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शक्ति ही ब्रह्म का अनुभव कराती है – श्री एम

शक्ति को समर्पित रही आचार्य शंकर न्यास की 70वीं व्याख्यानमाला, भारत भवन में पद्म भूषण श्रीएम ने विचार व्यक्त किए

*शक्ति को समर्पित रही आचार्य शंकर न्यास की 70वीं व्याख्यानमाला, भारत भवन में पद्म भूषण श्रीएम ने विचार व्यक्त किए।*

*अद्वैत वेदांत में शक्ति को समर्पित रही आचार्य शंकर न्यास की 70वीं व्याख्यानमाला, भारत भवन में प्रखर वेदांती पद्म भूषण श्री एम ने अद्वैत वेदांत मत प्रस्तुत किया।*

*आचार्य शंकर न्यास द्वारा एकात्म पर्व का आयोजन, शक्ति एवं अद्वैत वेदांत विषय पर पद्म भूषण श्री एम ने रखे विचार, शहर के प्रबुद्धजन व वेदांतप्रेमी सम्मिलित हुए*

*ब्रह्म अनुभूति का विषय है जो केवल शक्ति के माध्यम से ही अनुभव किया जा सकता है – श्री एम*

*शक्ति एवं अद्वैत वेदांत विषय पर पद्म भूषण श्री एम ने रखे विचार, शंकर विरचित शक्ति स्तोत्रों पर माध्वी ने मंत्रमुग्ध किया भारत भवन सभागार*
*आचार्य शंकर न्यास द्वारा दो दिवसीय एकात्म पर्व का आयोजन*

*आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा दो-दिवसीय एकात्म पर्व का आयोजन, पहले दिन शक्ति एवं अद्वैत वेदांत विषय पर पद्म भूषण श्री एम ने रखे विचार, आज शाम 6 बजे भारत भवन एकात्म संवाद*

*पद्म भूषण श्री एम के संबोधन से शक्ति अराधना में रत हुआ भारत भवन सभागार, आद्यशंकराचार्य कृत शंकर स्तोत्रों पर प्रदर्शनी भी सजाई गई*

भोपाल। आद्यशंकराचार्य द्वारा प्रकाशित वेदांत के अद्वैत दर्शन के अनुरूप समाज को एकात्म मार्ग पर अग्रसर कराने व अद्वैत वेदांत के लोकव्यापीकरण के लिए मध्यप्रदेश के आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा समय-समय पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में शनिवार को न्यास द्वारा भोपाल के भारत भवन में दो दिवसीय एकात्म पर्व का शुभारंभ किया गया। वेदांत में शक्ति की अवधारणा पर केन्द्रित इस आयोजन का प्रखर वेदांत वेत्ता, द सत्संग फाउंडेशन के संस्थापक, पद्म भूषण श्री एम ने शंकरदूतों द्वारा स्वरित मंगलाचरण के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर विधिपूर्वक शुभारंभ किया। जिसके उपरांत उन्होंने ‘शक्ति एवं अद्वैत वेदांत’ विषय पर प्रबोधन देते हुए अद्वैत वेदांत में शक्ति की मान्यता, अस्तित्व और भूमिका पर प्रकाश डाला। मध्यप्रदेश के आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा निरंतर आयोजित शंकर व्याख्यानमाला की लोकप्रियता के चलते शनिवार को भारत भवन सभागार प्रदेश भर के वेदांत प्रेमियों से भरा रहा। आयोजन में आचार्य शंकर कृत शक्ति स्तोत्रों पर शास्त्रीय संगीत की प्रसिद्ध गायिका माध्वी मधुकर झा के संगीततमय सुरों ने सभागार को शक्ति अराधना में सराबोर कर दिया।

