राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान समारोह–2026 ’24, 25, 26 फरवरी 2026 को आयोजित होगा राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान मृदुला गर्ग, जितेन्द्र भाटिया एवं अलका सरावगी समेत देश के 8 अग्रणी साहित्यकार विभिन्न श्रेणियों में वनमाली कथा सम्मान से होंगे सम्मानित




सुप्रतिष्ठित कथाकार, शिक्षाविद् तथा विचारक जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली जी’ के रचनात्मक योगदान और स्मृति को समर्पित संस्थान ‘वनमाली सृजन पीठ’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ कवि- कथाकार श्री संतोष चौबे ने शनिवार को कला एवं संस्कृति के पत्रकारों से रूबरू होते हुए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मानों के बारे में बताया कि इस बार 8 अलग-अलग श्रेणियों में रचनाकारों को वनमाली कथा सम्मानों से अलंकृत किया जायेगा। इस अवसर पर कार्यक्रम में उनके साथ वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजिका ज्योति रघुवंशी, वरिष्ठ सहित्यकार बलराम गुमास्ता और मुकेश वर्मा एवं टैगोर विश्व कला केंद्र के निदेशक विनय उपाध्याय प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
‘विश्व रंग’ के अंतर्गत वनमाली सृजन पीठ, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय एवं आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा दिनांक 24, 25 एवं 26 फरवरी 2026 को स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के सुरम्य परिसरों में आयोजित तीन दिवसीय ‘वनमाली कथा सम्मान समारोह’ में सभी चयनित रचनाकारों को सम्मानित किया जायेगा। यह सम्मान समारोह ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ उड़िया कथाकार प्रतिभा राय के मुख्य आतिथ्य में आयोजित होगा। सम्मान समारोह का शुभारंभ सुप्रसिद्ध लोकगायक पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपाणिया के कबीर गायन से होगा।
सम्मानित रचनाकार हैं
‘वनमाली कथाशीर्ष सम्मान’ से सुप्रसिद्ध रचनाकार मृदुला गर्ग को एवं ‘राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान’ से वरिष्ठ कथाकार अलका सरावगी को सम्मानित किया जायेगा।
दोनों ही रचनाकारों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं एक-एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर अलंकृत किया जायेगा।
उल्लेखनीय हैं कि वनमाली सृजन पीठ ने सम्मानों की श्रृंखला में इस बार से कथा अनुवाद को प्रमुखता से सम्मिलित किया है। कथा अनुवाद को वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान दिलाने हेतु पहला ‘वनमाली कथा अनुवाद सम्मान’ वरिष्ठ साहित्यकार, अनुवादक जितेन्द्र भाटिया को प्रदान किया जाएगा। ‘वनमाली कथा आलोचना सम्मान’ महेश दर्पण को, ‘वनमाली कथा मध्यप्रदेश सम्मान’ वरिष्ठ कथाकार उर्मिला शिरीष (भोपाल) को, ‘वनमाली युवा कथा सम्मान’ युवा कथाकार कुणाल सिंह को, वनमाली कथेतर सम्मान’ अयोध्या के यतीन्द्र मिश्र को प्रदान किये जाएँगे। साहित्य के क्षेत्र में डिजिटल माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान के लिए पहला ‘वनमाली डिजिटल साहित्य अवदान सम्मान’ अंजूम शर्मा को प्रदान किया जायेगा। इन सभी सम्मानित रचनाकारों को शॉल-श्रीफल प्रशस्ति पत्र एवं इक्यावन-इक्यावन हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर अलंकृत किया जाएगा।
वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ कवि कथाकार श्री संतोष चौबे ने जानकारी देते हुए कहा कि ‘विश्व रंग’ के अंतर्गत वनमाली सृजन पीठ द्वारा प्रदान किए जाने वाले ‘वनमाली कथा सम्मान’ समकालीन कथा परिदृश्य में लोकतान्त्रिक एवं मानवीय मूल्यों की तलाश में जुटे कथा साहित्य की पुनःप्रतिष्ठा करने एवं उसे समुचित सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित द्विवार्षिक पुरस्कार है। अब तक वनमाली कथा सम्मान से भारत के सुप्रतिष्ठित रचनाकारों में शुमार ममता कालिया, चित्र मुद्गल, शशांक, स्वयं प्रकाश, अखिलेश, असगर वजाहत, उदय प्रकाश, मैत्रेयी पुष्पा, प्रभु जोशी, प्रियंवद, गीतांजलि श्री, मनोज रूपड़ा आदि रचनाकारों को अलंकृत किया जा चुका है।
