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8 अक्टूबर से आयुष्मान भारत योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करेंगे अस्पताल संचालक

आईएमए के बैनर तले लगभग 1000 एम्बुलेंस के साथ दिल्ली कूच कर प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाएंगे मांगें

भोपाल, 4 अक्टूबर । आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों के समक्ष लंबे समय से चली आ रही गंभीर समस्याओं—लंबित भुगतान, क्लेम रिजेक्शन एवं कटौतियों, एन ए बी एच  की अनिवार्यता तथा विभिन्न तकनीकी एवं प्रक्रियागत विसंगतियों—को लेकर प्रदेश के चिकित्सा एवं अस्पताल संगठनों ने निर्णायक आंदोलन की घोषणा की है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. बी. एम. शरणागत ने घोषणा की कि यदि शासन द्वारा अस्पतालों की लंबित समस्याओं का उचित, व्यावहारिक एवं ठोस समाधान नहीं निकाला जाता है, तो 8 अक्टूबर 2026 से मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना का प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन बहिष्कार प्रारंभ किया जाएगा और यह समस्याओं के संतोषजनक समाधान तक जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि अस्पताल संगठन लंबे समय से संवाद, ज्ञापन, प्रतिनिधिमंडल और सांकेतिक विरोध के माध्यम से समाधान का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि समाधान नहीं निकलता है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए आईएमए के बैनर तले प्रदेशभर के अस्पताल संचालक लगभग 1000 एम्बुलेंस के साथ दिल्ली कूच करेंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक अपनी समस्याओं एवं मांगों को पहुंचाएंगे।

यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन , मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने भी 8 अक्टूबर से आयुष्मान भारत योजना के अनिश्चितकालीन प्रदेशव्यापी बहिष्कार का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदेश के अस्पताल लंबे समय से लंबित भुगतान तथा नीतिगत एवं प्रक्रियागत समस्याओं के व्यावहारिक समाधान की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अस्पताल संगठन इस संयुक्त आंदोलन में पूरी तरह एकजुट हैं और समस्याओं का संतोषजनक समाधान होने तक एकजुट रहेंगे।

IMA मध्यप्रदेश के पूर्व अध्यक्ष एवं National IMA Central Working Committee Member डॉ. पी. एस. चंदेल ने कहा कि आयुष्मान भारत एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है और चिकित्सा जगत इसकी मूल भावना के साथ खड़ा है। लेकिन किसी भी स्वास्थ्य योजना को सफलतापूर्वक चलाने के लिए उसमें सेवाएं देने वाले अस्पतालों की वास्तविक समस्याओं का समयबद्ध समाधान आवश्यक है। उन्होंने शासन से आग्रह किया कि 8 अक्टूबर से पूर्व चिकित्सा एवं अस्पताल संगठनों के साथ सार्थक संवाद कर ठोस समाधान निकाला जाए, ताकि आंदोलन की आवश्यकता ही न पड़े।

UPHDA मध्यप्रदेश के चेयरमैन डॉ. जीशान अहमद ने कहा, “मरीज का इलाज Cashless हो सकता है, लेकिन Costless नहीं। Pre-Authorisation के बाद वास्तविक उपचार किए जाने पर पात्र क्लेम का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित होना चाहिए। पुराने एवं वर्तमान पोर्टल के लंबित भुगतान और गलत तरीके से रिजेक्ट पात्र क्लेम का तत्काल निपटारा किया जाए।”

UPHDA मध्यप्रदेश के उपाध्यक्ष डॉ. धनंजय मिश्रा ने कहा, “हम quality और patient safety के मानकों के पूर्ण समर्थक हैं, लेकिन NABH को अनिवार्य करने के बजाय voluntary एवं incentive-based रखा जाना चाहिए। गुणवत्ता के मानक अस्पताल के आकार, संसाधनों एवं bed strength के अनुरूप व्यावहारिक होने चाहिए।”

संगठनों की प्रमुख मांग है कि पुराने एवं वर्तमान पोर्टल के सभी लंबित भुगतान, CPD स्तर पर अटके अथवा गलत तरीके से रिजेक्ट हुए पात्र क्लेम तथा अन्य बकाया राशि का समयबद्ध निपटारा किया जाए। भविष्य के भुगतान के लिए निश्चित अधिकतम समय-सीमा निर्धारित की जाए तथा विलंब की स्थिति में स्पष्ट जवाबदेही तय हो।

