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50 वर्षों से प्रदेश की धड़कन: सारंगपुर का वह स्वदेशी पावर ट्रांसफार्मर जिसने समय को भी मात दी

भोपाल। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के राजगढ़ जिले स्थित सारंगपुर सबस्टेशन में भारत की सरकारी कंपनी एन जी ई एफ द्वारा 1976 का निर्मित
20 एमवीए क्षमता का एक पावर ट्रांसफार्मर आज केवल विद्युत उपकरण नहीं, बल्कि मालवा क्षेत्र के विकास, तकनीकी उत्कृष्टता और समर्पित रखरखाव की एक जीवंत मिसाल बन चुका है।

वर्ष 1976 में पहली बार ऊर्जीकृत हुआ यह ट्रांसफार्मर पिछले 50 वर्षों से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं को निरंतर और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति प्रदान कर रहा है।

आधी शताब्दी की अपनी गौरवशाली यात्रा में इस ट्रांसफार्मर ने मौसम, तकनीक, विभिन्न क्षेत्रऔर विद्युत तंत्र के अनेक बदलाव देखे हैं, लेकिन सत्तर के दशक में निर्मित इसकी उच्च गुणवत्ता और मजबूत अभिकल्पना के कारण इसकी कार्यक्षमता एवं विश्वसनीयता आज भी उल्लेखनीय बनी हुई है। यह उस दौर का साक्षी है जब मालवा क्षेत्र में औद्योगिक विकास गति पकड़ रहा था और आज भी उसी निष्ठा के साथ विकास की ऊर्जा का आधार बना हुआ है।

तकनीकी दक्षता और कर्मठता का अद्भुत उदाहरण : ऊर्जा मंत्री श्री तोमर-

मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने इस उपलब्धि को प्रदेश की ऊर्जा कंपनियों के सामूहिक प्रयास, तकनीकी दक्षता और कर्मठता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। उन्होंने विद्युत क्षेत्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में ऐसे योगदान सदैव प्रेरणादायी और स्मरणीय रहेंगे।

संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग का प्रेरक उदाहरण –

ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि आज जब ऊर्जा क्षेत्र में उपकरणों की बढ़ती जटिलता और तेजी से बदलती तकनीकों के बीच संसाधनों के अधिकतम उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है, तब सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आता है। यह केवल लोहे, तांबे और तेल से निर्मित मशीन नहीं, बल्कि उन हजारों अभियंताओं, तकनीशियनों और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिन्होंने पांच दशकों तक इसकी कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को बनाए रखा।

निर्धारित आयु से दोगुनी सेवा दे रहा है ट्रांसफार्मर-

विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि विद्युत क्षेत्र के मानकों के अनुसार किसी पावर ट्रांसफार्मर की सामान्य उपयोगी आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है। इसके विपरीत सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर अपनी निर्धारित आयु से दोगुना, अर्थात 50 वर्षों तक सफलतापूर्वक सेवा प्रदान कर रहा है, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धि है।

सरकारी क्षेत्र का प्रतिष्ठित उपक्रम था एनजीईएफ-

इस ट्रांसफार्मर का निर्माण एनजीईएफ (न्यू गवर्नमेंट इलेक्ट्रिकल फैक्ट्री) द्वारा किया गया था। कर्नाटक सरकार ने वर्ष 1956 में बेंगलुरु में इस सरकारी उपक्रम की स्थापना की थी। जर्मनी की एईजी कंपनी के तकनीकी सहयोग से प्रारंभ हुए इस उपक्रम ने देश और विदेश में अनेक बड़े पावर ट्रांसफार्मरों की सफल आपूर्ति की। लगभग 46 वर्षों तक उत्कृष्ट श्रेणी के विद्युत उपकरणों का निर्माण करने के बाद वर्ष 2002 में यह उपक्रम बंद हो गया।

विद्युत कंपनियों के समन्वित रखरखाव का परिणाम-

इस असाधारण सफलता के पीछे तत्कालीन मध्य प्रदेश विद्युत मंडल, मध्य प्रदेश राज्य विद्युत मंडल तथा वर्तमान एमपी ट्रांसको के अभियंताओं एवं तकनीकी कर्मचारियों की दशकों की मेहनत, दूरदर्शिता और प्रभावी रखरखाव नीति रही है। नियमित परीक्षण, समयबद्ध मेंटेनेंस, संतुलित लोड प्रबंधन तथा तकनीकी मानकों के कठोर अनुपालन ने इस ट्रांसफार्मर को निरंतर सक्षम बनाए रखा।
इसके साथ ही विद्युत वितरण कंपनी द्वारा संबंधित फीडरों के उत्कृष्ट रखरखाव ने भी इसकी लंबी आयु सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाह्य फाल्ट और नेटवर्क व्यवधानों को न्यूनतम रखने के प्रयासों से ट्रांसफार्मर पर पड़ने वाले विद्युत एवं यांत्रिक तनाव में कमी आई, जिससे इसकी विश्वसनीयता और सेवा अवधि दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

मालवा की ऊर्जा गाथा का स्वर्णिम अध्याय-

सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर केवल बिजली उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि यह सिद्ध कर रहा है कि समर्पित रखरखाव, तकनीकी उत्कृष्टता और कर्मनिष्ठा के बल पर किसी भी संसाधन की उपयोगिता और सेवा अवधि को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जा सकता है। यह मालवा की ऊर्जा गाथा का एक स्वर्णिम अध्याय है, जो आने वाली पीढ़ियों के अभियंताओं को प्रेरित करता रहेगा।-

एमपी ट्रांसको नेटवर्क में आज भी क्रियाशील हैं एनजीईएफ के 20 ट्रांसफार्मर-
एमपी ट्रांसको के नेटवर्क में वर्तमान में एनजीईएफ द्वारा निर्मित कुल 20 ट्रांसफार्मर क्रियाशील हैं। इनमें एक 160 एमवीए क्षमता का, पांच 40 एमवीए क्षमता के तथा 14 ट्रांसफार्मर 20 एमवीए क्षमता के हैं। ये सभी ट्रांसफार्मर 30 से 50 वर्ष तक की सफल सेवा दे चुके हैं और आज भी प्रदेश की विद्युत व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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