इंदौर में दूषित पेयजल से भागीरथपुरा में हुई मौतों पर उठाये गंभीर सवाल , वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए-जयवर्द्धन सिंह
भोपाल- पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने इंदौर में दूषित पेयजल से भागीरथपुरा में हुई मौतों को अत्यंत गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण और पूरे प्रदेश के लिए शर्मनाक घटना बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, पारदर्शिता और शासन की जवाबदेही, भ्रष्टाचार एवं निर्दोर्षों की हत्या है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इस घटना ने प्रदेश की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर इंदौर की स्वच्छता सर्वेक्षण, रैंकिग जो लगातार 8वीं वार के सम्मान को धूमिल किया है, वह अत्यंत चिंताजनक है। जब पूरे देश में इस घटना को लेकर चर्चा हो रही है, तब प्रदेष भाजपा सरकार का तथ्य छिपाना या स्पष्ट जानकारी देने से बचना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जवाबदेही की भावना के विरुद्ध है।
जयवर्द्धन सिंह ने बताया कि इस घटना की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस के सभी विधायकों ने सदन में स्थगन प्रस्ताव लाकर इस लोक महत्व के विषय पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की थी, ताकि सच्चाई सामने आए, जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय हो और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से सभी जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर तक नहीं दिया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।
दूषित पेयजल जल को लेकर नगर निगम इंदौर को 45970 षिकायतें प्राप्त होने की बात को भी सरकार ने स्वीकार किया है। जहां एक ओर दूषित पेयजल समस्या जमीनी स्तर पर स्थानीय लोगों का जीवन लीला समाप्त कर रही है वहीं दूसरी ओर षिकायतों का निराकरण ऑनलाईन पोर्टल पर किया गया, कोई एकल नस्ती संधारित नहीं करना इस बात का प्रमाण है कि इंदौर के नागरिक कितने प्रताड़ित है ?
उन्होंने अपने तारांकित प्रश्न क्रमांक 1625 के लिखित उत्तर का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार ने आधिकारिक रूप से केवल 20 मौतें स्वीकार की हैं, जबकि उसी उत्तर के परिशिष्ट-दिनांक 06.02.2026 की “क्मंजी ।नकपज – ।दंसलजपबंस त्मचवतज” – में कुल 32 मृतकों के नाम दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि एक ही सरकारी दस्तावेज़ में दो अलग-अलग आंकड़े होना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह भी है।
जयवर्द्धन सिंह ने आरोप लगाया है कि यदि 32 लोगों की मृत्यु हुई है, तो केवल 20 परिवारों को ही आर्थिक सहायता क्यों प्रदान की गई ? वह भी मात्र 2 लाख रुपये, जबकि ऐसी परिस्थितियों में 4 लाख रुपये की सहायता का स्पष्ट प्रावधान है। शेष परिवारों को अब तक कोई सहायता न मिलना पीड़ितों के साथ अमानवीय व्यवहार है और प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह केवल राहत राशि या सरकारी प्रक्रिया का विषय नहीं है, बल्कि मानव जीवन की गरिमा और न्याय की मूल भावना से जुड़ा प्रश्न है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके साथ समान व्यवहार और न्यायपूर्ण सहायता सुनिश्चित करना सरकार का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है।
जयवर्द्धन सिंह ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि- क्यों वास्तविक आंकड़े छिपाए जा रहे हैं ? क्यों राहत वितरण में भेदभाव किया गया ? क्यों जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का प्रयास हो रहा है?
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर संदेह उत्पन्न कर दिया है। यदि समय रहते सत्य सामने नहीं लाया गया, तो जनता का विश्वास शासन व्यवस्था से पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
जयवर्द्धन सिंह की प्रमुख मांगें –
1. मृतकों की वास्तविक और अंतिम संख्या तत्काल सार्वजनिक की जाए।
2. सभी पीड़ित परिवारों को समान रूप से पूर्ण और निर्धारित मुआवजा प्रदान किया जाए।
3. राहत वितरण एवं आंकड़ों में विसंगतियों की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए।
4. लापरवाही या जिम्मेदारी तय होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध हत्या का प्रकरण पंजीबद्व करते हुये कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
5. इस पूरे प्रकरण पर विधानसभा में विस्तृत, पारदर्शी और तथ्यात्मक चर्चा सुनिश्चित की जाए।
जयवर्द्धन सिंह ने कहा कि यह मामला केवल आंकड़ों का अंतर नहीं, बल्कि न्याय, संवेदनशील शासन और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न है। जनता सब देख रही है और सत्य को दबाया नहीं जा सकता।
जयवर्द्धन सिंह ने स्पष्ट कहा कि दोषियों की जवाबदेही तय होना ही न्याय की पहली शर्त है और जब तक पीड़ित परिवारों को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, तब तक इस मुद्दे पर लड़ाई निरंतर जारी रहेंगी।