ज्ञात हो कि वेदांत के गूढ़ रहस्यों को जन सामान्य तक सरल स्वरूप में पहुंचाने के उद्देश्य से न्यास द्वारा विगत 5 वर्षों से निरंतर प्रतिमाह शंकर व्याख्यानमाला का आयोजन कराया जाता है। जिसमें भारत के विभिन्न प्रख्यात वेदांत मनीषी आद्यशंकराचार्य द्वारा रचित ग्रंथों के प्रसंगों पर प्रबोधन देते हैं। न्यास द्वारा 69 व्याख्यानमालाएं पूर्ण हो चुकी है जिसके तारतम्य में 70वीं व्याख्यानमाला को विशेष स्वरूप प्रदान करते हुए एकात्म पर्व के रूप में आयोजित किया गया। शंकर व्याख्यानमाला के इस 70वें संस्करण को शक्ति को समर्पित किया गया जिसमें ‘शक्ति एवं अद्वैत वेदांत’ विषय पर पद्म भूषण श्री एम ने संबोधित किया। आयोजन के दौरान भारत भवन के मुख्य सभागार द्वार पर आद्यशंकराचार्य द्वारा विरचित शक्ति स्तोत्रों पर बनाई गई पेंटिग्स की चित्र प्रदर्शनी भी सजाई गई, जिसे श्री एम ने अवलोकन कर लोकार्पित किया।

*शक्ति ही ब्रह्म का अनुभव कराती है – श्री एम*
शक्ति और अद्वैत वेदांत पर संबोधित करते हुए श्री एम ने कहा कि – मैं सौभाग्यशाली हूँ कि जिस भूमि में आद्यशंकराचार्य जी का जन्म हुआ मैं भी उसी भूमि से आता हूँ। शंकर जब अपनी जन्मभूमि से निकले और पूरे राष्ट्र का भ्रमण किया तो उस समय का एक विचार आता है कि शंकर ने किस भाषा में लोगों से संवाद किया था। तब ध्यान में आता है कि वह भाषा हिन्दी तो नहीं थी, वह संस्कृत थी। जिस भाषा में शंकराचार्य ने पूरे देश को जोड़ा उस संस्कृत भाषा को राष्ट्रभाषा बनाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि मैं केवल अनुभव के आधार पर बात करने आया हूँ। मैं कभी कोई संस्कृत विद्यालय नहीं गया लेकिन वेदों का जो भी ज्ञानार्जन मैंने किया है वह मेरे गुरु महेश्वरनाथ बाबा जी से प्राप्त हुआ है। वह कभी अपने साथ कोई ग्रंथ नहीं रखते थे उन्हें सभी वेदवाणी कंठस्थ थीं। ब्रह्म अनुभूति का विषय है जो केवल शक्ति के माध्यम से ही अनुभव किया जा सकता है। शक्ति के आभाव में परब्रह्म को अनुभूत नहीं किया जा सकता है। इसलिए शक्ति और ब्रह्म अलग नहीं हैं वह एक ही हैं। हमारा अज्ञान उसे भिन्न देखता है। जिस प्रकार अग्नि और गर्मी अलग नहीं है। दोनों एक हैं लेकिन हम अपने अविवेक के कारण दोनों को अलग समझ बैठते हैं। उसी तरह परब्रह्म और माया अर्थात शक्ति एक ही हैं, वह अलग नहीं हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अगर भवानी संबंध बना रहेगा तभी ब्रह्म की प्राप्त होगी। शक्ति के बारे में ऋग्वेद से लेकर उपनिषदों में भी उल्लेख मिलता है। वह ब्रह्म का ही अविभाज्य रूप हैं। शक्ति ही अद्वैत वेदांत का आधार है। जिसे सौंदर्यलहरी लिखकर स्वयं शंकर ने उल्लेखित किया है। जब सब शांत होता है तब शक्ति प्रकट होती है। जब मन ‘चित्त वृत्ति निरोधः’ हो जाएगा तब ही वह शक्ति प्राप्त होगी जो परब्रह्म का एहसास कराएगी।

उन्होंने आगे कहा कि – जब भी हम अद्वैत वेदांत की बात करते हैं तो सबसे पहले भगवन आद्यशंकराचार्य जी का स्मरण ही आता है क्योंकि उन्होंने अद्वैत वेदांत की व्याख्या को सरलीकृत रूप में भाष्यीकृत किया है। अद्वैत वेदांत का मूल वाक्य है “ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या” अर्थात केवल ब्रह्म ही सत्य है, जगत जो हम देखते हैं वह सत्य नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि – वेदांत अध्ययन के लिए केनोपनिषद अत्यंत आवश्यक उपनिषद है, वह सामवेद से लिया गया है। सामवेद महिमा को स्वयं श्रीकृष्ण ने गीता में उल्लेखित करते हुए कहा है कि वेदों में मैं सामवेद हूँ। संसार में जितना भी संगीत है वह सामवेद से ही आया है। सामवेद की व्याख्या केनोपनिषद में है। और जब इस केनोपनिषद को पढ़ेंगे तो ज्ञात होता है कि उसके प्रारंभ में ही शक्ति की व्याख्या है। उसमें प्रारंभ में ही पूछा गया है कि वह क्या है जिससे सब सक्रिय होता है। मन, बुद्धि और प्राण का प्रथम चलन किसके माध्यम से होता है। तब वहां शक्ति की महिमा सामने आती है।

