रक्षाबंधन पर्व पर बच्चों के लिए प्रेरणा दायी एवं नारी सम्मान संदेश संकल्प, भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना।

प्यारे बच्चों, आप सभी को प्रणाम एवं रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।
रक्षाबंधन हमारा एक पवित्र और पारंपरिक पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उससे अपनी रक्षा का वचन लेती है। भाई भी बहन को उपहार देता है और उसकी हर संभव सहायता करने का संकल्प लेता है।
लेकिन बच्चों, क्या रक्षाबंधन केवल राखी बाँधने, मिठाई खाने और उपहार देने तक ही सीमित रहना चाहिए?
नहीं! आज के समय में हमें रक्षाबंधन को एक नए और श्रेष्ठ संकल्प के साथ मनाना चाहिए।
आज जब समाज में बहनों, बेटियों और बच्चियों के प्रति अनुचित व्यवहार तथा अपमानजनक विचार देखने को मिलते हैं, तब प्रत्येक भाई को यह संकल्प लेना चाहिए—
“मैं केवल अपनी बहन का ही सम्मान और संरक्षण नहीं करूँगा, बल्कि समाज की प्रत्येक बेटी और बहन को अपनी बहन के समान मानूँगा तथा उनके सम्मान और सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहूँगा।”
भाइयों को एक और महत्वपूर्ण संकल्प लेना है—
“मैं जीवन में किसी भी प्रकार का नशा नहीं करूँगा और अपने मित्रों तथा साथियों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करूँगा।”
क्योंकि नशा व्यक्ति की बुद्धि, स्वास्थ्य, चरित्र और परिवार—सभी को नुकसान पहुँचाता है। एक श्रेष्ठ भाई वही है जो स्वयं भी अच्छे आचरण वाला बने और दूसरों को भी अच्छाई की ओर प्रेरित करे।
इसके साथ ही हम अपनी धरती माँ की रक्षा का भी संकल्प लें। अधिक से अधिक वृक्ष लगाएँ, उनकी देखभाल करें और पर्यावरण को सुरक्षित रखें। वृक्ष हमें जीवन, हरियाली, स्वच्छ हवा और अनेक जीव-जंतुओं को आश्रय प्रदान करते हैं।
आइए, आज रक्षाबंधन पर हम सब मिलकर संकल्प लें—
बहनों का सम्मान करूंगा, सुन ले मेरी बात ओ बहना।
दूर रहूंगा सदा नशे से, मानूँगा तेरा ये कहना।।
हर बेटी को बहन मानेंगे, उसकी रक्षा को तत्पर रहेंगे।
नशे से स्वयं दूर रहेंगे, औरों को भी दूर करेंगे।
वृक्ष लगाएँगे, वृक्ष बचाएँगे, धरती माँ को हरा-भरा बनाएँगे।
बच्चों, यह संकल्प केवल एक औपचारिकता नहीं है। गायत्री परिवार की ओर से दिया गया यह संकल्प पत्र भरकर अपने पास रखें, उसे बार-बार पढ़ें और उसमें लिखी बातों को अपने जीवन में उतारें।
तभी हम अच्छे भाई-बहन, अच्छे बेटे-बेटियाँ और अच्छे नागरिक बन पाएँगे। हम अपने माता-पिता, परिवार, समाज और विद्यालय का नाम रोशन करेंगे।
याद रखिए—हम श्रेष्ठ बनेंगे, तो हमारा परिवार श्रेष्ठ बनेगा; परिवार श्रेष्ठ बनेगा तो समाज श्रेष्ठ बनेगा और समाज श्रेष्ठ बनेगा तो हमारा राष्ट्र श्रेष्ठ बनेगा।
तो बताइए बच्चों—क्या आप स्वयं अच्छे बनना चाहते हैं? क्या आप अपने समाज और देश को भी बेहतर बनाना चाहते हैं?
यदि हाँ, तो मेरे साथ हाथ उठाकर इस संकल्प को दोहराइए—
“मैं अपनी बहन एवं समाज की प्रत्येक बेटी का सम्मान करूँगा।
मैं किसी भी प्रकार का नशा नहीं करूँगा।
दूसरों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करूँगा।
मैं वृक्ष लगाऊँगा और उनकी रक्षा करूँगा।
मैं अपने परिवार, समाज और राष्ट्र को श्रेष्ठ बनाने में अपना योगदान दूँगा।”**
गायत्री परिवार भोपाल



