शिवलिंग पर चढाये गये जल एवं दूध का भक्षण करने वाला होता है पार्वती के कोप भाजन का शिकार:पं०सुशील


व्यक्ति का उदर विकारी होना सुनिश्चित)
श्री शिव शक्ति धाम सिद्धाश्रम स्थान निपानिया जाट जिला भोपाल के पीठाचार्य पं०सुशील महाराज ने जानकारी देते हुये बताया है।कि 22जुलाई 2024 से श्री शिव शक्ति धाम में श्री शिव महापुराण कथा के साथ ही शिवलिंग पार्थिव पूजन का कार्यक्रम भी पूरे श्रावणमास आयोजित किया जायेगा । पं0 सुशील महाराज ने कार्यक्रम को सफल वनाने के लिये दिनांक-12-7-2024 को आयोजित बैठक में श्रद्धालुओं को सचेत करते हुए बताया है,कि कोई भी श्रृद्धालु शिवलिंग पार्थिव पूजा में शिवलिंग पर चढाये गये दूध और जल का भक्षण नहीं करेगा।अगर उस सामग्री में से प्रसाद रुप भक्षण करना ही है । तो सामग्री अधिक लेकर जायें।शिवलिंग पर सामग्री चढाते समय उसमें कुछ समग्री एवं लोटे में थोडा जल बचा लें।उसे प्रसाद रुप में भक्षण करना उचित होता है।
श्री महाराज ने कहा कि कुछ ज्ञानी लोग गंगाजल की तुलना शिवलिंग पर चढाये गये जल से करते हुये कहते हैं कि मां गंगा का स्थान भोले शिव के शरीर में है।उन्हें शिवपुराण खोलकर सच्चाई ज्ञात करना चाहिए । मां गंगा का स्थान भोले शिव की जटाओं में है।शिवलिंग पर नहीं है ।मां गंगा भोले शंकर की जटा से निकली है ।शिवलिंग की जलहरी से नहीं निकली है। इसलिये यह नहीं बोलना चाहिए कि जो व्यक्ति शिवलिंग पर चढे चल को पियेगा।वही गंगाजल पीने का अधिकारी है।शिवलिंग पर चढाये गये जल एवं दूध आदि सामग्री पर मात्र मां पार्वती,सती,एवं मां गौरा का अधिकार होता है। जो ब्यक्ति इनके अधिकार का हनन करता है ।वह मां पार्वती के कोप भाजन का शिकार वनता है।
जो व्यक्ति शिवलिंग पर चढाये गये जल एवं दूध का भक्षण करेगा।उसके पेट में पथरी का होना एवं पथरी जनित रोगों का होना तय होता है। शिवलिंग पर चढाये गये जल एवं दूध व अन्य सामग्री का जो ब्यक्ति भक्षण करता है।उसका उदर विकारी होना सुनिश्चित होता है। क्योंकि शिव वीर्य को पुराण में रेत की संज्ञा दी गई है । और रेत से पथरी का निर्माण होता है।
प्रमाण हेतु श्रीशिव महापुराण के अध्याय 2 रुद्रसंहिता के श्लोक 6 से 67 तक का अध्यन करें।और प्रमाण स्वयं देखें कि जब अग्नि देवता ने कबूतर बनकर शिव विर्य को भक्षण किया था।तव पार्वती ने क्या श्राप दिया था। देवताओं का क्या हाल हुआ था। सभि देवताओं के पेट में गर्भ ठहर गया था।सभि देवता परेशान हो गये थे।तब भोले शिव ने वमन द्वारा उनकि परेशानि को दूर करवाया था। अग्नि देवता ने सप्त ऋषि कि छ: पत्नियां माघ माह मे तापने आई।तो अग्नि देवता ने अपने पेट का गर्भ अग्नि के माध्यम से उनके पेट में पहुंचा दिया।उन्होने हिमालय पर्वत पर गर्भ छोड दिया।हिमालय पर्वत ने गंगा में गर्भ गिरा दिया।मां गंगा जी उस बेग को सहन नहिं कर पाई।तो उन्होने सतकुण्डो में उस गर्भ को पहुंचा दिया।तब कार्तिकेय का जन्म हुआ।शिवलिंग पर चढे जल का यदि मनुष्य भक्षण करेगा ।तो मनुष्य का क्या हाल होगा।स्वयं निर्णय करें।
(पं०सुशील महाराज)
श्री शिव शक्ति धाम सिद्धाश्रम

