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किडनी हमारे शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है। यह खून को फिल्टर करके शरीर से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में मदद करती है। साथ ही यह ब्लड प्रेशर, इलेक्ट्रोलाइट्स और लाल रक्त कोशिकाओं से जुड़ी कई प्रक्रियाओं में भी अहम भूमिका निभाती है। किडनी की बीमारी अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत कम दिखाई दे सकते हैं। इसलिए रोजमर्रा की कुछ ऐसी आदतें, जो लंबे समय तक जारी रहती हैं, किडनी की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।

 जरूरत से कम पानी पीना

लगातार कम पानी पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है। इससे पेशाब अधिक गाढ़ा हो सकता है और कुछ लोगों में किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है। खासकर गर्मी, ज्यादा पसीना आने या उल्टी-दस्त जैसी स्थिति में शरीर में पानी की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए एक ही मात्रा में पानी पीना जरूरी नहीं है। जिन लोगों को पहले से किडनी, हृदय या लिवर की बीमारी है, उन्हें पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार रखनी चाहिए।

2. खाने में बहुत ज्यादा नमक लेना

ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है इसलिए खाने में ऊपर से नमक डालने की आदत कम करें और पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, अचार, पापड़ और अत्यधिक नमकीन प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित रखें।
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3. दर्द की दवाएं बार-बार लेना

Ibuprofen, naproxen जैसी कुछ NSAID painkillers का लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से किडनी की समस्या, डिहाइड्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य जोखिम मौजूद हों  इसलिए सिरदर्द, कमर दर्द या शरीर के दर्द में बार-बार खुद से painkiller लेने के बजाय डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

4. हाई ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज करना

हाई ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी की रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल सकता है। समस्या यह है कि हाई BP कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहता है। इसलिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करना और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लेना जरूरी है।

5. डायबिटीज को कंट्रोल न करना

लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहना किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। डायबिटीज किडनी की बीमारी का एक महत्वपूर्ण कारण है। अगर आपको डायबिटीज है, तो केवल कभी-कभार शुगर चेक करना पर्याप्त नहीं है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर और HbA1c की निगरानी, दवाओं का सही सेवन और खान-पान पर नियंत्रण जरूरी है।

6. बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड और नमकीन खाना

चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट फूड, प्रोसेस्ड मीट और अन्य अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में अक्सर सोडियम और अस्वास्थ्यकर फैट ज्यादा हो सकता है। ऐसे भोजन का लगातार ज्यादा सेवन मोटापा, हाई BP और डायबिटीज जैसे जोखिम बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर किडनी पर असर डाल सकते हैं इसलिए रोज की डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज और संतुलित मात्रा में प्रोटीन जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें।

7. मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता

लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि न करना और वजन बढ़ना सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से किडनी के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। मोटापा हाई BP और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ाता है, जो किडनी की बीमारी के प्रमुख जोखिम कारक हैं इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार नियमित वॉक, एक्सरसाइज और संतुलित डाइट को जीवनशैली का हिस्सा बनाना फायदेमंद है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड सीमित करें।
पर्याप्त पानी पिएं, लेकिन अगर डॉक्टर ने fluid restriction बताई है तो उसी का पालन करें।
BP और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें।
बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स का लंबे समय तक इस्तेमाल न करें।
नियमित शारीरिक गतिविधि करें और स्वस्थ वजन बनाए रखें।
अगर परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास है या आपको डायबिटीज/हाई BP है, तो डॉक्टर की सलाह से किडनी फंक्शन टेस्ट और urine test कराते रहें।

 

ध्यान रखें: किडनी की बीमारी शुरुआत में बिना स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकती है। पेशाब में खून या झाग, पैरों/चेहरे पर सूजन, पेशाब की मात्रा में असामान्य बदलाव, लगातार थकान या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

 

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