अखिल भारतीय पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के आह्वान पर मध्यप्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ द्वारा आज शक्ति भवन गेट के समक्ष विद्युत विभागों में किये जा रहे निजीकरण का विरोध एवं विद्युत कर्मियों की लंबित मांगों के निराकरण हेतु व्यापक धरना-प्रदर्शन किया गया तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।



मुख्यालय पर प्रदर्शन में जबलपुर के निकटतम क्षेत्रों सहित हजारों की संख्या में अभियंता एवं विद्युत कर्मी शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए संघ के महासचिव श्री विकास कुमार शुक्ला ने बताया कि यह एकदिवसीय विरोध प्रदर्शन; वितरण, उत्पादन एवं ट्रांसमिशन (TBCB के माध्यम से) कंपनियों में निजीकरण की प्रक्रिया को समाप्त किये जाने हेतु किय गया है । संघ का ऊद्देश्य इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को निरस्त करने, ट्रांसमिशन कंपनी में निजीकरण की प्रक्रिया बंद करने तथा मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को सतपुरा ताप विद्युत गृह में 13 न. नवीन इकाई की स्थापना हेतु अनुमति प्रदान करने की मांग को लेकर आयोजित किया गया है। साथ ही विद्युत अभियंताओं/कार्मिकों की अन्य लंबित मांगों के निराकरण हेतु मांग की गई।
अभियंता संघ के अध्यक्ष श्री हितेश तिवारी ने कहा कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण गरीब उपभोक्ताओं, छोटे एवं मध्यम उद्योगों, किसानों तथा आम जनता के हितों के प्रतिकूल है। अतः केंद्र सरकार को इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही वेस्टर्न रीजन पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन श्री मनोज तिवारी ने विद्युत् कार्मिकों को निजीकरण के प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी देते हुए सभी विद्युत् कार्मिकों को संगठित रहने एवं संघ की आगामी कार्य योजना अनुसार व्यापक आन्दोलन हेतु तैयार रहने का आह्वान किया ।
विदित हो कि ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन श्री शैलेन्द्र दुबे जी ने जानकारी दी कि आज देशभर के राज्यों से लाखों विद्युत कार्मिकों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संसद के बजट सत्र में उक्त संशोधन विधेयक पारित करने का प्रयास किया गया, तो देश के लगभग 27 लाख विद्युत कार्मिक बिना अतिरिक्त नोटिस के ‘लाइटनिंग स्ट्राइक’ पर जाने को बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।
आज मुख्यालय सहित समस्त मध्यप्रदेश में क्षेत्रीय एवं जिला स्तर पर हजारों अभियंताओं एवं विद्युत कर्मियों ने निजीकरण के विरुद्ध अपना सशक्त विरोध दर्ज कराया है।



