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आदिवासी जननायकों के योगदान पर क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में राष्ट्रीय परिसंवाद हेतु 52 शोध पत्र प्राप्त, शोध-सार पुस्तिका का विमोचन*

भोपाल, 31 अक्टूबर। क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आरआईई), एनसीईआरटी, भोपाल के सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग द्वारा श्री झवेरचंद मेघानी लोकसाहित्य केंद्र, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय, राजकोट (गुजरात) के सहयोग से शनिवार को “स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी जननायकों का योगदान” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन देवी अहिल्याबाई होल्कर सभागार में किया गया।
संस्थान के प्राचार्य राष्ट्रीय एकता दिवस का उल्लेख करते हुए उन्होंने देश के एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद किया।

परिसंवाद के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता संस्थान के प्राचार्य प्रो. शिव कुमार गुप्ता ने की। बीज वक्ता के रुप में स्वराज संस्थान के उप संचालक प्रो.संतोष कुमार वर्मा व मुख्य अतिथि के रुप में झवेरचंद मेघानी लोकसाहित्य केंद्र के निदेशक श्री जे.एम.चद्रवाडिया ने सत्र को संबोधित किया। उद्घाटन सत्र में परिसंवाद के विषय का प्रवर्तन व स्वागत उद्बोधन समन्वयक डाॅ.सुरेश कुमार मकवाना और संचालन डाॅ.अरुणाभ सौरभ ने किया ने किया।

प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रद्युम्न सिंह लखावत ने किया। सत्र में गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के गुजराती विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश मकवाना तथा डॉ. सुभाष महिला महाविद्यालय, जूनागढ़ (गुजरात) के प्राचार्य डॉ. बलराम चावड़ा विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश मकवाना एवं श्री रूपेश कौशिक ने हरित पादप एवं अंगवस्त्रम भेंट कर विशेषज्ञों का सम्मान किया।
डॉ. मकवाना ने ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा के जीवन और संघर्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा ने ‘उलगुलान’ के माध्यम से अंग्रेजी शासन और शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध आदिवासियों को संगठित किया और अल्पायु में ही बलिदान देकर जनजातीय अस्मिता के प्रतीक बन गए। डॉ. बलराम चावड़ा ने गोविंद गुरु के योगदान की चर्चा करते हुए बताया कि उन्होंने ‘संप सभा’ और भगत आंदोलन के माध्यम से भील समाज में नशामुक्ति और सामाजिक जागरण का कार्य किया। 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ धाम पर एकत्र भीलों पर अंग्रेजी सेना ने गोलियां चलाईं, जिसमें सैकड़ों आदिवासी शहीद हुए। इसी कारण इस घटना को ‘आदिवासी जलियांवाला’ भी कहा जाता है।

 

तृतीय तकनीकी सत्र के तीन समानांतर सत्रों का संचालन प्रो.एन.सी.ओझा, प्रो. अश्वनी गर्ग, डाॅ.संजय पंडागले और संस्थान डाॅ.रुपेश कौशिक ने किया। इस अवसर पर संस्थान के डीन अकादमिक प्रो.जयदीप मंडल,संकाय सदस्य एवं संस्थान के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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