक्त बिताने आए हैं।” श्री जयंत भारद्वाज ने “रेलवे प्लेटफॉर्म के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के स्पीकर्स” एवं कस्बेनुमा शहरों में फिल्म का अनाउंसमेंट” विषयों पर अपने मिमिक्री आइटम्स से सबको खूब हंसाया। श्री अरुण गुप्ता ने अपने पिता श्री लक्ष्मीनारायण गुप्त देशबंधु को याद करते हुए सुंदर रचना सुनाई। श्रीमती शालिनी अग्रवाल ने एक सुंदर गीत प्रस्तुत किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री सोनी ने कहा कि व्यक्ति का मूल स्वभाव आनंदित रहना है, इसी के लिए हमे ईश्वर ने बनाया है, परंतु हम अपने दुखों को तोते की तरह पालकर रखते हैं। साहित्य हमें सही जीवन दृष्टि देकर चिंता मुक्त करके, जीवन को सुखद बनाता है। मुख्य अतिथि श्री अग्रवाल ने जीवन के अनिवार्य चिंतन सूत्र बताए, जिनसे जीवन में सफलताएं पाना आसान होता है। अंत में श्री मनोज गुप्ता ने सभी का आभार प्रदर्शित किया। भूषण सिंघल ने भी बहुत सुंदर रचना सुनाई।”

 

 

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