‘वनमाली कथा’ पत्रिका एवं ‘वनमाली वार्ता’ का होगा लोकार्पण
नई सदी की नई रचनाशीलता को सम्यक एवं समुचित स्थान देने के उद्देश्य से प्रारम्भ की गई लोकतान्त्रिक मूल्यों की समावेशी पत्रिका ‘वनमाली कथा’ ने अपने प्रवेशांक से ही साहित्य जगत में रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई है। पत्रिका का फरवरी अंक भी वनमाली कथा सम्मान समारोह में लोकार्पित किया जायेगा। इस अवसर पर वनमाली सृजन पीठ के मुखपत्र ‘वनमाली वार्ता’ का लोकार्पण भी किया जाएगा।
साहित्य पर विमर्श : आयोजित होंगे विशेष सत्र
तीन दिवसीय वनमाली कथा सम्मान समारोह के अवसर पर सम्मानित रचनाकारों के ‘रचना पाठ’ के साथ–साथ ‘डिजिटल युग में शास्त्रीय संगीत–रियाज से रील तक’, ‘डिजिटल युग में साहित्य– पाठक परिवर्तन और नयी प्रासंगिकताएँ’, ‘समकालीन युवा कहानी की संवेदनाएँ और सामाजिक परिदृश्य’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श के विशेष सत्र आयोजित किये जाएँगे।
रचनात्मक विचार–विमर्श के शिल्पी
राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान के अवसर पर आयोजित होने वाले सत्रों में प्रतिभा राय, मृदुला गर्ग, जितेंद्र भाटिया, अलका सरावगी, महेश दर्पण, उर्मिला शिरीष, मुकेश वर्मा, संतोष चौबे, लीलाधर मंडलोई, गीताश्री, यतींद्र मिश्र, कुणाल सिंह, अंजुम शर्मा, अरुणेश शुक्ल, संजय शेफ़र्ड, कैफी हाशमी आदि की रचनात्मक भागीदारी होगी। सम्मान समारोह एवं विभिन्न सत्रों का संचालन विनय उपाध्याय, संगीता पाठक, विकास अवस्थी एवं विक्रांत भट्ट द्वारा किया जाएगा। सम्मान समारोह का संयोजन वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजक ज्योति रघुवंशी द्वारा किया जाएगा।
कहानी का मंचन एवं रंग संगीत
वनमाली कथा सम्मान के अवसर पर 25 फरवरी को शाम 4:00 बजे शारदा सभागार, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में श्री संतोष चौबे की कहानी ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ का नाट्य मंचन वरिष्ठ नाट्य निर्देशक संजय मेहता के निर्देशन में किया जायेगा। इस अवसर पर टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा रंग-संगीत की सांगीतिक प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी।
राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान–2026 से सम्मानित होने वाले रचनाकारों का परिचय
मृदुला गर्ग
जन्म–25 अक्टूबर 1938 (कलकत्ता)
प्रकाशित कृतियाँ– कहानी संग्रह– 8 कहानी संग्रहों की सम्पूर्ण कहानियाँ “संगति-विसंगति” नाम से दो खण्डों में प्रकाशित। 86 कहानियाँ, “सम्पूर्ण कहानियाँ” नाम से प्रकाशित। दस प्रतिनिधि कहानियाँ, यादगार कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ तथा नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा संकलित कहानियाँ पुस्तक प्रकाशित। उपन्यास- उसके हिस्से की धूप, वंशज, चित्तकोबरा, अनित्य, मैं और मैं, कठगुलाब, मिलजुल मन, वसु का कुटुम, द लास्ट ईमेल। संस्मरण, नाटक, निबन्ध, यात्रा वृतान्त, आलोचना, साक्षात्कार, व्यंग्य की कई पुस्तकें प्रकाशित। आपके कई उपन्यासों और कहानियों का देश–विदेश की कई भाषाओं में अनुवाद।
सम्मान – हैलमनहैमट ग्रान्ट, ह्यूमन राईट्स वॉच,न्यू यॉर्क, व्यास सम्मान, साहित्य अकादमी पुरस्कार, राम मनोहर लोहिया सम्मान (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान), लाइफटाइम अवॉर्ड, (टाइम्स आफ इंडिया) साहित्यकार सम्मान , हिन्दी अकादेमी दिल्ली, साहित्य भूषण उत्तर (प्रदेश हिन्दी संस्थान), महाराज वीरसिंह पुरस्कार (मध्यप्रदेश साहित्य परिषद), सेठ गोविन्द दास पुरस्कार।
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जितेन्द्र भाटिया
