अध्यात्मखबर

वृंदावन में सीएम योगी बोले: ‘विदेशी आक्रांताओं ने मंदिर तोड़े, पर श्रीकृष्ण की स्मृति को नहीं मिटा पाए’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वृंदावन के पवन हंस हेलीपैड पर आगमन के बाद स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह पहुंचकर इसका भव्य लोकार्पण किया। कार्यक्रम का शुभारंभ हनुमान प्रसाद धानुका विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगीत से हुआ। इसके बाद ब्रज के कलाकारों ने राधा-कृष्ण की लीलाओं का मनमोहक मंचन किया। समारोह में गुजरात के गरबा और ब्रज के प्रसिद्ध मयूर नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां भी दी गईं।

संतों का सम्मान और अन्नप्राशन 
लोकार्पण से पूर्व मुख्यमंत्री ने भगवान कृष्ण के स्वरूप में सजे-धजे नन्हे बच्चों का अन्नप्राशन कराकर उन्हें उपहार भेंट किए। इसके साथ ही उन्होंने ब्रज के प्रमुख संतों फूलडोल बिहारी दास महाराज, महंत सुतीक्ष्ण दास, महंत सनतकुमार शरण महाराज, स्वामी रामदेवानंद सरस्वती और संत बलराम दास का स्वागत व अभिनंदन किया। कार्यक्रम के दौरान 321 सपेरा समाज के लाभार्थियों को भवन आवंटन पत्र देकर सम्मानित भी किया गयाब्रज में तेजी से बदल रही विकास की तस्वीर
पूर्व मंत्री व विधायक श्रीकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि ब्रज से लेकर गोरखपुर तक सतत विकास हो रहा है। उन्होंने कहा, “योगी बाबा आयो है, एक हजार इक्यावन करोड़ रूपैया लायौ है।” वर्ष 2017 से पहले ब्रज की स्थिति जर्जर थी, लेकिन केंद्र में नरेंद्र मोदी और राज्य में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से क्षेत्र का कायाकल्प हुआ है। उन्होंने बताया कि पूर्व में यमुना में गिरने वाले मथुरा के 36 में से 32 नालों को बंद कर दिया गया है और शेष 4 नाले भी अक्टूबर तक पूरी तरह बंद हो जाएंगे। साथ ही सूरदास ब्रजभाषा अकादमी की स्थापना और ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग पर पड़ाव स्थलों के निर्माण का कार्य तेजी से जारी है।विरासत सिर्फ स्मारकों तक ही नहीं
अयोध्या का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर एक लंबे सभ्यतागत संघर्ष का नतीजा था। ये परंपराएं जारी रहीं, सनातन की भावना के साथ आगे बढ़ीं और संघर्ष के लिए एक नया जोश पैदा किया। उन्होंने कहा कि नतीजा यह है कि आज अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बन गया है। उन्होंने कहा कि विरासत सिर्फ स्मारकों तक ही सीमित नहीं है। विरासत हमारे मंदिरों, हमारी भाषा, हमारे साहित्य, हमारे संगीत, हमारी कला, हमारे दर्शन, गणित, विज्ञान, चिकित्सा, कौशल और ज्ञान, हमारी लोक परंपराओं और हमारी ज्ञान परंपरा में है।

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