मध्य प्रदेश: वोकेशनल ट्रेनर्स के हक में DPI का सख्त रुख, 47 VTP कंपनियों को दीपावली से पहले वेतन भुगतान के आदेश; भुगतान न होने पर आंदोलन का अल्टीमेटम
भोपाल।मध्य प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत करीब 6,000 व्यावसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) के लंबित मानदेय को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने कड़ा रुख अपनाया है। नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ (NVETA) के जिला स्तरीय ज्ञापनों और निरंतर शिकायतों के बाद समग्र शिक्षा (सेकेंडरी एजुकेशन) राज्य परियोजना कार्यालय ने प्रदेश की सभी 47 वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोवाइडर (VTP) कंपनियों को दीपावली से पूर्व अनिवार्य रूप से मानदेय भुगतान के निर्देश जारी किए हैं।
ज्ञापन और शिकायतों के बाद हरकत में आया विभाग
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश सिंह परमार के नेतृत्व में जिला पदाधिकारियों द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालयों में सौंपे गए ज्ञापनों के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। जिलों से DEO और परियोजना अधिकारियों ने DPI के वरिष्ठ अधिकारियों को जमीनी हकीकत से अवगत कराया। इसके बाद अपर परियोजना संचालक नंदा भलावी कुशरे ने मामले की समीक्षा कर तत्काल आदेश जारी करने के निर्देश दिए।
आदेश क्रमांक 3518: त्योहार से पहले शत-प्रतिशत भुगतान अनिवार्य समग्र शिक्षा (सेकेंडरी एजुकेशन), लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश (क्रमांक 3518) में स्पष्ट उल्लेख है कि जिलों से मानदेय वितरण में देरी की लगातार शिकायतें आ रही हैं। आगामी दीपावली पर्व को देखते हुए सभी 47 अनुबंधित वीटीपी कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे अनुबंधित अवधि का पूरा बकाया मानदेय त्योहार से पहले प्रशिक्षकों के खातों में अंतरित करें। इस आदेश की प्रतिलिपि प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों, संयुक्त संचालकों और जिला परियोजना समन्वयकों (DPC) को सतत निगरानी के लिए प्रेषित की गई है।
महासंघ की चेतावनी: आदेश का पालन न हुआ तो आउटसोर्सिंग के खिलाफ बड़ा आंदोलन NVETA ने DPI के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे संघ की एकजुटता की पहली जीत बताया है। हालांकि, संगठन ने कड़े शब्दों में चेताया है कि यदि वीटीपी कंपनियों ने दीपावली पूर्व मानदेय का अंतरण नहीं किया, तो प्रदेश भर के व्यावसायिक प्रशिक्षक कार्य बहिष्कार और चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि यदि विभागीय आदेश की अवहेलना होती है, तो यह विभाग और आउटसोर्सिंग व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में आगामी आंदोलन केवल वेतन तक सीमित न रहकर आउटसोर्सिंग प्रथा की समाप्ति और मूलभूत सेवा शर्तों को लेकर आर-पार की लड़ाई के रूप में लड़ा जाएगा।


