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आरएनटीयू में राष्ट्रीय शांति, एकता एवं नेतृत्व शिविर का समापन, 15 राज्यों के युवाओं ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

गांधी भवन में आयोजित ‘भारत की संतान’ कार्यक्रम में भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता का दिया संदेश; एस. एन. सुब्बाराव की पांचवीं पुण्यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि”

भोपाल। युवाओं में राष्ट्रीय एकता, शांति, सामाजिक सद्भाव और नेतृत्व की भावना विकसित करने के उद्देश्य से रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू), भोपाल आयोजित राष्ट्रीय शांति, एकता एवं नेतृत्व शिविर का समापन समाजसेवी एस. एन. सुब्बाराव की पांचवीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा के साथ हुआ। नेशनल यूथ प्रोजेक्ट और नेशनल सीनियर कोऑर्डिनेटर्स फोरम द्वारा आयोजित इस शिविर में आरएनटीयू ने सहयोगी संस्था की भूमिका निभाई। देश के 15 राज्यों से आए युवाओं ने शिविर में भाग लेकर बौद्धिक सत्रों, सामूहिक गतिविधियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सेवा, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

शिविर के अंतर्गत भोपाल के गांधी भवन में ‘भारत की संतान’ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें भारतीय संविधान में शामिल विभिन्न भाषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से भारत की विविधता और एकता को प्रस्तुत किया गया।

संकल्प और समर्पण से संभव है बदलाव: सांसद दर्शन सिंह चौधरी

गांधी भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित नर्मदापुरम के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर असंभव लगने वाले कार्यों को भी संभव बनाया जा सकता है। युवाओं को सामाजिक समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी आज की आवश्यकता है।

सांसद चौधरी ने समाजसेवी एस. एन. सुब्बाराव के जीवन को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सर्वकल्याण की भावना पर आधारित है। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), स्काउट-गाइड और नेहरू युवा कार्यक्रम जैसे संगठन युवाओं में अनुशासन, सेवा और नेतृत्व के गुण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने युवाओं से करियर निर्माण के साथ चरित्र निर्माण पर भी ध्यान देने, सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने में सहयोग करने और शिविर से लौटकर समाज के लिए सार्थक कार्य करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी: प्रो. आर. पी. दुबे

आरएनटीयू के कुलगुरु प्रो. आर. पी. दुबे ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और नैतिक मूल्यों से युक्त नागरिक तैयार करना भी है। संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी है। युवाओं को पढ़ाई के साथ भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों और नैतिक आदर्शों से जोड़ना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि के प्रति सम्मान का भाव विकसित करती है। यह प्रत्येक जीव के प्रति संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व का संदेश देती है। भारत की भौगोलिक एवं प्राकृतिक विविधता उसकी सांस्कृतिक समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझते हुए समाज के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाना चाहिए।

‘भारत की संतान’ कार्यक्रम में दिखी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता

राष्ट्रीय शांति, एकता एवं नेतृत्व शिविर के अंतर्गत गांधी भवन में आयोजित ‘भारत की संतान’ कार्यक्रम में भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल विभिन्न भाषाओं के माध्यम से देश की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के बावजूद भारतीयों की साझा पहचान और राष्ट्रीय भावना एक है।

शिविर की सांस्कृतिक संध्या में विभिन्न राज्यों की लोक परंपराओं और नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुतियां हुईं। असम के प्रतिभागियों ने बीहू, जबकि छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने पंथी नृत्य प्रस्तुत किया। उत्तर प्रदेश की टीम ने राधा-कृष्ण के प्रेम को नृत्य के माध्यम से मंच पर साकार किया। इन प्रस्तुतियों ने प्रतिभागियों को देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया और ‘विविधता में एकता’ के संदेश को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

श्रद्धांजलि सभा के साथ शिविर का समापन

एस. एन. सुब्बाराव की पांचवीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं समापन समारोह में उनके जीवन, विचारों और समाज सेवा में योगदान को स्मरण किया गया। कार्यक्रम में पुष्पांजलि, राज्यवार प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक गतिविधियां और प्रमाणपत्र वितरण जैसी गतिविधियां शामिल रहीं।

शिविर की दिनचर्या में सामूहिक जागरण, योग एवं शारीरिक व्यायाम, ध्वज वंदन, राष्ट्रगान, श्रमदान, परिसर की सफाई और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया। युवा नीति पर चर्चा, बौद्धिक सत्रों और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से प्रतिभागियों को सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनने तथा सेवा और नेतृत्व के मूल्यों को अपने व्यवहार में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में आरएनटीयू की प्रो-चांसलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, मुख्य अतिथि सांसद दर्शन सिंह चौधरी, आईपीएस अनुराधा शंकर, विधि विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नाईश ज़मीर, राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रेखा गुप्ता एवं डॉ. गब्बर सिंह, शिविर समन्वयक पंकज कुमार झाला, उप-समन्वयक दानिश खान, दानिश अशरफ, माक्शी ढाकोलिया, राखी कुलस्ते और अवनी रघुवंशी सहित अन्य गणमान्यजन एवं शिविरार्थी उपस्थित रहे।

शिविर का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि शिक्षा की वास्तविक सार्थकता ज्ञान के साथ संस्कार, संकल्प के साथ सेवा और व्यक्तिगत प्रगति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में है। प्रतिभागियों से एस. एन. सुब्बाराव के विचारों को आत्मसात करते हुए शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया।

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