*शंकर की गुरुभूमि को एकात्म का वैश्विक केन्द्र बना रहे हैं – शिवशेखर शुक्ला*

मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने पद्म भूषण श्री एम जी का अभिनंदन करते हुए कहा कि – यह अत्यंत सौभाग्य पूर्ण अवसर है, जब हमें श्री एम जी का सानिध्य प्राप्त हुआ है। आज जो यह अवसर उपस्थित हुआ है, इसका हम पूरा लाभ लेंगे। श्री शुक्ला ने ओंकारेश्वर में बन रहे एकात्म धाम की संकल्पना की व्याख्या करते हुए कहा कि – आगामी पीढ़ी को अद्वैत की आलौकिक धारा से जोड़ने के लिए ओंकारेश्वर में अद्वैत महालोक का निर्माण किया जा रहा है। जिस भूमि पर आचार्य शंकर ने गुरु का सानिध्य पाया उसे एकात्म के वैश्विक केन्द्र के रूप में विकसित कर रहे हैं।

*देवी स्तोत्रों से गूंजा भारत भवन का अंतरंग सभागार*
दीप प्रज्ज्वलन द्वारा एकात्म पर्व के शुभारंभ उपरांत शास्त्रीय संगीत की लोकप्रिय गायिका माधवी मधुकर झा ने आद्यशंकराचार्य कृत शक्ति स्तोत्रों की संगीतमय प्रस्तुति दी। अपनी प्रस्तुति में माध्वी ने शक्ति स्तुति हेतु शंकर विरचित आनंद लहरी, भवानी आष्टक, गौरी दशकम, सौंदर्य लहरी, महिषासुरमर्दिनि आदि स्तोत्रों का गायन किया। शक्ति स्तोत्रों पर माध्वी की प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित हर वेदांत प्रेमी को मोह लिया। माध्वी की आवाज में जब सौंदर्यलहरी की लहर बही तो हर श्रोता शंकरमय होकर शक्ति स्तुति में डूब गया।

*चित्रों पर उकेरे सौंदर्यलहरी के स्तोत्र, शक्ति प्रदर्शनी सजायी*
शंकर न्यास के एकात्म पर्व में भारत भवन सभागार के मुख्य द्वार पर “शक्ति” प्रदर्शनी भी सजायी गई, जिसका श्री एम ने आयोजन के पूर्व शुभारंभ कर अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में आचार्य शंकर प्रवर्तित अद्वैत वेदान्त दर्शन में शक्ति का क्या स्थान है इस विषय पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही आचार्य शंकर प्रणीत शक्ति तत्त्व पर आधारित स्तोत्र सौन्दर्यलहरी पर चित्र भी प्रदर्शित किये गए हैं। मैसूर, कर्णाटक के गंजिफा शैली के प्रसिद्ध चित्रकार श्री रघुपति भट्ट द्वारा बनाये गये 25 चित्रों को सौन्दर्यलहरी के श्लोक और अर्थ सहित प्रदर्शनी में सजाया गया है।

*एकात्म पर्व में आज होगा एकात्म संवाद*
द्वि-दिवसीय एकात्म पर्व के दूसरे दिन शंकर न्यास द्वारा भारत भवन में ‘एकात्म संवाद’ का आयोजन किया जाएगा। आयोजन में टेलीविजन के प्रख्यात अभिनेता, चर्चित वेदांती नितीश भारद्वाज एवं पद्म भूषण श्री एम के मध्य अद्वैत वेदांत की विभिन्न जिज्ञासाओं को लेकर संवाद किया जाएगा। संवाद में चयनित श्रोताओं को आमंत्रित किया गया है। साथ ही संवाद को न्यास के यूट्यूब चैनल पर भी लाइव चलाया जाएगा जहां अन्य लोग भी श्रवण लाभ ले पाएंगे। एकात्म संवाद सायं 06 बजे प्रारंभ होगा।

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