जन्म : 1946, (राजस्थान)
शिक्षा–स्कूली शिक्षा के बाद की पूरी पढ़ाई आईआईटी बॉम्बे से की। केमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी।
प्रकाशित कृतियाँ– उपन्यास– ‘समय सीमान्त’, ‘प्रत्यक्षदर्शी’, ‘जुस्तजू-ए-निहां उर्फ़ रूणियाबास की अन्तर्कथा’। कहानी संग्रह– ‘रक्तजीवी’, ‘शहादतनामा’, ‘सिद्धार्थ का लौटना’, ‘यहां से शहर को देखो’, ‘अगले अँधेरे तक’। नाटक– ‘जंगल में खुलने वाली खिड़की’, ‘रास्ते बन्द हैं’। वे एक प्रमुख स्तंभकार भी रहे हैं। अनुवाद– उन्होंने विश्व साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाओं का हिंदी में अनुवाद किया है, और ‘सोचो साथ क्या जाएगा’ नामक स्तंभ के माध्यम से पाठकों को विश्व साहित्य से जोड़ा है। उनकी रचनाओं का भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
सम्मान– ‘प्रत्यक्षदर्शी’ पुस्तक के मराठी अनुवाद को 1997 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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अलका सरावगी
जन्म: 17 नवंबर 1960 कलकत्ता। कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी में पीएचडी।
प्रकाशित कृतियाँ – कहानी संग्रह– कहानी की तलाश में, दूसरी कहानी। उपन्यास–कलिकथा वाया बाइपास’, शेष कादंबरी, कोई बात नहीं, एक ब्रेक के बाद, जानकीदास तेजपाल मैन्शन, एक सच्ची झूठी गाथा, कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए, गांधी और सरलादेवी: बारह अध्याय, कलकत्ता कॉस्मोपॉलिटन: दिल और दरारें। अनुवाद : तेरह हलफ़नामे (विभिन्न भारतीय भाषाओं की लेखिकाओं द्वारा रचित कहानियों का अनुवाद)। आपकी कई रचनाओं और पुस्तकों का भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में अनुवाद।
सम्मान – साहित्य अकादमी पुरस्कार, कलिंगा लिटफ़ेस्ट का ‘बुक ऑफ़ द ईयर अवार्ड’, वैली ऑफ़ वर्ड्ज़, (देहरादून), अंतरराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा पुरस्कार, केके बिरला फ़ाउंडेशन का बिहारी सम्मान, इटली की सरकार द्वारा ‘ऑर्डर ऑफ़ द स्टार ऑफ़ इटली- कैवेलियर’ सम्मान। दयावती देवी मोदी स्त्री-शक्ति सम्मान, फ़क़ीर मोहन सेनापति सम्मान।
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महेश दर्पण
जन्म – 1 जुलाई 1956, धर्मशाला (हिमाचल) में। नव्यतं कहानी संग्रह ‘पड़ाव’ सहित अब तक दस कहानी संग्रह प्रकाशित। लघुकथा संग्रह: मिट्टी की औलाद, हमारा समय, बेमिसाल लघुकथाएँ।उपन्यास: ‘दृश्य-अदृश्य’। आलोचना: ‘रचना परिवेश’, ‘कहानी: नई पुरानी’, ‘हिंदी कहानी का विकास’, ‘ वनमाली: एक कृती व्यक्तित्व’ सहित यात्रावृत्त, साक्षात्कार, जीवनी बाल साहित्य की दस पुस्तकों का लेखन। कथेतर साहित्य की बीस पुस्तकों का संपादन एवं लेखन। विशेष– कहानी : ‘छल’ पर इसी नाम से फिल्म। मास्को विश्वविद्यालय सहित अनेक स्तरों पर रचनाएँ पाठयक्रमों में सम्मिलित।
सम्मान एवम पुरस्कार– राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त गणेशशंकर विद्यार्थी सम्मान, पूश्किन सम्मान, हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान एवं कृति सम्मान, स्पंदन आलोचना सम्मान, नई धारा रचना सम्मान, पीपुल्स विक्ट्री अवार्ड, सुभाष चंद्र बोस सम्मान, राजेंद्र यादव सम्मान, दीपशिखा सम्मान सहित अनेक सम्मान एवम पुरस्कार।
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उर्मिला शिरीष
जन्म : 19 अप्रैल 1959, शिक्षा–एम.ए.,पीएच.डी., डी.लीट्।
प्रकाशित कृतियाँ– कहानी संग्रह– मैं उन्हें नहीं जानती, नानी की डायरी, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, ऐ देश पता तुझे हुआ क्या है, नाचगान, उर्मिला शिरीष की लोकप्रिय कहानियाँ, बिवाईयाँ तथा अन्य कहानियाँ, दीवार के पीछे, मेरी प्रिय कथाएँ, ग्यारह लंबी कहानियाँ, कुर्की और अन्य कहानियाँ, लकीर तथा अन्य कहानियाँ, पुनरागमन, निर्वासन, रंगमंच, शहर में अकेली लड़की, सहमा हुआ कल, केंचुली, मुआवजा, वे कौन थे। उपन्यास– खैरियत है हुजूर, चाँद गवाह, ‘कोई एक सपना’ सहित जीवनी, साक्षात्कार, आलोचना, कहानी संकलन की काई पुस्तकों का लेखन-संपादन। आपकी कई कहानियों तथा उपन्यासों का कई भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेजी में अनुवाद।
