आरएनटीयू में टैगोर कला-विज्ञान पर्व शुरू, विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट से दिखाई रचनात्मकता
गायन, नृत्य, रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिताओं के साथ विज्ञान परियोजनाओं को मिला मंच

भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू) में 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय टैगोर खेल-कला-विज्ञान पर्व आयोजित किया जा रहा है। इसमें विद्यार्थियों को कला, विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। टैगोर विज्ञान पर्व के अंतर्गत विद्यार्थियों ने अपने विज्ञान प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इन परियोजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक समझ, रचनात्मक सोच और नए विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला। प्रोजेक्ट प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों को अपने विचारों को व्यावहारिक रूप में समझाने और विज्ञान के प्रति रुचि प्रदर्शित करने का मंच दिया।
विज्ञान पर्व की थीम ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकिल’ यानी कम उपयोग, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण रखी गई है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विज्ञान परियोजनाओं और पर्यावरण आधारित गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को टिकाऊ जीवनशैली के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। टैगोर कला पर्व में एकल गायन, एकल वाद्य वादन, एकल नृत्य, समूह नृत्य, रंगोली और मेहंदी जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित कर रहे हैं। प्रो-चांसलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी वात्स ने कहा, “कला विद्यार्थियों की रचनात्मकता बढ़ाती है, जबकि विज्ञान नई संभावनाएं तलाशने की प्रेरणा देता है। ऐसे मंच विद्यार्थियों के विचारों को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।”कुलपति डॉ. आर.पी. दुबे ने कहा, “विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। प्रोजेक्ट प्रस्तुतियां उन्हें अपने ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करने के लिए प्रेरित करती हैं।”रजिस्ट्रार डॉ. संगीता जौहरी ने कहा, “ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और नए विचार सामने रखने का अवसर देते हैं। इससे उनमें रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।”तीन दिवसीय टैगोर खेल-कला-विज्ञान पर्व 24 अक्टूबर तक विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया जाएगा। इसमें खेल, कला और विज्ञान के माध्यम से विद्यार्थियों के बहुआयामी विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।



