

अमेरिका द्वारा जारी संशोधित इंडिया-यूएस ट्रेड फ्रेमवर्क फैक्टशीट पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बदलाव 7 फरवरी 2026 के संयुक्त वक्तव्य के अनुरूप हैं। इसके साथ ही प्रवक्ता ने बताया प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा 18 से 22 फरवरी 2026 तक भारत के राजकीय दौरे पर रहेंगे। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। अमेरिका द्वारा जारी संशोधित इंडिया-यूएस ट्रेड फ्रेमवर्क फैक्टशीट पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अमेरिकी दस्तावेज में किए गए बदलाव दोनों देशों के बीच बनी साझा समझ के अनुरूप हैं।उन्होंने बताया कि 7 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका ने पारस्परिक तथा परस्पर लाभकारी व्यापार के लिए एक अंतरिम समझौते के ढांचे पर संयुक्त वक्तव्य जारी किया था। यही संयुक्त वक्तव्य इस पूरी प्रक्रिया का आधार है और दोनों पक्षों की आपसी सहमति को दर्शाता है। प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिकी फैक्टशीट में जो संशोधन किए गए हैं, वे उसी संयुक्त वक्तव्य में शामिल बिंदुओं और सहमतियों को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने दोहराया कि दोनों देश अब इस तय ढांचे को लागू करने और अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।बांग्लादेश चुनाव पर MEA का बयान
बांग्लादेश में चुनावों को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले चुनाव के परिणामों का इंतजार करना चाहिए ताकि स्पष्ट हो सके कि जनता का जनादेश किस प्रकार का आया है, उसके बाद ही संबंधित मुद्दों पर आगे विचार किया जाएगा। रणधीर जायसवाल ने आगे कहा जहां तक चुनाव की प्रक्रिया का सवाल है, हमारा रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है। हम बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और भरोसेमंद चुनाव के पक्ष में हैं। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को महत्व देता है और दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों के आधार पर स्थिति की निगरानी जारी रखेगा। बांग्लादेश की ओर से भारत को चुनाव पर्यवेक्षक भेजने के निमंत्रण के सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि हमें बांग्लादेश से पर्यवेक्षक भेजने का निमंत्रण मिला था। हालांकि, अब तक हमने बांग्लादेश के चुनावों की निगरानी के लिए किसी भी पर्यवेक्षक को नहीं भेजा है