आयुष्मान व्यवस्था में Pre-Authorisation और अंतिम Claim Settlement को लेकर भी गंभीर सवाल उठाया गया है। अस्पतालों का कहना है कि जब निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत मरीज के इलाज से पहले diagnosis, proposed treatment एवं package के आधार पर pre-authorisation प्राप्त किया जाता है और उसके बाद अस्पताल अपने संसाधनों एवं खर्च पर मरीज का उपचार करता है, तो उपचार पूरा होने के बाद बिना किसी नई एवं ठोस विसंगति के legitimate claim को reject अथवा substantially deduct करने से अस्पतालों के लिए गंभीर आर्थिक अनिश्चितता पैदा होती है।

“यदि किसी treatment/package में कम राशि ही payable है, तो अस्पताल को इलाज शुरू होने से पहले स्पष्ट कर दिया जाए। मरीज का इलाज हो जाने के बाद अस्पताल अपने द्वारा खर्च की गई दवाइयां, ICU, ऑक्सीजन, जांच, implant, डॉक्टर एवं nursing services का खर्च वापस नहीं ले सकता।”

संगठनों ने NABH की अनिवार्यता समाप्त कर इसे voluntary एवं incentive-based व्यवस्था बनाए जाने की मांग दोहराई है। गुणवत्ता एवं patient safety के उचित मानकों का चिकित्सा जगत समर्थन करता है, लेकिन ये मानक अस्पताल के आकार, bed strength, infrastructure एवं उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप व्यावहारिक होने चाहिए।

इसके साथ ही TAT, authentication, documentation, trigger एवं अन्य procedural/technical कारणों से रिजेक्ट क्लेम के लिए पारदर्शी एवं व्यावहारिक समाधान की मांग की गई है। संगठनों ने स्पष्ट किया कि वास्तविक fraud के मामलों में कठोर कार्रवाई का पूरा समर्थन है, लेकिन जहां मरीज वास्तविक है, बीमारी वास्तविक है, admission वास्तविक है और treatment वास्तव में दिया गया है, वहां केवल प्रक्रियागत अथवा तकनीकी त्रुटि के कारण legitimate treatment cost को पूरी तरह अस्वीकार करना उचित नहीं है।

प्रत्येक claim rejection अथवा deduction का स्पष्ट लिखित कारण, योग्य चिकित्सकों द्वारा claim processing, प्रभावी एवं समयबद्ध appeal mechanism, package rates का वास्तविक चिकित्सा खर्च के अनुरूप पुनरीक्षण तथा pending/trigger cases के नियमित समाधान की भी मांग की गई है।

चिकित्सा एवं अस्पताल संगठनों ने शासन से आग्रह किया है कि 8 अक्टूबर से पूर्व प्रतिनिधियों के साथ सार्थक संवाद कर लंबित भुगतान, NABH की अनिवार्यता, CPD/rejected claims, TAT एवं authentication संबंधी मामलों तथा claim-processing की विसंगतियों पर ठोस एवं लिखित समाधान निकाला जाए।

संगठनों ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों की मांग किसी अनुचित लाभ की नहीं, बल्कि किए गए वास्तविक उपचार का समयबद्ध भुगतान और एक स्पष्ट, पारदर्शी एवं व्यावहारिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की है।

यदि 8 अक्टूबर तक प्रमुख मांगों पर संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो IMA मध्यप्रदेश के नेतृत्व एवं बैनर तले आयुष्मान भारत योजना का प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन बहिष्कार प्रारंभ होगा। इसके बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाते हुए प्रदेशभर के अस्पताल संचालक लगभग 1000 एम्बुलेंस के साथ दिल्ली कूच करेंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक अपनी मांगें पहुंचाएंगे।

“यह आंदोलन आयुष्मान भारत योजना को समाप्त करने के लिए नहीं, बल्कि इसे व्यावहारिक, पारदर्शी और टिकाऊ बनाने के लिए है। अस्पताल सुरक्षित और सक्षम रहेंगे, तभी गरीब मरीज को निर्बाध उपचार मिलता रहेगा।”

— इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), मध्यप्रदेश, यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन (UPHDA) एवं मध्यप्रदेश के चिकित्सा एवं अस्पताल संगठनों की ओर से

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