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2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्किलिंग और वित्तीय समावेशन की केंद्रीय भूमिका होगी : गौतम टेटवाल

समर्थ भारत कॉन्क्लेव के दूसरे दिन कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल के उद्गार

भोपाल। एआई-आधारित कौशल विकास और वित्तीय समावेशन के जरिए भारत को सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता पर जोर देते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक, स्किलिंग और वित्तीय पहुंच का समन्वय ही समावेशी विकास की कुंजी है। यह विचार भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में आयोजित 5वें समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के दूसरे दिन उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए गए। ‘रीइमेजिनिंग इम्पैक्ट: एआई-ड्रिवन स्किलिंग, फाइनेंशियल इंक्लूजन एवं सोशल एंटरप्राइज फॉर विकसित भारत’ थीम पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में बैंकिंग, उद्योग और कॉमन सर्विस प्रोवाइडर्स से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि – आदरणीय श्री गौतम टेटवाल, माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं रोजगार, मप्र शासन, श्री संतोष चौबे, चेयरमैन एवं संस्थापक, आईसेक्ट इंडिया, विशिष्ट अतिथि – श्रीमति सी. सरस्वति, चीफ जनरल मैनेजर, नाबार्ड, दीपक कुमार लल्ला, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस, डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, कार्यकारी उपाध्यक्ष, आईसेक्ट इंडिया, डॉ. सितेश कुमार सिन्हा, कुलसचिव, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी, अनुराग गुप्ता, डायरेक्टर, आईसेक्ट उपस्थित रहे

मुख्य अतिथि, मध्यप्रदेश शासन के कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि आईसेक्ट समूह ने वित्तीय समावेशन के माध्यम से शासकीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्किलिंग और वित्तीय समावेशन की केंद्रीय भूमिका होगी। उन्होंने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य तेजी से हो रहा है।
आईसेक्ट के एग्जीक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि संस्था पिछले 40 वर्षों से शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक अवसर पहुंचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि आईसेक्ट अब “आईसेक्ट इंडिया” के रूप में पैन इंडिया नेटवर्क के साथ अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और जर्मनी तक अपनी पहुंच बना चुका है। उन्होंने कहा कि सीएसआर साझेदारियों के जरिए सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को और सशक्त किया जा रहा है।
आईसेक्ट समूह के चेयरमैन एवं फाउंडर संतोष चौबे ने कहा कि संस्था का व्यापक नेटवर्क देशभर में कार्यरत है और उसकी प्राथमिकता समाज के अंतिम वर्ग तक पहुंचना है। उन्होंने कहा कि तकनीक और शिक्षा के समन्वय से ही वास्तविक सामाजिक परिवर्तन संभव है। उन्होंने बताया कि एआई-आधारित स्किलिंग न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाती है, बल्कि उद्यमिता को भी नई दिशा देती है। साथ ही महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक सी. सरस्वती ने कहा कि देश में वित्तीय समावेशन एक नए चरण में पहुंच चुका है, जहां अब गुणवत्ता, स्थिरता और प्रभाव पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना समय की मांग है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक कुमार लल्ला ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन के चलते प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि संस्था विभिन्न प्रमाणन कोर्स के माध्यम से बैंकिंग पेशेवरों को उन्नत कौशल प्रदान कर रही है।
लोकल हेड ऑफिस, भोपाल के जनरल मैनेजर मनोज कुमार ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने अटल पेंशन योजना, जनधन योजना और मुद्रा योजना जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वित्तीय सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है। कॉन्क्लेव के दौरान आईसेक्ट की वार्षिक रिपोर्ट, सफलता की कहानियों का ब्रोशर और ‘कौशल विकास’ बुकलेट का विमोचन किया गया। साथ ही विभिन्न संस्थानों के बीच एमओयू का आदान-प्रदान हुआ जिसमे रबीन्द्रनाथ टैगौर विश्वविद्यालय के साथ एल एंड टी तथा  एडुटेक, रेडवर्सिटी, आईआईबीएड के साथ स्कोप ग्लोबल स्किल विश्वविद्यालय प्रमुख रहे।
दूसरा सत्र नॉलेज सेशन का रहा जिसमें “वित्तीय समावेशन, तकनीकी नवाचार और भविष्य की बैंकिंग” पर बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञों एवं विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार साझा किए। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एलएचओ भोपाल के डीजीएम श्री जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में आईसेक्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सशक्त सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इस साझेदारी के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंची हैं। वर्तमान में लगभग 85 लाख खातों का संचालन किया जा रहा है, जो वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, कॉर्पोरेट ऑफिस मुंबई के डीजीएम श्री सूर्य प्रकाश राव ने कस्टमर सर्विस प्वाइंट (CSP) की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह बैंकिंग सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जोनल हेड श्री मुकेश भारती शर्मा ने CSP संचालकों को सफलता के तीन मूल मंत्र बताए—समय की पाबंदी, ग्राहकों के साथ अच्छा व्यवहार और तकनीकी दक्षता। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के रीजनल हेड एवं एसएलबीसी (SLBC) के कन्वीनर श्री धीरज गोयल ने राज्य स्तरीय बैंकिंग समन्वय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विभिन्न बैंकों और संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल ही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के जनरल मैनेजर श्री शैलेश कुमार पराख ने बैंकिंग क्षेत्र में रणनीतिक विकास और संस्थागत मजबूती की आवश्यकता पर जोर दिया।

तीसरे सत्र के दौरान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एण्ड फाईनेंस और आईसेक्ट विश्वविद्यालय समूह के मध्य एमओयू एक्सचेंज किया गया। इस एमओयू के बाद आईसेक्ट की सभी यूनिवर्सिटीज में बैंकिंग संबंधी कोर्स कराए जा सकेंगे। इस अवसर पर आईसेक्ट प्रतिनिधि सहित आईआईबीएफ के प्रतिनिधि ने कॉन्क्लेव को संबोधित किया।  इस सेशन में आईआईबीएफ से चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर बिजय कुमार झा, आईसेक्ट चेयरमैन एवं फाउंडर संतोष कुमार चौबे, आईसेक्ट डायरेक्टर अनुराग गुप्ता और आईसेक्ट यूनिवर्सिटी समूह के रजिस्ट्रार डॉ. सीतेश सिन्हा, डॉ. संगीता जौहरी, रवि चतुर्वेदी, डॉ. अरविंद तिवारी, ब्रजेश सिंह, मुनिश कुमार गोविंद उपस्थित रहे।
चौथे सत्र में वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में उपलब्ध व्यवसायिक अवसरों पर केंद्रित विशेष नॉलेज सेशन आयोजित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य उद्यमियों को बैंकिंग संवाददाता सेवाओं, डिजिटल वित्तीय सेवाओं तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में वित्तीय पहुंच बढ़ाने से जुड़े अवसरों की जानकारी प्रदान करना था।
अंतिम सत्र में उद्यमियों के लिए विकास और आयवृद्धि के नए अवसरों पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किया गया। विभिन्न चरणों में आयोजित इस सत्र में वित्तीय सेवाओं, ऑनलाइन नागरिक सेवाओं, शिक्षा, रोजगार, बीमा, नवाचार उत्पादों एवं नए व्यवसाय मॉडलों से जुड़ी संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी साझा की गई।

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