खबर

22 साल तक पहाड़ काटने वाले दशरथ मांझी के परिवार की आज कैसी है जिंदगी? 19वीं पुण्यतिथि पर जानिए

प्रेम, संघर्ष और अटूट जिद की मिसाल बन चुके पर्वत पुरुष दशरथ मांझी को दुनिया उस शख्स के रूप में जानती है, जिसने अकेले दम पर 22 वर्षों तक छेनी और हथौड़े से पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया। उनके इस अद्भुत संघर्ष ने हजारों लोगों की जिंदगी आसान कर दी। लेकिन 17 अगस्त 2007 को उनके निधन के 19 साल बाद आज भी एक सवाल लोगों के मन में है कि जिस व्यक्ति ने पूरे समाज के लिए रास्ता बनाया, उसके अपने परिवार की जिंदगी कितनी बदली?

पत्नी की मौत ने बदल दी पूरी जिंदगी
गया जिले के गहलौर गांव निवासी दशरथ मांझी की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ उनकी पत्नी फाल्गुनी देवी की मौत थी। समय पर इलाज नहीं मिलने से पत्नी के निधन के बाद उन्होंने संकल्प लिया कि कोई भी व्यक्ति पहाड़ की वजह से सुविधाओं से वंचित नहीं रहेगा। इसके बाद उन्होंने अकेले ही पहाड़ काटना शुरू किया और 22 वर्षों की मेहनत से गहलौर में रास्ता बना दिया।संघर्ष को मिला राष्ट्रीय और वैश्विक सम्मान
दशरथ मांझी की कहानी धीरे-धीरे पूरे देश और दुनिया तक पहुंची। उनके जीवन पर बनी फिल्म मांझी: द माउंटेन मैन ने करोड़ों लोगों तक उनका संघर्ष पहुंचाया। बिहार सरकार ने उन्हें सम्मानित किया और भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया।निधन के बाद परिवार को मिला सहयोग
मांझी के निधन के बाद परिवार को कई स्तरों पर मदद मिली। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी पोती के पति को स्वास्थ्य केंद्र में नौकरी दिलाई। राहुल गांधी ने जर्जर झोपड़ी की जगह पक्का मकान बनवाने में सहयोग किया, जबकि अभिनेता आमिर खान ने गहलौर पहुंचकर आर्थिक सहायता दी।

‘गहलौर बने राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल’
परिवार का कहना है कि व्यक्तिगत सहायता जरूर मिली, लेकिन गहलौर गांव का समग्र विकास अब भी अधूरा है। वे चाहते हैं कि इस गांव को राष्ट्रीय पर्यटन और प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि नई पीढ़ी दशरथ मांझी के संघर्ष से प्रेरणा ले सके।भारत रत्न की मांग फिर हुई तेज
बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने दशरथ मांझी को युग पुरुष बताते हुए उन्हें भारत रत्न देने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि यह सम्मान वंचित समाज के लिए प्रेरणा का प्रतीक बनेगा। आज भी गहलौर आने वाला हर व्यक्ति उस रास्ते को देखकर यही महसूस करता है कि एक साधारण इंसान ने अपने असाधारण हौसले से इतिहास रच दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button