TET के खिलाफ 30 अगस्त को दिल्ली में निर्णायक हुंकार जंतर-मंतर पर देशभर के शिक्षक उठाएंगे आवाज
जगदीश यादव ने कहा—“वर्षों की सेवा को एक परीक्षा के तराजू पर नहीं तौला जा सकता”

भोपाल/नई दिल्ली। TET की अनिवार्यता को लेकर देशभर के शिक्षकों में बढ़ते असंतोष के बीच 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर व्यापक शिक्षक आंदोलन का आह्वान किया गया है।आंदोलन को लेकर जगदीश यादव, प्रदेश अध्यक्ष राज्य शिक्षक संघ मध्यप्रदेश एवं राष्ट्रीय संयोजक ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट ने देशभर के शिक्षक साथियों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है।
जगदीश यादव ने कहा कि यह आंदोलन केवल TET के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सम्मान,अनुभव, सेवा-सुरक्षा और भविष्य की लड़ाई है।
उन्होंने कहा, “जिस शिक्षक ने वर्षों तक बच्चों को पढ़ाया,देश के भविष्य को गढ़ा, चुनाव और जनगणना जैसी राष्ट्रीय जिम्मेदारियां निभाईं, उसी शिक्षक की योग्यता पर आज प्रश्नचिह्न खड़ा करना उसके समर्पण और अनुभव का अपमान है। शिक्षक की पूरी सेवा-यात्रा को एक परीक्षा के प्रश्नपत्र से छोटा नहीं किया जा सकता।”उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि यदि वर्षों तक वही शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए योग्य था, उसकी सेवाएं स्वीकार की गईं और उसे शासन की तमाम जिम्मेदारियां सौंपी गईं, तो अचानक उसकी योग्यता को संदेह के कठघरे में खड़ा करने का औचित्य क्या है?
जगदीश यादव ने कहा कि शिक्षक गुणवत्ता के विरोधी नहीं हैं, लेकिन गुणवत्ता के नाम पर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के भविष्य को असुरक्षित करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।उन्होंने कहा—“शिक्षक कोई कागज पर लिखी योग्यता नहीं है। शिक्षक वर्षों की तपस्या, अनुभव और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण का नाम है। जिस शिक्षक ने लाखों बच्चों को खड़ा होना सिखाया है, वह अपने अधिकारों के लिए स्वयं भी खड़ा होना जानता है।” उन्होंने कहा कि 30 अगस्त को जंतर-मंतर पर शिक्षक केवल अपनी मांग रखने नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट ऑफ इंडिया के बैनर तले अपनी सामूहिक शक्ति और एकजुटता का प्रदर्शन करने पहुंचेंगे।
जगदीश यादव ने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी व्यक्ति अथवा राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। यह शिक्षक हितों और न्यायपूर्ण नीति के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष है।उन्होंने देशभर के शिक्षकों से आह्वान करते हुए कहा—
“30 अगस्त को दिल्ली चलो!
जंतर-मंतर चलो!
अपने सम्मान के लिए चलो!अपनी सेवा-सुरक्षा के लिए चलो!अपने भविष्य के लिए चलो!”
उन्होंने कहा कि अब शिक्षक की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक शिक्षक की आवाज भले ही कमजोर समझी जाए, लेकिन जब देशभर के शिक्षक एक स्वर में बोलते हैं तो वह आवाज व्यवस्था के दरवाजे तक पहुंचती है।
अंत में उन्होंने कहा—हम संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। हमारा संघर्ष शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा, लेकिन हमारे संकल्प में कोई कमजोरी नहीं होगी। शिक्षक सम्मान, सेवा-सुरक्षा और न्याय के लिए संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक न्यायपूर्ण समाधान नहीं निकलता।”
— जगदीश यादव
प्रदेश अध्यक्ष, राज्य शिक्षक संघ मध्यप्रदेश
राष्ट्रीय संयोजक, ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट




