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प्रदेश की सबसे पुरानी संस्था कलामन्दिर का 75 वां वार्षिक अमृत महोत्सव एवं अलंकरण समारोह गरिमामय, भव्यता के साथ संपन्न।

साहित्य, संगीत एवं कला को समर्पित मध्य प्रदेश की अग्रणी एवं राष्ट्रीय संस्था अखिल भारतीय कला मंदिर भोपाल जिसकी स्थापना दिनांक 11 अक्टूबर 1951 को हुई थी, अपने 75 वर्ष पूर्ण करने पर दिनांक 18 जनवरी, 2026 रविवार को मानस भवन भोपाल में एक भव्य अमृत महोत्सव तथा वर्ष 2024-25 का अलंकरण/ सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद एवं मानस भवन के वर्तमान अध्यक्ष श्री रघुनन्दन शर्मा जी कार्यक्रम अध्यक्ष, भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सुरेश पचौरी जी मुख्य अतिथि, तथा विधायक श्री भगवान दास सबनानी जी, परशुराम कल्याण बोर्ड अध्यक्ष श्री विष्णु राजौरिया जी व मध्य प्रदेश निराला सृजन पीठ निदेशक डा.साधना बलवटे जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मंच पर कला मंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष श्री हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’ भी उपस्थित रहे।
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. गौरीशंकर शर्मा ‘गौरीश’ ने सभी मंचासीन अतिथियों और सभागार में उपस्थित लोगों का अपने सम्बोधन के माध्यम से स्वागत किया। अपने सम्बोधन में डा.’गौरीश’ जी ने कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों के उपस्थिति को गौरवमय निरूपित करते हुए, संस्था की विकास यात्रा प्रकाश डालते हुए, नगर निगम भोपाल के द्वारा आवंटित साहित्यकार पार्क में विधायक निधि से किये जाने वाले विकास पर जानकारी से अवगत कराया।
अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ डा. राजकुमारी शर्मा ने सस्वर सरस्वती वन्दना, श्रीमती दुर्गा सिंह ने शिवस्त्रोत का सस्वर सांगीतिक पाठ किया। कु. श्रीजिता साहा का आदिशक्ति नृत्य एवं अन्य कलाकारों द्वारा श्री गणेश स्तुति नृत्य, सामूहिक नृत्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये।
वर्ष 2024-25 के अलंकरण समारोह कार्यक्रम के अन्तर्गत साहित्य शिखर सम्मान से श्री घनश्याम सक्सेना को, शास्त्रीय संगीत शिखर सम्मान से डा. श्रुति जौहरी को एवं नाट्य कला साधक सम्मान से श्री मनोज रावत को अलंकृत किया गया। अमृत सम्मान सुप्रसिद्ध संगीतकार श्री उल्हास तैलंग को एवं वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व अध्यक्ष कलामन्दिर श्री राजेन्द्र शर्मा ‘अक्षर’ को प्रदान किया। अखिल भारतीय सम्मान – श्रीमती सुरेखा सरोदे (इंदौर), श्रीमती भारती जैन दिव्यांशी (मुरैना), तथा श्रीमती लता मुंशी को प्रदान किया गया। इस अलंकरण समारोह में अन्य 20 साहित्यकारों को उनके द्वारा रचित कृतियों पर भी विभिन्न पुरस्कार प्रदान किया गये। श्री कमल किशोर दुबे को साहित्य कला रत्न सम्मान(व्यंग्य), श्रीमती मृदुल त्यागी को साहित्य कला रत्न (लघुकथा) सम्मान, श्रीमती सुषमा श्रीवास्तव को साहित्य कला रत्न (पद्य) सम्मान, श्री प्रभात पाण्डेय को साहित्य कला रत्न (गद्य) सम्मान, डा. किशन तिवारी को साहित्य कला रत्न (पद्य) सम्मान, श्रीमती मनीषा आवले को साहित्य कला रत्न (गद्य) सम्मान, श्री प्रेमचन्द गुप्ता को साहित्य कला रत्न (पद्य) सम्मान, डा.साधना शुक्ला को साहित्य कला रत्न (गद्य) सम्मान, श्री मनीष श्रीवास्तव ‘बादल’ को साहित्य कला रत्न (पद्य) सम्मान, डा.संजय सक्सेना को साहित्य कला रत्न (पद्य) सम्मान, श्री दिनेश मालवीय ‘अश्क’ को साहित्य कला रत्न (गद्य) सम्मान, श्री श्रीराम माहेश्वरी को साहित्य कला रत्न (गद्य) सम्मान, श्री विनय सप्रे को चित्रांकन कला रत्न सम्मान श्री अम्बरीष गंगराडे को संगीत कला रत्न (वाद्य) सम्मान से अलंकृत किया गया। अखिल भारतीय कला मंदिर (प्रथम कृति) सम्मान श्री कैलाश मेश्राम, श्रीमती सरोज दवे ‘सवि’ और श्रीमती सुधा दुबे को प्रदान किया गया। अखिल भारतीय कला मंदिर प्रादेशिक लोकभाषा सम्मान डा.राज गोस्वामी को प्रदान किया गया। संस्था द्वारा संस्था के पूर्व अध्यक्ष डॉ रामवल्लभ आचार्य, श्री श्यामबिहारी सक्सेना का भी स्वागत स्मृति चिन्ह देकर किया गया। अमृत महोत्सव वर्ष में वर्तमान कार्यकारणी डॉ गौरीशंकर शर्मा ‘गौरीश’ राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’ कार्यकारी अध्यक्ष, डॉ. वन्दना मिश्र एवं श्री रामबाबू शर्मा उपाध्यक्ष, श्री व्ही. के श्रीवास्तव महासचिव आदि सभी समिति पदाधिकारीगण एवं सदस्यों का सम्मान भी स्मृति चिन्ह देकर किया गया।
इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों ने सभागार में उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित किया। श्री सुरेश पचौरी ने अपने सम्बोधन में पुरस्कृत साहित्यकारों को बधाई देते हुए ऐसे आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। श्री रघुनन्दन शर्मा जी ने सम्बोधित करते हुए पुरस्कार प्राप्त साहित्यकारों को व कलामंदिर के सभी सदस्यों को बधाई दिया और साहित्यकारों के सृजन कार्य को महान निरूपित किया। विधायक श्री भगवान दास सबनानी ने साहित्यकार पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि सकारात्मक भाव में किए गए कार्य में सफलता प्राप्त होती ही है। डा. साधना बलवटे ने अपने संक्षिप्त सम्बोधन में कलामंदिर को अमृत महोत्सव आयोजन पर बधाई दिया और कला के अधिष्ठाता देव भगवान शिव को स्मरण करते हुए कहा कि कला और साहित्य समाज के लिए कल्याणकारी और आनन्ददायक होना चाहिए। श्री विष्णु राजौरिया ने गुरु स्तुति पाठ करते हुए, गौरीश जी के कार्य व प्रयासों के साथ अपने उद्गार में सभी सम्मानित साहित्यकारों, कलाप्रेमी जनों की सृजनात्मकता की भूरि भूरि प्रशंसा किया।
इस अवसर पर डा. गौरीशंकर शर्मा ‘गौरीश’ जी का शतायु कामना के साथ स्मृति चिन्ह पुष्पहार शॉल श्रीफल, स्वस्ति वाचन सहित सम्मान किया। कार्यक्रमों का लालित्यपूर्ण संचालन श्री विमल भण्डारी जी ने और सभी के प्रति आभार श्री रामबाबू शर्मा ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम में श्री महेश सक्सेना, गोकुल सोनी, सहित अनेकों साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दी।

 

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