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अर्बन डेवलपमेंट आधारित वक्तव्य | क्रेडाई भोपाल | मप्रबजट2026

ईज़ ऑफ लिविंग से आगे, अब “ईज़ ऑफ अर्निंग” का रोडमैप ज़रूरी — मनोज मीक, क्रेडाई

क्रेडाई भोपाल मप्र बजट 2026-27 में शहरी विकास और इंफ्रा पर बढ़े फोकस का स्वागत करता है। बजट में अर्बन डेवलपमेंट के लिए ₹21,562 करोड़ का प्रावधान जो पिछले वर्ष के ₹18,639 करोड़ के मुकाबले लगभग 16% अधिक है
यह एक सकारात्मक संकेत है क्योंकि यही सेक्टर शहरों में नौकरी, निवेश, कनेक्टिविटी और हाउसिंग सप्लाई की रीढ़ है।
लेकिन अब प्राथमिकता “डिलिवरी” है। पीआरएस के अनुसार मध्यप्रदेश में शहरी विकास पर खर्च का हिस्सा कुल व्यय के मुकाबले 2.7% रहा है, जबकि सभी राज्यों का औसत 3.4% के आसपास है यह अंतर बताता है कि शहरों की क्षमता और एग्जीक्यूशन दोनों को तेज़ करना जरूरी है। पीआरएस ने यह भी संकेत किया है कि पिछले वर्षों में हाउसिंग सेक्टर में बजट इरादे के मुकाबले परिणामों में उतार-चढ़ाव रहा है; इसलिए इस वर्ष मूल्यांकन आउटकम-आधारित इम्प्लीमेंटेशन से होना चाहिए।
भोपाल मेट्रोपॉलिटन कैपिटल रीजन के लिए 3 ठोस मांगें:
1.ट्रंक इंफ्रा की टाइम-बाउंड पाइपलाइन: पानी, सीवर, ड्रेनेज वार्ड व जोन-वार टारगेट, टेंडर कैलेंडर, और 12–24 महीनों के आउटपुट माइलस्टोन।
2.रीडेवलपमेंट मिशन: राजधानी क्षेत्र में रोड-रीडिज़ाइन, पार्किंग, मल्टी-यूटिलिटी डक्ट, और मिश्रित उपयोग के साथ कैपिटल रिडेवलपमेंट पैकेज।
3.सर्विस्ड लैंड और तेज अप्रूवल: डेवलपमेंट के लिए सर्विस्ड प्लॉट, स्पष्ट नियम, ऑनलाइन मंजूरी की तय समय-सीमा ताकि होल्डिंग कॉस्ट घटे और घर खरीदार को राहत मिले।
प्रगतिशील राज्यों से सीख:
कई राज्य शहरी निवेश को “प्रोजेक्ट + रिफॉर्म” मॉडल से जोड़ रहे हैं म्युनिसिपल फाइनेंस, ट्रांजिट-लिंक्ड डेवलपमेंट, और शहर-स्तर पर जवाबदेह डिलिवरी के जरिए। मप्र को भी इसी दिशा में शहरों की क्षमता को ग्रोथ-इंजन बनाना होगा।
भोपाल जैसे शांत राजधानी क्षेत्र के लिए अगला कदम “ईज़ ऑफ लिविंग” को “ईज़ ऑफ अर्निंग” में बदलना है। समयबद्ध विकास योजनाएं लागू करके मोबिलिटी, ट्रंक सेवाएं, रिडेवलपमेंट और प्रेडिक्टेबल अप्रूवल मिलकर निवेश और रोजगार पर काम करना होगा।

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