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विश्व कप का प्रारूप बदलना विशेषज्ञों को नहीं आया रास, बताया अव्यवस्थित; भारत-PAK और एसोसिएट टीमों पर सवाल

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप के लिए नया प्रतियोगिता प्रारूप पेश किया है। हालांकि, इस बदलाव के बाद क्रिकेट जगत में इसकी आलोचना शुरू हो गई है। कई क्रिकेट विशेषज्ञों ने नए फॉर्मेट को जटिल बताते हुए एसोसिएट टीमों के साथ होने वाले व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।

नया वनडे विश्व कप फॉर्मेट क्या है?
आईसीसी के नए प्रारूप के अनुसार विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने वाली 14 टीमों में सबसे निचले तीन स्थान पर रहने वाली टीमें पहले राउंड-रॉबिन सुपर सीरीज खेलेंगी। इस सुपर सीरीज में शीर्ष पर रहने वाली टीम ही दूसरे चरण यानी ग्रुप स्टेज में पहुंचेगीइसके बाद 12 टीमों को छह-छह टीमों के दो ग्रुप में बांटा जाएगा। दोनों ग्रुप में कुल 30 मुकाबले खेले जाएंगे। इसके बाद हर ग्रुप की शीर्ष तीन टीमें सुपर-7 चरण में पहुंचेंगी। सुपर-7 की सातवीं टीम दोनों ग्रुप की चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली होगी। सुपर-7 में सभी टीमें राउंड-रॉबिन प्रारूप में खेलेंगी और अंत में शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगीएसोसिएट टीमों को लेकर क्या सवाल उठ रहे हैं?
मौजूदा क्वालिफिकेशन प्रणाली के अनुसार आईसीसी पुरुष वनडे रैंकिंग की शीर्ष आठ टीमें और सह-मेजबान दक्षिण अफ्रीका व जिम्बाब्वे सीधे विश्व कप के लिए क्वालिफाई करेंगे। इस तरह 14 में से 10 स्थान पहले ही तय हो जाएंगे। बाकी चार स्थान क्रिकेट विश्व कप क्वालिफायर के जरिए भरे जाएंगे, जिसमें सबसे निचली रैंकिंग वाली दो पूर्ण सदस्य टीमें भी शामिल होंगी। आलोचकों का मानना है कि नए प्रारूप में 12वें से 14वें स्थान पर रहने वाली एसोसिएट टीमों को मुख्य प्रतियोगिता में खेलने का अवसर सीमित हो जाएगा।

क्रिकेट विशेषज्ञों ने क्या कहा?
क्रिकेट विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वनडे विश्व कप को 12 टीमों का बना दिया गया है और उसके साथ एक ‘बेहद अजीब’ प्ले-इन ट्राई-सीरीज जोड़ दी गई है। उन्होंने इसे एक ‘त्रासदी’ बताया। अंग्रेजी पत्रकार मैट रोलर ने कहा कि यह फॉर्मेट ऐसा लगता है जैसे 14 टीमों के विश्व कप को बिना सीधे कहे 12 टीमों का बनाने की कोशिश की गई हो। हालांकि, इस नए फॉर्मेट को लेकर अब तक किसी भी क्रिकेटर ने सार्वजनिक तौर पर कोई सवाल नहीं उठाया है।

वहीं, एक अन्य विशेषज्ञ का मानना है कि इस बदलाव से एसोसिएट टीमों की हिस्सेदारी कम होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भारत और पाकिस्तान के बीच दो या उससे अधिक मुकाबले कराने की संभावना भी बनाई गई है। उन्होंने पूरे फॉर्मेट को ‘पूरी तरह अव्यवस्थित’ बताया।भारत-पाकिस्तान के ज्यादा मुकाबलों की संभावना क्यों?
नए प्रारूप के तहत इस टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान के बीच एक या दो नहीं, बल्कि तीन मुकाबले होने की संभावना बन सकती है। आईसीसी ने प्रतियोगिता के ढांचे में ऐसे बदलाव किए हैं, जिनके चलते दोनों टीमों के एक से अधिक बार आमने-सामने आने की संभावना बढ़ गई है। यदि भारत और पाकिस्तान एक ही ग्रुप में रहते हैं और दोनों सुपर-7 चरण में पहुंचते हैं, तो उनके बीच वहां फिर मुकाबला हो सकता है। इसके बाद यदि दोनों शीर्ष चार में रहते हैं तो सेमीफाइनल या फाइनल में भी आमना-सामना होने की संभावना बनी रहेगी।

फॉर्मेट को लेकर और क्या सवाल उठे?
वहीं एक ने सवाल उठाया कि जब एसोसिएट टीमें पहले ही विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर चुकी हैं, तो उन्हें फिर से क्वालिफाई करने जैसी प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ेगा। उन्होंने यह भी पूछा कि फॉर्मेट को इतना जटिल बनाने की जरूरत क्या थी।

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