दुखिया बाबा मंदिर में वर्चस्व की जंग पर फूटा श्रद्धालुओं का गुस्सा, बोले- मंदिर में नहीं चलेगी राजनीति
झारखंड के जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड स्थित प्रसिद्ध करमदाहा दुखिया बाबा मंदिर इन दिनों प्रबंधन समिति को लेकर चल रहे विवाद के कारण चर्चा में है. पिछले करीब छह माह से मंदिर की पुरानी और नई प्रबंधन समिति के बीच वर्चस्व की लड़ाई जारी है. अब इस विवाद पर स्थानीय श्रद्धालुओं का भी गुस्सा सामने आने लगा है. श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर आस्था का केंद्र है और यहां किसी भी तरह की राजनीति या गुटबाजी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर विवाद का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है.
श्रद्धालुओं ने कहा, मंदिर को राजनीति से रखा जाए दूर
स्थानीय श्रद्धालु मदन महतो, छोटू कुमार मिश्रा, विवेक मिश्रा, विनोद ठाकुर, मुकेश कुमार, बिट्टू रजक, मनोज कुमार दास, विवेक रजवार, श्याम कुमार महतो, अनिल सोरेन समेत दर्जनों लोगों ने एक स्वर में कहा कि दुखिया बाबा मंदिर पूरे क्षेत्र की आस्था, विश्वास और धार्मिक भावनाओं का प्रमुख केंद्र है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं का आरोप है कि पिछले छह माह से दो पक्षों के बीच चल रहे विवाद और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण मंदिर की गरिमा प्रभावित हो रही है. उनका कहना है कि धार्मिक स्थल को किसी भी तरह के राजनीतिक विवाद से दूर रखा जाना चाहिए. मंदिर में केवल धार्मिक गतिविधियां और श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.
सावन से पहले समाधान की उठी मांग
श्रद्धालुओं ने कहा कि सावन माह शुरू होने वाला है और इस दौरान हजारों श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से दुखिया बाबा मंदिर में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. यदि प्रबंधन को लेकर विवाद जारी रहा तो मंदिर की व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को सावन शुरू होने से पहले दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद का समाधान निकालना चाहिए. उनका मानना है कि समय रहते पहल नहीं हुई तो धार्मिक आयोजन प्रभावित हो सकते हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है.
पुरानी और नई कमेटी के बीच जारी है विवाद
जानकारी के अनुसार मंदिर की पुरानी प्रबंधन समिति को स्थानीय ग्राम प्रधान सहित कुछ लोगों का समर्थन प्राप्त है. वहीं दूसरी ओर नई समिति के समर्थकों का कहना है कि मंदिर का संचालन पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए. उनका तर्क है कि मंदिर की आय-व्यय का नियमित लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए और प्रबंधन व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनाई जाए. इन्हीं मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई बार बैठकें भी आयोजित की गईं. नई समिति के गठन के प्रयास भी हुए, लेकिन अब तक किसी सर्वमान्य समाधान पर सहमति नहीं बन सकी. इसी कारण विवाद लगातार बना हुआ है.
प्रशासन से निष्पक्ष हस्तक्षेप की मांग
श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष भूमिका निभाने की मांग की है. उनका कहना है कि प्रशासन दोनों पक्षों से बातचीत कर ऐसा समाधान निकाले, जिससे मंदिर का संचालन सुचारु रूप से हो सके और किसी भी पक्ष को अनावश्यक विवाद का अवसर न मिले. लोगों का कहना है कि मंदिर किसी व्यक्ति या समूह की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की धार्मिक आस्था का केंद्र है. इसलिए इसके संचालन में पारदर्शिता और सभी पक्षों की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए.
क्या बोले अंचलाधिकारी
नारायणपुर के अंचलाधिकारी देवराज गुप्ता ने कहा कि मंदिर में चल रही गतिविधियों पर प्रशासन की पूरी नजर है. उन्होंने बताया कि अब तक इस मामले में प्रशासन को किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत या आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई आवेदन प्राप्त होता है तो नियमानुसार उसकी जांच की जाएगी और दोनों पक्षों को सुनने के बाद उचित कार्रवाई करते हुए मामले का समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा.
श्रद्धालुओं की प्राथमिकता, शांतिपूर्ण माहौल में हो पूजा
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि मंदिर की गरिमा और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखना है. उनका मानना है कि दुखिया बाबा मंदिर पूरे इलाके की पहचान है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह के विवाद का सामना नहीं करना चाहिए. श्रद्धालुओं ने प्रशासन से अपील की है कि सावन माह शुरू होने से पहले मंदिर प्रबंधन विवाद का समाधान कर शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि हजारों श्रद्धालु बिना किसी बाधा के भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक कर सकें.

