PAREIDOLIA — पाँच स्त्रियाँ, पाँच संसार, एक मंच

नई दिल्ली: रंगमंच समूह संसप्तक ने 19 सितम्बर 2026 को बांगिया समाज ऑडिटोरियम, चित्तरंजन पार्क, नई दिल्ली में श्री तोरित मित्र की पाँच एकल रचनाओं पर आधारित विशेष रंगमंचीय श्रृंखला PAREIDOLIA प्रस्तुत की। पाँच स्त्री पात्रों के माध्यम से यह प्रस्तुति देखने, समझने और अर्थ गढ़ने की मानवीय प्रवृत्ति को परखती है। ‘Pareidolia’ उस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया को कहा जाता है, जिसमें मन किसी अस्पष्ट आकृति, घटना या अनुभव में कोई परिचित चेहरा, रूप या अर्थ देख लेता है।
इसी अवधारणा को रंगमंचीय भाषा में रूपांतरित करते हुए PAREIDOLIA स्त्री, स्मृति, मृत्यु, भय, पहचान और सामाजिक धारणाओं के अलग-अलग संसारों को सामने लाती है। श्रृंखला में ‘दुहिता’ में कौशिकी देब, ‘मात्रीघात’ में पारोमा भट्टाचार्य, ‘ओमिशा’ में अनिंदिता सेठ, ‘डाईसेक्शन’ में प्रीति गुप्ता और ‘बाघ ओ ओधॅरॅनजॅनी’ में श्रीमयी दासगुप्ता ने एकल प्रस्तुतियाँ दीं, जबकि गौतम पाल ने मेटाफर की भूमिका निभाई।
इन प्रस्तुतियों का निर्देशन सरनेंदु चाकी एवं अंजन बोस ने किया। मंच सज्जा अंजन बोस, ध्वनि एवं संगीत सृजन श्रीमयी दासगुप्ता, लाइटिंग सृजन सरनेंदु चाकी और ध्वनि संचालन सिद्धार्थ सिकदर ने किया। PAREIDOLIA का मंचीय संसार न्यूनतम साधनों—प्रकाश, शरीर, ध्वनि, छाया, वस्तुओं और रिक्त स्थान—के माध्यम से निर्मित किया गया, जहाँ मंच को बदलने के बजाय रोशनी, ध्वनि और दर्शक की दृष्टि के माध्यम से वही स्थान अलग-अलग अर्थों और भावनाओं में परिवर्तित होता है।
प्रस्तुति दर्शकों को केवल पात्रों और उनकी कहानियों को देखने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि हम किसी पात्र में क्या देखते हैं, उसे किस अर्थ में समझते हैं और हमारे अपने अनुभव हमारी दृष्टि को किस तरह प्रभावित करते हैं। इस तरह PAREIDOLIA पाँच स्त्री संसारों की प्रस्तुति के साथ-साथ देखने और अर्थ गढ़ने की मानवीय प्रक्रिया पर एक रंगमंचीय प्रयोग के रूप में सामने आती है।



