खबरबिज़नेस

भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), अहमदाबाद में भव्य हेन्डलूम फैशन शो और इंडस्ट्री राउंड टेबल मीट का हुआ आयोजन

20 फरवरी 2026: भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), अहमदाबाद ने एचएसबीसी के सहयोग से 19 फरवरी 2026 को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक अपने परिसर में हैंड मेड इन इंडिया पहल के तहत एक भव्य हेन्डलूम कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रमुख लोग, विशेषज्ञ, संस्थानों के प्रतिनिधि, डिजाइनर और कारीगर शामिल हुए। सभी ने मिलकर भारत की समृद्ध हेन्डलूम परंपरा का उत्सव मनाया और इस क्षेत्र को आगे विकसित करने पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘भारत के हेन्डलूम क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करना और ब्रांड को मजबूत बनाना’ विषय पर आयोजित इंडस्ट्री राउंड टेबल मीट था. इस बैठक में उद्योग, शिक्षा जगत, सरकार और जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर विचार साझा किए और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। चर्चा का मुख्य उद्देश्य था कि उत्पादों की गुणवत्ता कैसे सुधारी जाए, हेन्डलूम को मजबूत पहचान कैसे मिले, बाजार में उसकी स्थिति कैसे बेहतर हो और ऐसा टिकाऊ तंत्र कैसे बनाया जाए जिससे कारीगरों की आजीविका लंबे समय तक सुरक्षित और स्थिर रह सके।
कार्यक्रम में हैंड मेड इन इंडिया पहल के तहत ‘थ्रेड्स ऑफ हेरिटेज’ नाम से एक हेन्डलूम फैशन शो भी आयोजित किया गया। इस फैशन शो के माध्यम से दिखाया गया कि कैसे हेन्डलूम की परंपरा समय के साथ आगे बढ़ते हुए आज के आधुनिक रूप में दिखाई दे रही है। इसमें भुज (गुजरात) और इरोड (तमिलनाडु) के बुनकरों द्वारा तैयार किए गए पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ परिधान प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम को दो भागों में प्रस्तुत किया गया — ‘हेरिटेज ह्यूज़: हैंडलूम रिवाइवल’ और ‘हैंडलूम: द ओरिजिनल सस्टेनेबल फैशन’। इन प्रस्तुतियों में पारंपरिक बुनाई की तकनीकें, प्राकृतिक रंग, पर्यावरण के अनुकूल सामग्री और आधुनिक डिज़ाइन दिखाए गए। इससे यह संदेश दिया गया कि हमारी पारंपरिक कला आज के बाजार की जरूरतों के अनुसार लगातार बदल और बेहतर बन रही है।
इस अवसर पर एचएसबीसी आईबीयू के सीईओ एवं प्रमुख श्री आशीष त्रिपाठी ने कहा, “हम ईडीआईआई के साथ इस महत्वपूर्ण परियोजना में जुड़कर बेहद प्रसन्न हैं। यह पहल हेन्डलूम क्षेत्र की बिखरी और असंगठित व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि इसकी मूल क्षमताओं को निखारा जा सके और उनका सही उपयोग हो सके। हमें यह देखकर खुशी है कि कारीगरों ने बेहतर कार्य पद्धतियाँ सीखी हैं और अपने व्यवसाय को प्रोफिट मेकिंग एवं विकासोन्मुख उद्यम के रूम में विकसित करना शुरू किया है।”
इस पहल पर अपनी बात रखते हुए महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला ने कहा, “हम उद्यमिता विकास पद्धतियों के माध्यम से कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हैंड मेड इन इंडिया परियोजना के माध्यम से हम देशभर के हेन्डलूम समुदायों के साथ मिलकर उनके कौशल को निखारने, टिकाऊ कार्य पद्दति को अपनाने और बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने पर काम कर रहे हैं। आज का फैशन शो इन्हीं प्रयासों की झलक पेश करेगा एवं पारंपरिक हेन्डलूम किस तरह आधुनिक जीवनशैली के साथ कदम मिला सकता है और साथ ही कारीगरों की स्थायी आजीविका को भी सहारा दे सकता है। अब समय आ गया है कि भुज और इरोड के हमारे कारीगरों की बेहतरीन कला को देशभर के लोग पहचानें और उसकी सराहना करें।”
अपने विचार व्यक्त करते हुए, डॉ. रमन गुजराल, परियोजना निदेशक, हैंडमेड इन इंडिया और निदेशक, सीएसआर साझेदारी विभाग ने कहा, “भारत का हेन्डलूम केवल कपड़ा बनाने तक सीमित नहीं है — यह हमारी परंपरा, हमारी पहचान और लाखों कारीगर परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। साथ ही हम यह भी जानते हैं कि आज का बाजार तेजी से बदल रहा है और गुणवत्ता, एकरूपता तथा पहचान के प्रति लोगों की अपेक्षाएँ पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। हैंड मेड इन इंडिया परियोजना ने इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया है और बाजार, उत्पाद तथा कारीगरों के बीच की दूरी को कम करने का काम किया है।”
इस पहल का उद्देश्य कारीगर समुदायों की स्थायी आजीविका को बढ़ावा देना, पारंपरिक ज्ञान को सहेजकर रखना और उन्हें बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ना है। साथ ही, इसका उद्देश्य आज की अर्थव्यवस्था में हेन्डलूम की अहम भूमिका को और स्पष्ट करना भी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button