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बीएमसी की हार के बाद राज ठाकरे बदलेंगे पाला? डिप्टी सीएम शिंदे से की मुलाकात; मुंबई में बढ़ी हलचल

मुंबई में मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। यह बैठक मुंबई नगर निकाय चुनाव के बाद पहली बार है, जिससे राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने बुधवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके आधिकारिक निवास नंदनवन में मुलाकात की। यह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने बातचीत थी। जिसमें दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई।

शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के एक सूत्र ने कहा कि दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। राज ठाकरे ने नंदनवन में शिंदे से मुलाकात के दौरान बंगले में किए गए सुधारों की सराहना की और मुंबई के पुराने विरासत भवनों की फोटो फ्रेम्स का ध्यानपूर्वक अवलोकन किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात का परिदृश्य केवल शिष्टाचार भेंट से कहीं आगे है, क्योंकि दोनों दल महाराष्ट्र के राजनीतिगत समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे पहले मनसे के कुछ कॉर्पोरेटर्स ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन भी दिया था, जिसका असर बीएमसी चुनाव परिणामों पर देखा गया था।

पिछले महीने शिंदे की तारीफ भी की थी
गौरतलब है कि मनसे ने कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में शिंदे की शिवसेना का समर्थन किया था। शिंदे ने पिछले महीने राज ठाकरे की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने व्यक्तिगत लाभ को कभी नहीं देखा और हमेशा व्यापक दृष्टिकोण से निर्णय लिए। उन्होंने कहा राज ठाकरे ने पीएम मोदी का भी समर्थन किया और विधानसभा चुनावों में भी हमारा साथ दिया। राज ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं को महत्व देते हैं।

20 साल बाद साथ आए थे ठाकरे बंधु
राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने 15 जनवरी को संपन्न बीएमसी चुनावों में चचेरे भाई उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के साथ गठबंधन किया था। लगभग दो दशक बाद ठाकरे बंधु एकसाथ आए थे।यह मुलाकात राजनीतिक रूप से खास थी, लेकिन चुनाव के नतीजों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लंबे समय तक ठाकरे परिवार के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना का बीएमसी पर लगभग तीन दशक का वर्चस्व इस बार समाप्त हो गया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नगर निगम पर कब्जा कर लिया। बीएमसी चुनावों में शिवसेना (UBT) ने 65 सीटें जीतीं, जबकि मनसे सिर्फ 6 सीटों पर सीमित रही। चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 89 सीटों पर जीत दर्ज की। गठबंधन सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटें जीतीं।

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