

भोपाल। भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक शिक्षा के संवर्धन के लिए सतत कार्यरत गायत्री शक्तिपीठ, एमपी नगर, भोपाल द्वारा संचालित आचार्य श्री राम विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) में गुरुवार की सुबह गीता के प्रेरक संदेशों के साथ एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि “भगवान केवल सच्चे भाव के भूखे हैं, बाहरी आडंबर के नहीं।”
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा ‘ऑथर ऑफ द ईयर’ से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय लेखक ऋतेश एस. निगम रहे। उन्होंने कक्षा 4 से 8 तक के विद्यार्थियों के बीच बैठकर अत्यंत सरल और सहज भाषा में गीता के व्यावहारिक जीवन मूल्यों पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि गंभीर ब्रेन इंजरी से उबरने के दौरान उन्होंने 15 वर्षों तक प्रतिदिन गीता का एक श्लोक अपनी डायरी में लिखने का संकल्प लिया। यही साधना आगे चलकर ‘स्वगीता’ (Svagita) के रूप में विकसित हुई, जिसने उन्हें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश संसद (UK Parliament) तक पहचान दिलाई। उन्होंने विद्यार्थियों को भी नियमित अध्ययन, आत्मचिंतन और गीता के संदेशों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
गायत्री शक्तिपीठ का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि उनमें संस्कार, आत्मविश्वास, नैतिकता और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था विकसित करना भी है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए समय-समय पर ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विद्यालय की प्राचार्या शीलू शर्मा ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आध्यात्मिक एवं नैतिक शिक्षा उतनी ही आवश्यक है जितनी शैक्षणिक शिक्षा। कार्यक्रम के सफल संचालन में शिक्षिकाओं नीलम ध्रुवे, रचना श्रीवास्तव, चंद्रकला रिछारिया, दिशा पटेरिया तथा वंदना वर्मा का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की और लेखक द्वारा दिया गया संदेश—”हम जो चाहें बन सकते हैं”—एक स्वर में दोहराया।
कार्यक्रम के अंत में गायत्री शक्तिपीठ एवं विद्यालय परिवार ने श्री ऋतेश एस. निगम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के संस्कारमूलक कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