सम्मान– मध्यप्रदेश शासन संस्कृत विभाग का राज्य शिखर सम्मान, अखिल भारतीय मुक्तिबोध पुरस्कार, वागीश्वरी पुरस्कार, कमलेश्वर कथा सम्मान, कृष्ण प्रताप कथा सम्मान, विजय वर्मा कथा सम्मान, निर्मल पुरस्कार, भारत सरकार की सीनियर फैलोशिप, धर्मपाल फैलोशिप, कुसुमांजलि फाउंडेशन फैलोशिप। केंद्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की जनरल काउंसिल की सदस्य।
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तीन्द्र मिश्र
जन्म : यतीन्द्र मिश्र का जन्म सन् 12 मई 1977 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ।
प्रकाशित कृतियाँ – कविता-संग्रह ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएँ’, ‘यदा-कदा’, ‘ड्योढ़ी पर आलाप’।शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत साधना पर एक ‘गिरिजा’ नामक पुस्तक का लेखन। रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि कवि द्विजदेव की ग्रंथावली का सह-संपादन। कुँवर नारायण पर आधारित दो पुस्तकों और ‘स्पिक मैके’ के लिए संपादन। प्रदर्शनकारी कलाओं पर लिखित निबंधों की किताब ‘विस्मय का बखान’ तथा कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिंदी में पुनर्लेखन ‘भैरवी’ नाम से प्रकाशित। फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं एवं गीतों के चयन क्रमशः ‘यार जुलाहे’ तथा ‘मीलों से दिन’ नाम से संपादन।
सम्मान–लता मंगेशकर पर ‘लता सुर गाथा’ पुस्तक के लिए 64वाँ राष्ट्रीय पुरस्कार।
भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार
कुणाल सिंह
जन्म- 22 फरवरी 1980 को कोलकाता के समीपवर्ती गाँव में हुआ।
शिक्षा – प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता से हिंदी साहित्य में एम.ए. और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से एम.फिल.।
प्रकाशित कृतियाँ– ‘सनातन बाबू का दाम्पत्य’, ‘इतवार नहीं’, ‘अन्य कहानियाँ तथा झूठ’, (कहानी संग्रह); ‘आदिग्राम उपाख्यान’, ‘उत्तरजीवी (उपन्यास); ‘रोमियो जूलियट और अँधेरा’ (लघु उपन्यास)। सभी महत्वपूर्ण भारतीय भाषाओं के साथ-साथ इतावली और जर्मन में उनकी कहानियों के अनुवाद। ‘आखेटक’ कहानी पर फिल्म निर्मित और ‘साइकिल कहानी’ के कई नाट्य–मंचन।
सम्मान – ‘रवींद्र कालिया कथा सम्मान’, ‘साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार’, ‘विजय मोहन सिंह स्मृति युवा कथा सम्मान’, ‘भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार’, भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार’, ‘कथा अवार्ड’, ‘कृष्ण बलदेव वैद फैलोशिप’, पश्चिम बंग राज्य युवा पुरस्कार और ‘नागार्जुन सम्मान’ से सम्मानित।
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अंजुम शर्मा
जन्म – 28अगस्त 1989, अलीगढ़ उत्तर प्रदेश।
शिक्षा– दिल्ली विश्वविद्यालय से सोशल मीडिया से जुड़े विषय पर पीएच.डी.।
कवि, संपादक और पत्रकार अंजुम शर्मा हिंदवी की चर्चित साहित्यिक वार्ता-शृंखला ‘संगत’ के लिए ख्यात हैं, जिसमें उन्होंने देश के प्रतिष्ठित 100 हिंदी लेखकों के साथ गहन संवाद किए और एक ऐसा आर्काइव तैयार किया जो दुर्लभ है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में अतिथि प्राध्यापक रहे अंजुम शर्मा इंडिया टुडे (हिंदी) के डिप्टी एडिटर है और साहित्य से जुड़े विषयों पर डिजिटली सक्रिय हैं। वे आकाशवाणी, दूरदर्शन, बीबीसी हिंदी, आज तक रेडियो से भी संबद्ध रहे हैं जहाँ वे साहित्यिक कार्यक्रमों को जगह देते रहे हैं।
उनकी कविताएँ और लेख प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।
सम्मान– शब्द शिल्पी सम्मान (झारखंड), स्पंदन युवा पुरस्कार (भोपाल, म.प्र.)।


