भारतीय विरासत और आधुनिक विज्ञान का संगम बनेगा नया कोर्स
भारतीय ज्ञान परंपरा को वैज्ञानिक दृष्टि से पढ़ाने की अनूठी पहल


एनआईटीटीटीआर भोपाल ने डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद अपने यहाँ बहुत से एकेडेमिक प्रोग्राम स्टार्ट किये हैं। संस्थान आगामी शैक्षणिक सत्र से एक बिशिष्ट प्रोग्राम BSMS(बैचलर ऑफ़ साइंस एंड मास्टर ऑफ़ साइंस ) स्टार्ट करने जा रहा हे जो भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित होगा। इस दिशा में संस्थान इस क्षेत्र के सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर अपनी कार्ययोजना को अंतिम रूप दे रहा हे। देशभर में भारतीय ज्ञान परम्परा का BSMS कोर्स पहला होगा। इस कोर्स का संचालन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार होगा।
संस्थान के निदेशक प्रो. सी.सी. त्रिपाठी ने बताया कि एनआईटीटीटीआर के छात्र केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल और इस क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के साथ कार्य कर करने का अवसर मिलेगा। धर्म, दर्शन, विज्ञान, वास्तु, ज्योतिष, खगोल, स्थापत्य कला, नृत्य कला, संगीत कला, आदि सभी तरह के ज्ञान का जन्म भारत में हुआ है इसके हजारों प्रमाण हैं | कला, विज्ञान, गणित और ऐसे अनगिनित क्षेत्र हैं जिनमे भारतीय योगदान अनुपम है | आधुनिक युग के ऐसे बहुत से अविष्कार हैं, जो भारतीय शोधों के निष्कर्षों पर आधारित हैं | हमारे देश के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को यह जानकारी होनी। यह कोर्स जॉब ओरिएंटेड होगा स्टूडेंट्स को भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध आयामों ,भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परम्पराओं के साथ साथ ज्ञान परम्परा की विरासत के संरक्षण की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी पर अध्ययन एवं फील्ड बेस्ड प्रोजेक्ट्स पर कार्य करने का अवसर प्रदान किया जायेगा। संस्थान के डीन साइंस एवं भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पी.के. पुरोहित ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा का बड़ा हिस्सा वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है, जो आज भी आधुनिक विज्ञान में उपयोगी है।भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना जरूरी है, ताकि यह आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान के साथ सामंजस्य स्थापित कर सके। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण सुझाव आये जैसे की इस कोर्स का संचालन उन संस्थानों के साथ मिल कर किया जाये जो भारतीय ज्ञान परम्परा का पालन करते हैं, जिनमे रामकृष्ण मिशन, आयुर्वेदिक संस्थान, धरोहर, कला के केंद्र,योग संस्थान, संस्कृतिक केंद्र आदि। प्राचीन काल के इतिहास, हिंदू शिक्षा,अन्य धर्म शिक्षा आदि विषय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। विज्ञान में स्नातक डिग्री होने के कारण विभिन्न विषयों पर प्रयोगशाला का प्रावधान होना चाहिए। इस महत्वपूर्ण बैठक में डॉ मधुकरभाई पडवी, डॉ सच्चिदानंदा मिश्रा ,श्री आशुतोष भटनागर, संदीप कुमार सिंह, स्वामी नरसीमांनद,प्रो अजय जैन ,डॉ अमरानंद रेड्डी, अंकुर जोशी,विकास सिंह ,डॉ रामेन्द्र सिंह ,डॉ अमित दुबे सहित कई अन्य विशेसज्ञ शामिल थे।


